अमेरिकी ट्रेड डील का जादू, रुपया 3 साल की रिकॉर्ड तेजी पर! पर शुक्रवार को दिखी नरमी, क्या है वजह?

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AuthorAditya Rao|Published at:
अमेरिकी ट्रेड डील का जादू, रुपया 3 साल की रिकॉर्ड तेजी पर! पर शुक्रवार को दिखी नरमी, क्या है वजह?
Overview

भारतीय रुपये ने अमेरिकी ट्रेड डील के बाद पिछले **3 सालों** में अपनी सबसे शानदार साप्ताहिक क्लोजिंग दर्ज की है। इस बड़ी डील ने भारतीय करेंसी में जोश भर दिया था, लेकिन शुक्रवार को डॉलर की मांग और फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट (FPI) के संभावित आउटफ्लो के चलते रुपये में नरमी देखी गई।

ट्रेड डील से मिली मजबूती, पर शुक्रवार को लगा झटका

अमेरिका और भारत के बीच हुए ऐतिहासिक ट्रेड एग्रीमेंट ने भारतीय रुपये (Indian Rupee) को जबरदस्त मजबूती दी है। इस डील के तहत अमेरिका ने भारतीय इम्पोर्ट्स पर लगने वाले टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया है। इस बड़ी राहत ने रुपये की चाल को काफी तेज कर दिया था। हालांकि, शुक्रवार को दिन के कारोबार के दौरान रुपये में कमजोरी दिखी। डॉलर की बढ़ती मांग और पहले से बने हुए रुपये के लॉन्ग पोजीशन पर लगे स्टॉप-लॉस ट्रिगर होने से यह नरमी आई। दिन के अंत में रुपया 90.70 के स्तर पर बंद हुआ, जो कि हफ्ते के लिहाज से अभी भी मजबूत है।

RBI का फैसला और FPI की चाल

जहां एक ओर ट्रेड डील ने रुपये को सहारा दिया, वहीं भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी मॉनेटरी पॉलिसी में कोई बदलाव नहीं किया। RBI ने रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा है और 'न्यूट्रल' (Neutral) स्टांस को जारी रखा है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक स्थिर संकेत है, लेकिन यह करेंसी की गिरावट को रोकने के लिए कोई तत्काल राहत नहीं देता। रुपये की मजबूती कितनी बनी रहेगी, यह फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट (FPI) के इनफ्लो पर निर्भर करेगा। फरवरी की शुरुआत (3 फरवरी तक) में ₹5,426.24 करोड़ (लगभग 650 मिलियन डॉलर) का इनफ्लो देखा गया है, जो जनवरी के ₹35,962 करोड़ (लगभग 4.3 बिलियन डॉलर) के बड़े आउटफ्लो के बाद आया है। यह FPI की अस्थिरता रुपये के लिए एक बड़ा फैक्टर है, खासकर जब ग्लोबल कैपिटल AI-केंद्रित बाजारों की ओर बढ़ रहा है। जनवरी 2026 के अंत में रुपया डॉलर के मुकाबले 92 के स्तर के करीब पहुंच गया था, जो इन कैपिटल मूवमेंट्स के प्रति इसकी संवेदनशीलता को दर्शाता है।

ग्लोबल और मैक्रो फैक्टर्स का असर

वैश्विक स्तर पर, डॉलर इंडेक्स 97.8 के आसपास बना हुआ है, जबकि एशियाई करेंसीज़ मिली-जुली चाल दिखा रही हैं। जापानी येन (JPY) भी 156 के पार कमजोर हुआ है। ट्रेड और कैपिटल फ्लोज़ के अलावा, कई मैक्रोइकॉनॉमिक फैक्टर्स भी रुपये पर असर डाल रहे हैं। भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं, जैसे कि अमेरिका-ईरान वार्ता और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, इमर्जिंग मार्केट करेंसीज़ के लिए चुनौतियां पैदा कर रही हैं।

आगे क्या? रुपये की राह किन बातों पर निर्भर?

कुल मिलाकर, ट्रेड डील ने सेंटिमेंट को बूस्ट किया है, लेकिन मार्केट पार्टिसिपेंट्स अब इसके इम्प्लीमेंटेशन डिटेल्स और फॉरेन कैपिटल की वापसी पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं। रुपये में लगातार मजबूती के लिए ट्रेड डील की सफलता के साथ-साथ फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट (FPI) के मजबूत और लगातार इनफ्लो की जरूरत होगी। विश्लेषकों का मानना है कि USD-INR की जोड़ी ₹90.40 से ₹91.20 के बीच ट्रेड कर सकती है, और 2026 की पहली तिमाही के अंत तक यह 91.44 के आसपास रहने की उम्मीद है।

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