UAE का OPEC से Exit: कच्चे तेल में तूफानी तेजी, Nifty 24K के नीचे, Banking Stocks धड़ाम!

ECONOMY
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
UAE का OPEC से Exit: कच्चे तेल में तूफानी तेजी, Nifty 24K के नीचे, Banking Stocks धड़ाम!
Overview

UAE के OPEC और OPEC+ से अचानक बाहर निकलने और Iran के बढ़ते तनाव के चलते कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आग लग गई है। इसके कारण शेयर बाजार में घबराहट फैल गई और Nifty 50, **24,000** के स्तर से नीचे आ गया। Banking Stocks इस बिकवाली का मुख्य कारण बने।

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तेल में उछाल और बाजार में घबराहट

UAE ने OPEC और OPEC+ से हटने का फैसला किया है, जिसका असर तुरंत देखने को मिला। 28 अप्रैल 2026 को Brent Crude का भाव $111-112 प्रति बैरल तक पहुँच गया, जबकि West Texas Intermediate (WTI) $97-100 के करीब कारोबार कर रहा था। Iran के साथ बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने इस आग में घी का काम किया।

Nifty 50 और Sensex की गिरावट

ऊंचे तेल की कीमतों और निवेशकों की चिंता के चलते भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली हुई। Nifty 50 इंडेक्स 0.4% गिरकर 23,995.70 पर बंद हुआ, जो 24,000 के अहम स्तर से नीचे है। वहीं, Sensex 0.54% लुढ़ककर 76,886.91 पर आ गया। Nifty Bank इंडेक्स में खास तौर पर बड़ी गिरावट देखी गई, जो बैंकिंग शेयरों की कमजोरी को दर्शाता है।

RBI का नया फ्रेमवर्क और सेक्टर पर असर

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने Expected Credit Loss (ECL) फ्रेमवर्क को फाइनल कर दिया है, जिससे अप्रैल 2027 से बैंकों के लिए प्रोविजनिंग (Provisioning) के नियम सख्त हो जाएंगे। इसके विपरीत, तेल और गैस (Oil & Gas) और मेटल (Metal) सेक्टर में तेजी देखी गई, जबकि मिड-कैप और स्मॉल-कैप इंडेक्स बेंचमार्क की तुलना में अधिक स्थिर दिखे।

एयरलाइंस पर जेट फ्यूल का बोझ

कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के सीधे असर से जेट फ्यूल (Jet Fuel) की लागत बढ़ गई है। इस वजह से भारतीय एयरलाइंस कंपनियों ने सरकार से तुरंत मदद की गुहार लगाई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो उनके संचालन पर गंभीर असर पड़ेगा, खासकर उन सप्लाई रूट्स पर जो Iran संघर्ष से प्रभावित हैं।

Maruti Suzuki के नतीजे

देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी Maruti Suzuki ने Q4 FY26 के लिए ₹3,659 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल की इसी तिमाही से 6.45% कम है। हालांकि, कंपनी का रेवेन्यू रिकॉर्ड ₹52,462.50 करोड़ रहा। प्रॉफिट घटने की मुख्य वजह प्रॉफिट मार्जिन का सिकुड़ना बताया जा रहा है, जो पिछले साल के 10.07% से घटकर 7.31% रह गया। कंपनी ने ₹140 प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड (Dividend) घोषित किया है, लेकिन उसका Return on Equity (ROE) 13.31% रहा, जो इंडस्ट्री एवरेज से कम है।

Eternal Ltd. का दमदार मुनाफा, रेवेन्यू में कमी

Zomato और Blinkit की पैरेंट कंपनी Eternal Ltd. के नतीजे मिले-जुले रहे। कंपनी का नेट प्रॉफिट 346% बढ़कर ₹174 करोड़ हो गया, लेकिन कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹17,292 करोड़ रहा, जो एनालिस्ट्स की उम्मीदों से कम था। कंपनी ने FY29 तक $1 बिलियन के एडजस्टेड ऑपरेटिंग प्रॉफिट का टारगेट बनाए रखा है। हालांकि, कंपनी का हाई P/E Ratio (97x TTM से ऊपर) और क्विक कॉमर्स सेक्टर में कड़ी प्रतिस्पर्धा को देखते हुए कुछ एनालिस्ट्स इसके मार्जिन की स्थिरता पर सवाल उठा रहे हैं।

बाजार में सौदे

Parle Products, जो Parle-G बिस्किट बनाती है, एक संभावित IPO के लिए इन्वेस्टमेंट बैंक्स से शुरुआती बातचीत कर रही है। यह एक सेकेंडरी ऑफरिंग हो सकती है, जिसमें मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे। वहीं, वेंचर कैपिटल फर्म Peak XV Partners ने डिजिटल पेमेंट कंपनी MobiKwik से अपना पूरा एग्जिट (Exit) कर लिया है। उन्होंने ₹130 करोड़ में अपनी हिस्सेदारी ₹214 प्रति शेयर के भाव पर ब्लॉक डील में बेची।

बैंकिंग सेक्टर का आगे का रास्ता

भारतीय बैंकिंग सेक्टर को उम्मीद है कि 2026 की पहली छमाही में रिटेल और SME लेंडिंग से क्रेडिट ग्रोथ 11-13% रह सकती है। हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ती महंगाई से मार्जिन और ग्रोथ पर दबाव का जोखिम बना हुआ है। RBI के नए ECL फ्रेमवर्क से प्रोविजनिंग बढ़ेगी, जिससे बैंकों का नजरिया थोड़ा सतर्क हो गया है। एसेट क्वालिटी में सुधार हुआ है, पर डिपॉजिट ग्रोथ लोन की तुलना में पिछड़ रही है, जिससे क्रेडिट-डिपॉजिट रेश्यो करीब 83% पर आ गया है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.