Tamil Nadu Govt Alleges Union Policies Caused ₹40,000 Cr Fiscal Hit

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Tamil Nadu Govt Alleges Union Policies Caused ₹40,000 Cr Fiscal Hit
Overview

Tamil Nadu सरकार इस वक्त भारी आर्थिक दबाव झेल रही है। राज्य के वित्त मंत्री का आरोप है कि केंद्र सरकार की नीतियों ने सीधे तौर पर **₹40,000 करोड़** से ज़्यादा का वित्तीय झटका दिया है।

केंद्र की नीतियों से तमिलनाडु पर ₹40,000 करोड़ का भारी दबाव!

Tamil Nadu के वित्त मंत्री Thangam Thenarasu ने 2026-27 के लिए अंतरिम बजट पेश करते हुए कहा है कि केंद्र सरकार के कई फैसलों ने राज्य पर "गंभीर वित्तीय दबाव" डाला है। यह दबाव इस फाइनेंशियल ईयर में ₹40,000 करोड़ से ज़्यादा के राजस्व घाटे और थोपे गए खर्चों के रूप में सामने आया है। यह तब हो रहा है जब राज्य पहले से ही गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) के मुआवज़े की अवधि खत्म होने के बाद से जूझ रहे हैं। इसके अलावा, चेन्नई मेट्रो रेल फेज-II प्रोजेक्ट की फंडिंग ने भी राज्य के कर्ज में करीब ₹9,500 करोड़ जोड़ दिए हैं।

वित्तीय दबाव के मुख्य बिंदु

इस वित्तीय दबाव के कई पहलू हैं। राज्य को इस फाइनेंशियल ईयर में ₹9,600 करोड़ के राजस्व घाटे का अनुमान है, जिसका एक कारण GST की दरों में हुए बदलाव को बताया जा रहा है। इतना ही नहीं, Tamil Nadu को RBI खाते से ₹1,709 करोड़ की IGST सेटलमेंट राशि बिना किसी पूर्व सूचना के काट ली गई। केंद्रीय बजट 2025-26 के संशोधित अनुमानों ने राज्य के हिस्से के केंद्रीय करों में ₹1,202 करोड़ की कटौती कर दी।

थोपे गए खर्च और प्रोजेक्ट का कर्ज

वहीं, खर्चों का बोझ भी बढ़ा है। एक नियम के तहत 5% गारंटी रिडेम्पशन फंड बनाए रखने की अनिवार्यता के चलते राज्य पर ₹3,087 करोड़ का अनियोजित खर्च आ गया है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि Tamil Nadu को पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (TNPDCL) के लिए ₹16,290 करोड़ के लॉस फंडिंग की व्यवस्था करनी होगी, जो कि कंपनी के वास्तविक नुकसान से काफी ज़्यादा है। इससे राज्य पर ₹15,877 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ा है।

जारी न किए गए फंड और प्रोजेक्ट का भार

इसके अलावा, केंद्र सरकार की कई स्कीमों के तहत मिलने वाले फंड में भी देरी हो रही है। समग्रा शिक्षा स्कीम के तहत ₹3,548 करोड़, जल जीवन मिशन के तहत ₹3,112 करोड़ और फाइनेंस कमीशन ग्रांट्स के तौर पर ₹2,246 करोड़ अभी तक जारी नहीं हुए हैं। इससे राज्य के कैश फ्लो पर दबाव है और योजनाओं के इम्प्लीमेंटेशन में बाधा आ रही है। चेन्नई मेट्रो रेल फेज-II प्रोजेक्ट की फंडिंग में भी, सरकार को केंद्र सरकार के हिस्से का लगभग ₹9,500 करोड़ वहन करना पड़ रहा है, जो राज्य के कर्ज और उधार लेने की क्षमता को प्रभावित कर रहा है।

वित्तीय संघवाद पर तनाव

Tamil Nadu सरकार का यह आरोप भारत की वित्तीय संघवाद (Fiscal Federalism) की व्यवस्था में चल रहे तनावों को दर्शाता है। कई राज्य राष्ट्रीय नीतियों को अपनी क्षेत्रीय वित्तीय वास्तविकताओं के अनुरूप ढालने में चुनौतियां बताते हैं। हालांकि, Tamil Nadu ने ऐतिहासिक रूप से अपने वित्त को अच्छी तरह से संभाला है, लेकिन इन बाहरी दबावों से उसकी वित्तीय स्थिरता खतरे में पड़ सकती है। GST मुआवज़े की अवधि का खत्म होना कई राज्यों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय रहा है, जिससे उन्हें नए राजस्व स्रोतों की तलाश करनी पड़ रही है या उधार पर अधिक निर्भर रहना पड़ रहा है।

भविष्य की चुनौतियाँ और बाज़ार का नज़रिया

इन सभी वित्तीय दबावों का मिलाजुला असर Tamil Nadu के लिए एक बड़ा जोखिम पैदा करता है। राज्य के लिक्विडिटी (तरलता) पर तत्काल चिंताएं हैं, जिससे ज़रूरी सेवाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के भुगतान में देरी हो सकती है। बढ़ा हुआ कर्ज और घटते राजस्व के चलते राज्य को अपने वित्तीय घाटे के लक्ष्य को पूरा करने में मुश्किल आ सकती है। क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां, जो आमतौर पर Tamil Nadu की मजबूत आर्थिक बुनियाद के कारण सकारात्मक रुख रखती हैं, इन घटनाओं पर बारीकी से नज़र रखेंगी। यदि वित्तीय स्थिति में लगातार गिरावट आती है, तो रेटिंग में बदलाव हो सकता है, जिससे राज्य के लिए उधार लेने की लागत बढ़ सकती है। इसके अलावा, ऐसे सरकारी विवादों से निवेशकों का भरोसा भी डगमगा सकता है, क्योंकि यह नीतिगत अनिश्चितता का संकेत देते हैं।

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