टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने देश की टेक्नोलॉजी स्ट्रैटेजी में बड़े बदलाव का आह्वान किया है। उन्होंने कंपनियों से विदेशी टेक्नोलॉजी अपनाने के बजाय खुद की नई टेक्नोलॉजी बनाने पर जोर देने को कहा है। निवेशकों के लिए, यह पूंजी आवंटन (Capital Allocation) में एक बड़ा बदलाव ला सकता है, क्योंकि बड़े समूह R&D, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी और अपने प्लेटफॉर्म में ज्यादा निवेश कर सकते हैं।
क्या है पूरा मामला?
टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन (N Chandrasekaran) ने हाल ही में एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि भारत का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि हम विदेशी टेक्नोलॉजी को सिर्फ अपनाने के बजाय खुद की नई टेक्नोलॉजी का आविष्कार करें। उनका कहना है कि दशकों से भारत पुरानी टेक्नोलॉजी को अपने हिसाब से ढालने में माहिर रहा है, लेकिन अब समय आ गया है कि हम इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (Intellectual Property) के मालिक बनें, अपनी सप्लाई चेन पर कंट्रोल रखें और इंडस्ट्री के स्टैंडर्ड खुद तय करें। चंद्रशेखरन के मुताबिक, यह तकनीकी महारत देश की सुरक्षा, कूटनीति और व्यापारिक आजादी के लिए बहुत जरूरी है।
निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है?
बड़े भारतीय ग्रुप्स के शेयरधारकों के लिए इस बड़े बदलाव के दूरगामी असर होंगे। सर्विस-बेस्ड या टेक्नोलॉजी को अडॉप्ट करने वाले मॉडल से आगे बढ़कर खुद की टेक्नोलॉजी बनाने की ओर बढ़ने वाली कंपनियों को अपनी बिजनेस स्ट्रैटेजी में बदलाव लाना होगा। ऐसी कंपनियां जो अपने खुद के टेक सॉल्यूशंस या प्लेटफॉर्म विकसित करेंगी, उन्हें रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) पर ज्यादा और लगातार खर्च करना होगा। निवेशक इसे एक ऐसे कदम के रूप में देख सकते हैं जो शॉर्ट-टर्म फाइनेंशियल फायदे के बजाय लॉन्ग-टर्म कॉम्पिटिटिव एडवांटेज (Competitive Advantage) को प्राथमिकता देता है।
इनोवेशन की कीमत
शून्य से इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (Intellectual Property) विकसित करना काफी महंगा सौदा है। मौजूदा सॉफ्टवेयर या प्रोसेस को अपनाने के विपरीत, नई टेक्नोलॉजी बनाने में असफलता का खतरा ज्यादा होता है और पैसा वापस आने में लंबा समय लगता है। ऐसे में, जो कंपनियां 'ओरिजिनेशन' (Origination) की रणनीति अपना रही हैं, उन्हें कैपिटल स्पेंडिंग (Capital Spending) यानी कैपेक्स (Capex) और प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margin) पर दबाव का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, अगर इनोवेशन सफल होता है, तो यह ज्यादा वैल्यू वाले प्रोडक्ट्स और बेहतर प्राइसिंग पावर (Pricing Power) की ओर ले जा सकता है।
टाटा ग्रुप का प्लान
यह 'ओरिजिनेशन' की पुकार टाटा ग्रुप के अंदर चल रही कई पहलों से मेल खाती है। ग्रुप उन महत्वपूर्ण सेक्टर्स में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है जहां टेक्नोलॉजी का मालिकाना हक जरूरी है। उदाहरण के लिए, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स (Tata Electronics) सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में भारी निवेश कर रही है, जो ग्लोबल सप्लाई चेन और डिजिटल सिक्योरिटी के लिए अहम है। इसी तरह, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन लैब्स में अपने निवेश को बढ़ा रही है। ये पहलें बताती हैं कि ग्रुप अपनी प्रमुख कंपनियों को वैल्यू चेन में ऊपर ले जाने की तैयारी कर रहा है, ताकि वे सर्विस प्रोवाइडर से आगे बढ़कर कुछ खास डोमेन में टेक्नोलॉजी के मालिक बन सकें।
जोखिमों का प्रबंधन
हाई-एंड टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट की ओर किसी भी ट्रांजीशन (Transition) में कई तरह के एग्जीक्यूशन रिस्क (Execution Risks) जुड़े होते हैं। हर R&D प्रयास सफल नहीं होता, और कुछ प्रोजेक्ट्स में लागत बढ़ सकती है या देरी हो सकती है। इसके अलावा, ग्लोबल टेक्नोलॉजी मार्केट बेहद कॉम्पिटिटिव (Competitive) है। नई टेक्नोलॉजीज को मौजूदा रेवेन्यू स्ट्रीम्स (Revenue Streams) को बाधित किए बिना इंटीग्रेट (Integrate) करने की चुनौती भी है। निवेशकों को इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि प्रोप्राइटरी टेक (Proprietary Tech) की ओर बढ़ने के लिए अलग तरह के टैलेंट पूल (Talent Pool) और मैनेजमेंट स्ट्रक्चर (Management Structure) की जरूरत पड़ सकती है, जिससे ऑपरेशनल कॉम्प्लेक्सिटी (Operational Complexity) बढ़ सकती है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
आने वाली तिमाहियों में कंपनी की फाइलों में इन स्ट्रैटेजिक शिफ्ट्स (Strategic Shifts) का असर देखना निवेशकों के लिए अहम होगा। मुख्य रूप से R&D पर खर्च का प्रतिशत, फाइल किए गए पेटेंट्स (Patents) की संख्या और नई टेक-फोक्स्ड प्रोजेक्ट्स के लिए कैपिटल स्पेंडिंग (Capital Spending) पर अपडेट्स पर नजर रखनी चाहिए। मैनेजमेंट की कमेंट्री (Commentary) यह समझने में भी महत्वपूर्ण होगी कि नए इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (Intellectual Property) से भविष्य में कितनी कमाई की उम्मीद है। यह देखना भी एक अहम परीक्षा होगी कि क्या कंपनियां इन ग्रोथ-ओरिएंटेड (Growth-Oriented) निवेशों को बनाए रखते हुए स्टेबल प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margin) बनाए रख सकती हैं।
