Kevin Warsh Fed Nomination: बड़े झटके के संकेत! नियुक्ति पर मंडराया गहरा 'संदेह', अमेरिकी मॉनेटरी पॉलिसी पर अनिश्चितता

ECONOMY
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AuthorNeha Patil|Published at:
Kevin Warsh Fed Nomination: बड़े झटके के संकेत! नियुक्ति पर मंडराया गहरा 'संदेह', अमेरिकी मॉनेटरी पॉलिसी पर अनिश्चितता
Overview

अमेरिका के फेडरल रिज़र्व (Federal Reserve) में प्रेसिडेंट ट्रम्प के नॉमिनी केविन वॉर्श (Kevin Warsh) की नियुक्ति पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। ज़रूरी दस्तावेज़ों की कमी और एक रिपब्लिकन सीनेटर के विरोध के चलते उनकी कन्फर्मेशन हियरिंग को टाल दिया गया है, जिससे अमेरिकी मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।

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प्रक्रियात्मक अड़चनें और राजनीतिक विरोध

प्रेजेंट डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) के फेडरल रिज़र्व के नॉमिनी केविन वॉर्श (Kevin Warsh) की कन्फर्मेशन हियरिंग (confirmation hearing) अब तय समय पर नहीं होगी। इसकी मुख्य वजह वॉर्श द्वारा सीनेट बैंकिंग कमेटी (Senate Banking Committee) को ज़रूरी फाइनेंशियल और एथिक्स डिस्क्लोज़र्स (financial and ethics disclosures) सबमिट न करना है। ये प्रक्रिया का एक स्टैंडर्ड स्टेप है। इसी बीच, रिपब्लिकन सीनेटर थॉमस टिलिस (Thom Tillis) ने साफ कर दिया है कि जब तक फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल (Jerome Powell) के ख़िलाफ़ चल रही एक फेडरल जांच (federal investigation) का नतीजा नहीं आ जाता, तब तक वे वॉर्श के नाम पर वोट नहीं करेंगे। कमेटी के सदस्यों को देखते हुए टिलिस का वोट कन्फर्मेशन के लिए बेहद ज़रूरी है।

कसता जा रहा कन्फर्मेशन का समय

सीनेट मेजोरिटी लीडर जॉन थून (John Thune) ने कहा है कि टिलिस के समर्थन के बिना वॉर्श की कन्फर्मेशन मुश्किल है। विपक्षी डेमोक्रेट्स (Democrats) भी उनके ख़िलाफ़ हैं। पॉवेल का फेड चेयरमैन के तौर पर कार्यकाल 15 मई 2026 को ख़त्म हो रहा है। यदि वॉर्श कन्फर्म नहीं हो पाते, तो पॉवेल अस्थायी तौर पर पदभार संभालेंगे। ऐसे में, बढ़ती महंगाई (inflation) के दौर में और वैश्विक स्तर पर मॉनेटरी पॉलिसी पर बारीकी से नज़र रखे जाने के बीच, अमेरिका की प्रमुख मॉनेटरी पॉलिसी लीडरशिप पर अनिश्चितता छाई रह सकती है।

बाज़ार की घबराहट और पिछली प्रतिक्रियाएं

वॉर्श, जो 55 साल के हैं, पहले भी फेड गवर्नर रह चुके हैं और फिलहाल स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के हूवर इंस्टीट्यूशन (Hoover Institution) में फेलो हैं। बाज़ार को उम्मीद थी कि उनके अनुभव के कारण उन्हें अच्छी प्रतिक्रिया मिलेगी। हालांकि, 'इंफ्लेशन हॉक' (inflation hawk) के तौर पर उनकी पहचान पहले ही बाज़ार में हलचल मचा चुकी थी। नॉमिनेशन के बाद गोल्ड और सिल्वर की कीमतों में भारी गिरावट आई थी, जिसमें सिल्वर तो जनवरी के अंत तक 40% से ज़्यादा लुढ़क गई थी। बाज़ार इस संभावित चाल को इंटरेस्ट रेट्स (interest rates) में बढ़ोतरी और मज़बूत डॉलर (stronger dollar) का संकेत मान रहा था।

ग्लोबल कैपिटल फ्लो पर असर

भारतीय और अन्य उभरते बाज़ारों (emerging markets) के लिए फेड का नेतृत्व कौन करता है, यह अहम है। फेडरल रिज़र्व के इंटरेस्ट रेट के फैसले सीधे तौर पर डेवलपिंग इकोनॉमीज़ में फॉरेन कैपिटल फ्लो (foreign capital flow), भारतीय रुपया (Indian Rupee) जैसी करेंसी की वैल्यू और ग्लोबल बॉरोइंग कॉस्ट (global borrowing costs) को प्रभावित करते हैं। इसलिए, अमेरिकी मॉनेटरी पॉलिसी लीडरशिप को लेकर अनिश्चितता दुनियाभर के फाइनेंशियल मार्केट्स (financial markets) में बड़े उतार-चढ़ाव का कारण बन सकती है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.