तमिलनाडु की अर्थव्यवस्था का नया कीर्तिमान!
साल 2024-25 तमिलनाडु के लिए आर्थिक मोर्चे पर एक बेहतरीन साल साबित हुआ है। राज्य की इकोनॉमी ने 11.2% की रियल ग्रोथ हासिल की है, जो पिछले 14 सालों में सबसे बड़ी डबल-डिजिट ग्रोथ है। इसने तमिलनाडु को भारत के दूसरे सबसे बड़े राज्य की अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद की है। राज्य का नॉमिनल जी.एस.डी.पी. (Nominal GSDP) 16% बढ़कर ₹31.19 लाख करोड़ तक पहुंच गया है, जो महाराष्ट्र के बाद दूसरे स्थान पर है। यह लगातार 2021-22 से 8% या उससे अधिक की रियल ग्रोथ बनाए हुए है, जो राज्य की आर्थिक मजबूती को दर्शाता है।
ग्रोथ के मुख्य इंजन: मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट
इस प्रभावशाली ग्रोथ में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का योगदान सबसे अहम रहा है। इस सेक्टर ने 14.7% की ज़बरदस्त रियल ग्रोथ दर्ज की, जो कि पूरे भारत के औसत 4.5% की ग्रोथ से तीन गुना से भी ज़्यादा है। तमिलनाडु देश में मैन्युफैक्चरिंग एम्प्लॉयमेंट में अव्वल है और भारत के मैन्युफैक्चरिंग जीडीपी (GDP) में 12.7% का योगदान देता है। राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट में देश में पहले नंबर पर है, जो कुल राष्ट्रीय एक्सपोर्ट का 41% है, खासकर स्मार्टफोन एक्सपोर्ट में इसका बड़ा योगदान है। ऑटो कंपोनेंट्स, फुटवियर और अपैरल जैसे सेक्टर्स के एक्सपोर्ट में भी तमिलनाडु आगे है।
सर्विसेज सेक्टर और एफ.डी.आई. (FDI) में भी उछाल
सर्विसेज सेक्टर, जो राज्य की ग्रॉस स्टेट वैल्यू एडेड (Gross State Value Added) में 53.6% का योगदान देता है, उसने भी 11.3% की दमदार रियल ग्रोथ दिखाई है। इसमें आईटी (IT) और आईटी-एनेबल्ड सर्विसेज, फाइनेंस, हेल्थकेयर और टूरिज्म जैसे सेक्टर शामिल हैं। चेन्नई एक प्रमुख आईटी और फिनटेक हब बना हुआ है। खास बात यह है कि तमिलनाडु में फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) पिछले साल के US$2.44 बिलियन से बढ़कर US$3.68 बिलियन हो गया है, जबकि देश में एफ.डी.आई. (FDI) में नरमी देखी गई।
सेक्टरल प्रदर्शन और कृषि की चुनौतियाँ
सेकेंडरी सेक्टर, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन शामिल हैं, ने 13.4% की ग्रोथ दर्ज की। वहीं, कंस्ट्रक्शन सेक्टर 11.6% की ग्रोथ के साथ राष्ट्रीय औसत से आगे रहा। हालांकि, प्राइमरी सेक्टर यानी कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों का योगदान 13.4% रहा और इसकी ग्रोथ सिर्फ 3.2% रही। लगातार दूसरे साल मानसून पर निर्भरता और जलवायु परिवर्तन के कारण कृषि सेक्टर को चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।
बढ़ी हुई प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income)
तमिलनाडु की प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) 2024-25 में बढ़कर ₹3.62 लाख हो गई है, जो राष्ट्रीय औसत ₹2.05 लाख का 1.77 गुना है। यह राज्य को देश के सबसे अमीर राज्यों में से एक बनाता है।
आर्थिक चुनौतियाँ और आगे की राह
इतनी शानदार ग्रोथ के बावजूद, कुछ चुनौतियाँ भी हैं। देश के सिर्फ पांच राज्यों (तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश) पर एक्सपोर्ट ग्रोथ का भारी बोझ है, जो विकास में असंतुलन पैदा कर सकता है। तमिलनाडु के टेक्सटाइल एक्सपोर्ट का लगभग 30% हिस्सा अमेरिका को जाता है, जहां हाल ही में 50% टैरिफ (tariff) बढ़ाया गया है, जिससे यह सेक्टर प्रभावित हो सकता है। कृषि सेक्टर में लगातार नकारात्मक ग्रोथ ग्रामीण आजीविका के लिए एक बड़ी चिंता बनी हुई है। साथ ही, राज्य में जमा हुई बैंकों की जमा राशि का एक बड़ा हिस्सा स्थानीय उद्योगों में री-इन्वेस्ट नहीं हो रहा है, जिससे क्रेडिट उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
भविष्य की उम्मीदें
तमिलनाडु का लक्ष्य 2030 तक $1 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनना है। अगर ग्रोथ की यही रफ़्तार बनी रही, तो यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। जानकारों का मानना है कि मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट में लगातार मजबूती से अगले साल ग्रोथ 12% से भी ऊपर जा सकती है। बाहरी चुनौतियों के बावजूद, राज्य इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और पॉलिसी पर ध्यान केंद्रित करके भारत के लिए एक प्रमुख आर्थिक इंजन बने रहने की राह पर है।