UBS: भारत में महंगाई का 'लाल झंडा'! FY27 का अनुमान बढ़ाया, RBI कर सकता है ब्याज दरें बढ़ाने का ऐलान

ECONOMY
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AuthorAditya Rao|Published at:
UBS: भारत में महंगाई का 'लाल झंडा'! FY27 का अनुमान बढ़ाया, RBI कर सकता है ब्याज दरें बढ़ाने का ऐलान
Overview

UBS Securities की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत में फाइनेंशियल ईयर 2027 (FY27) तक महंगाई दर **5.2%** तक पहुंच सकती है। यह अनुमान पहले के **4.6%** के आंकड़े से काफी ज्यादा है और इसके पीछे ग्लोबल एनर्जी कीमतों में उछाल और भू-राजनीतिक जोखिमों को वजह बताया गया है। इस बढ़ती महंगाई के चलते रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की ओर से मॉनेटरी पॉलिसी में सख्ती (Policy Tightening) के संकेत मिल रहे हैं।

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महंगाई का नया अनुमान और RBI का एक्शन

UBS Securities ने FY27 के लिए भारत की हेडलाइन कंज्यूमर प्राइस इन्फ्लेशन (CPI) का अनुमान बढ़ाकर 5.2% कर दिया है, जो पहले 4.6% था। यह बढ़ोतरी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) को अपनी मॉनेटरी पॉलिसी में बदलाव करने पर मजबूर कर सकती है। उम्मीद है कि RBI फाइनेंशियल ईयर 2027 की दूसरी छमाही में ब्याज दरों (Interest Rates) में बढ़ोतरी कर सकता है। इसके अलावा, RBI सिस्टम लिक्विडिटी को मैनेज करने के लिए कदम उठा सकता है, जिससे उधार लेने की लागत (Borrowing Costs) बढ़ सकती है और बाजार में उतार-चढ़ाव (Volatility) देखने को मिल सकता है।

कीमतों में उछाल के पीछे क्या हैं कारण?

यह महंगाई सिर्फ एनर्जी कीमतों तक सीमित नहीं है। एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के महंगे होने से एयरफेयर में बढ़ोतरी और कमर्शियल लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) के दाम बढ़ने से रेस्टोरेंट की कीमतों में इजाफा देखने को मिल रहा है। सप्लाई चेन की दिक्कतें और कमजोर भारतीय रुपये (Indian Rupee) के कारण इम्पोर्ट महंगा हो रहा है, जिससे ट्रेड और करंट अकाउंट डेफिसिट पर भी दबाव बढ़ सकता है।

फूड इन्फ्लेशन और फिस्कल डेफिसिट का दोहरा झटका

मौसम में अनिश्चितता के चलते फूड इन्फ्लेशन (Food Inflation) का खतरा भी बढ़ रहा है, जो ऐतिहासिक रूप से कीमतों में बड़ी वृद्धि का कारण रहा है। भारत का हाई फिस्कल डेफिसिट (Fiscal Deficit) इस स्थिति को और जटिल बना देता है, क्योंकि उधार लेने की लागत बढ़ने से सरकारी कर्ज का प्रबंधन मुश्किल हो सकता है।

शेयर बाजार पर असर और RBI का रुख

UBS का मानना है कि भले ही भू-राजनीतिक तनाव कम हो जाएं, लेकिन महंगाई का दबाव बना रहेगा। भारत के शेयर बाजार, जो अपने साथियों की तुलना में हाई प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेशियो पर ट्रेड कर रहे हैं, उन्हें ऊंची उधार लागत और टाइट लिक्विडिटी से चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। Credit Suisse जैसे ब्रोकरेज हाउस भी महंगाई के बढ़ते ट्रेंड पर नजर रख रहे हैं।

पॉलिसी शिफ्ट की ओर बढ़ता भारत

RBI सिस्टम लिक्विडिटी को नॉर्मलाइज करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जो मॉनेटरी कंडीशंस के सक्रिय प्रबंधन का संकेत है। यह कदम क्रेडिट उपलब्धता को कम कर सकता है और कंपनियों व उपभोक्ताओं के लिए उधार की लागत बढ़ा सकता है। इसके साथ ही, RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) के युग का अंत हो सकता है, जिससे 'अकॉमोडेटिव' पॉलिसी के बाद सख्त नीतियों का दौर शुरू होगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.