दिन भर चला उतार-चढ़ाव का खेल
सोमवार को वॉल स्ट्रीट (Wall Street) पर कारोबार एक उथल-पुथल भरे सत्र के रूप में रहा। शुरुआती घंटों में भारी बिकवाली देखी गई, जहां S&P 500 इंडेक्स 1.5% तक गिर गया था, वहीं Dow Jones Industrial Average में लगभग 900 अंकों की गिरावट आई थी। बाजार में यह घबराहट मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक तेल आपूर्ति पर इसके संभावित असर को लेकर थी।
तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव
ईरान-अमेरिका तनाव की खबरों से कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया था। ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) कुछ समय के लिए $119.5 प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया, जो कि 2022 की गर्मियों के बाद का उच्चतम स्तर था। इस तरह के दाम बढ़ने से पहले से ही महंगाई से जूझ रहे आम लोगों के बजट पर दबाव और कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंकाएं गहरा गई थीं।
ट्रंप के बयान ने पलटा पासा
हालांकि, बाजार में दिन के आखिरी घंटे में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने निवेशकों को बड़ी राहत दी। ट्रंप ने कहा, "मुझे लगता है कि युद्ध लगभग पूरा हो चुका है।" इस बयान ने संघर्ष के लंबा खिंचने के डर को काफी हद तक कम कर दिया।
इससे पहले, G7 देशों द्वारा तेल की कीमतों में वृद्धि को रोकने के लिए संभावित समन्वित कार्रवाई की अटकलें लगाई जा रही थीं। लेकिन ट्रंप के बयान ने बाजार की दिशा ही बदल दी। अंततः, ब्रेंट क्रूड $98.96 प्रति बैरल पर बंद हुआ, जबकि अमेरिकी बेंचमार्क क्रूड $85 के करीब आ गया, जो दिन के उच्चतम स्तर $119.48 से काफी कम था।
बाजार में लौटी रौनक, इंडेक्स बढ़त के साथ बंद
इस अचानक आए बदलाव के बाद, अमेरिकी शेयर बाजारों में दिन के अंत में जोरदार रिकवरी देखी गई। S&P 500 इंडेक्स 55.97 अंकों की बढ़त के साथ 6,795.99 पर बंद हुआ। Dow Jones Industrial Average 239.25 अंक चढ़कर 47,740.8 पर और Nasdaq Composite 308.27 अंक बढ़कर 22,695.95 पर बंद हुआ।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी इसका असर दिखा। जो बाजार तेल आयात पर अधिक निर्भर हैं, उनमें ट्रंप के बयान से पहले तेज गिरावट आई थी। दक्षिण कोरिया का Kospi 6%, जापान का Nikkei 225 5.2% और फ्रांस का CAC 40 1% गिर गया था।
बॉन्ड मार्केट में भी हलचल
बॉन्ड मार्केट में, 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड (10-year Treasury yield) 4.1% तक गिर गया, जो 4.15% से कम था। यह महंगाई बढ़ने की चिंता (जो यील्ड को ऊपर धकेलती है) और अर्थव्यवस्था धीमी पड़ने की आशंका (जो यील्ड को नीचे खींचती है) के बीच की खींचतान को दर्शाता है। पिछले शुक्रवार की कमजोर अमेरिकी जॉब रिपोर्ट ने भी आर्थिक सुस्ती की चिंताओं को बढ़ावा दिया था।