टाटा संस का प्राइवेट स्टेटस खतरे में?
नोएल टाटा की सबसे बड़ी चिंता टाटा संस के 'प्राइवेट कंपनी' स्टेटस को बचाए रखना है। यह स्टेटस कंपनी को शेयर बाजार की उठा-पटक और बाहरी दबाव से बचाता है, और टाटा परिवार व ट्रस्ट्स का कंट्रोल बनाए रखता है। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) टाटा संस को 'अपर लेयर' नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (UL-NBFC) घोषित कर सकता है, जिसके लिए इसे पब्लिक करना पड़ सकता है। कंपनी इस स्टेटस से बचने के लिए ₹20,000 करोड़ का बड़ा 'क्लीन-अप' 2024 में कर चुकी है और अब RBI के फैसले का इंतजार कर रही है।
टाटा डिजिटल और एयर इंडिया का बढ़ता घाटा
दूसरी बड़ी चिंता टाटा डिजिटल (Tata Digital) और एयर इंडिया (Air India) जैसे यूनिट्स के लगातार हो रहे भारी घाटे को लेकर है। फाइनेंशियल ईयर 2026 के पहले तीन तिमाहियों में इन यूनिट्स ने काफी बड़े घाटे दर्ज किए हैं। अगर इन हाई-इन्वेस्टमेंट बिज़नेस की परफॉरमेंस ऐसे ही खराब रहती है, तो टाटा संस पर कर्ज का बोझ बढ़ सकता है और कंपनी फिर से UL-NBFC के दायरे में आ सकती है। टाटा डिजिटल, जो ई-कॉमर्स, फिनटेक और हेल्थटेक में है, कड़ी प्रतिस्पर्धा और भारी निवेश की मार झेल रहा है। वहीं, एयर इंडिया भी सालों की दिक्कतों के बाद अब टर्नअराउंड (turnaround) के दौर से गुजर रही है, लेकिन यह अभी भी एक महंगा ऑपरेशन है।
एसपी ग्रुप का एग्जिट और वित्तीय दबाव
तीसरी और अहमThe 'SP Group' की हिस्सेदारी का एग्जिट (exit) टाटा संस के सामने स्ट्रक्चरल चुनौतियां और वित्तीय दबाव पैदा कर रहा है। एसपी ग्रुप, स्टर्लिंग इन्वेस्टमेंट कॉर्प (Sterling Investment Corp) और साइरस इन्वेस्टमेंट (Cyrus Investment) के जरिए टाटा संस में 18.37% की बड़ी हिस्सेदारी रखता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मिस्त्री परिवार को अपने खुद के कर्ज और कारोबार को उबारने के लिए इस हिस्सेदारी को बेचना पड़ सकता है। एसपी ग्रुप ने टाटा संस को पब्लिक करने को ही एग्जिट का सबसे अच्छा तरीका बताया है, जो सीधे तौर पर नोएल टाटा की प्राइवेट स्टेटस बनाए रखने की इच्छा के खिलाफ है। यह स्थिति दिखाती है कि कैसे एक बड़े शेयरहोल्डर की वित्तीय जरूरतें बड़ी कॉर्पोरेट बदलावों को मजबूर कर सकती हैं। पब्लिक कंपनियों में माइनॉरिटी स्टेक (minority stake) बेचना आसान होता है, लेकिन टाटा संस की प्राइवेट स्थिति के कारण यह मुश्किल है। साइरस मिस्त्री को टाटा चेयरमैन पद से हटाए जाने के बाद का विवाद भी विश्वास और गवर्नेंस पर असर डालता है। हालांकि, एन. चंद्रशेखरन ने एसपी ग्रुप के चेयरमैन शापूर मिस्त्री (Shapoor Mistry) से बात की है, लेकिन अभी तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है।
जून की बोर्ड मीटिंग में बड़ा फैसला?
जून में होने वाली बोर्ड मीटिंग इस मामले में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। शेयरहोल्डर्स एन. चंद्रशेखरन से एक स्पष्ट रोडमैप (roadmap) की उम्मीद कर रहे हैं। इस रोडमैप में नोएल टाटा की प्राइवेट स्ट्रक्चर को बनाए रखने की प्राथमिकता, कर्ज प्रबंधन, सब्सिडियरीज़ (subsidiaries) के परफॉरमेंस में सुधार और शेयरहोल्डर एग्जिट जैसे मुद्दों के बीच संतुलन साधना होगा। इन सभी सवालों का जवाब ही टाटा संस के भविष्य की दिशा तय करेगा और यह निर्धारित करेगा कि वह पूरे टाटा ग्रुप में ग्रोथ को कैसे आगे बढ़ा पाएगा।