H-1B Visa Salary Hike: अमेरिकी कंपनियों की बढ़ी मुश्किलें! विदेशी टैलेंट पर लग सकती है रोक?

ECONOMY
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AuthorKaran Malhotra|Published at:
H-1B Visa Salary Hike: अमेरिकी कंपनियों की बढ़ी मुश्किलें! विदेशी टैलेंट पर लग सकती है रोक?
Overview

अमेरिकी सरकार H-1B वीज़ा के तहत काम करने वाले विदेशी प्रोफेशनल्स के लिए न्यूनतम सैलरी (Minimum Salary) को काफी बढ़ाने का प्रस्ताव लेकर आई है। इस कदम से अमेरिकी कंपनियों पर सालाना अरबों डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका है और यह कुशल विदेशी टैलेंट के लिए मौके कम कर सकता है।

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H-1B वीज़ा के नए सैलरी नियम: कंपनियों पर बढ़ेगा खर्च

ट्रम्प प्रशासन H-1B वीज़ा प्रोग्राम में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है, जिससे विदेशी टैलेंट पर निर्भर अमेरिकी कंपनियों के लिए लेबर कॉस्ट (Labor Cost) में भारी इज़ाफ़ा होने वाला है। नए न्यूनतम सैलरी थ्रेशोल्ड (Minimum Salary Threshold) के तहत, सैन फ्रांसिस्को जैसे शहरों में एंट्री-लेवल सॉफ्टवेयर इंजीनियरों को सालाना $162,000 कमाने होंगे, जो कि मौजूदा स्तर से करीब 30% ज़्यादा है। डलास और न्यूयॉर्क जैसे शहरों के लिए भी ऐसे ही बड़े उछाल की उम्मीद है, जहाँ न्यूनतम सैलरी $113,000 और $132,000 तक जा सकती है।

कंपनियां देंगी अरबों डॉलर ज़्यादा

इमिग्रेशन डेटा फर्म Lawfully और Threshold के विश्लेषण के अनुसार, इन सैलरी की नई दरों के कारण बड़ी कंपनियों को पहले साल में ही कम से कम $18 बिलियन का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है। यह खर्च अगले तीन सालों में बढ़कर $43 बिलियन सालाना तक पहुँच सकता है, क्योंकि मौजूदा वीज़ा नवीनीकरण के तहत नई, ऊंची पे-स्केल लागू होंगे। यह भारी वित्तीय बोझ युवा विदेशी टैलेंट के अवसरों को सीमित कर सकता है, क्योंकि कंपनियाँ H-1B कर्मचारियों को काम पर रखने की लागत-प्रभावशीलता (Cost-Effectiveness) का फिर से आकलन करेंगी।

सरकार का लक्ष्य: अमेरिकी वेज बढ़ाना

प्रशासन का कहना है कि इसका मुख्य उद्देश्य विदेशी नागरिकों को अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन को कम करने से रोकना है। वे बताते हैं कि H-1B वीज़ा धारक अक्सर अपने अमेरिकी समकक्षों की तुलना में करीब $10,000 कम कमाते हैं। समर्थकों का तर्क है कि इससे खेल का मैदान (Playing Field) समान होगा और यह सुनिश्चित होगा कि वीज़ा का इस्तेमाल ज़रूरी स्किल गैप्स को बेहतरीन टैलेंट से भरने के लिए ही हो। इसका असर सिर्फ टेक सेक्टर तक सीमित नहीं है, बल्कि फाइनेंस, मेडिसिन, सिविल इंजीनियरिंग, रिसर्च और शिक्षा जैसे क्षेत्रों पर भी पड़ेगा।

H-1B प्रोग्राम की भविष्य में भूमिका बदल सकती है

H-1B प्रोग्राम ऐतिहासिक रूप से विदेशी पेशेवरों के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग रहा है, जिसके ज़रिए Alphabet के CEO सुंदर पिचाई और Microsoft के CEO सत्या नडेला जैसे लोग अमेरिका में अपना करियर बना पाए हैं। प्रस्तावित बदलावों से प्रोग्राम का फोकस शुरुआती और मध्य-करियर की भूमिकाओं से हटकर उन अत्यधिक अनुभवी (Highly Experienced) कामगारों की ओर जा सकता है जो ज़्यादा सैलरी का हकदार होते हैं। यह कंपनियों और संभावित विदेशी कर्मचारियों, दोनों के लिए एक बड़ा समायोजन (Adjustment) होगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.