KSRTC पर SC का बड़ा फैसला: कर्मचारियों-पेंशनर्स को मिलेगा बराबर हक, घाटे वाली कंपनी पर बढ़ेगा बोझ

ECONOMY
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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
KSRTC पर SC का बड़ा फैसला: कर्मचारियों-पेंशनर्स को मिलेगा बराबर हक, घाटे वाली कंपनी पर बढ़ेगा बोझ
Overview

केरल स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (KSRTC) के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है, जिसके तहत कंपनी को अपने कर्मचारियों और पेंशनर्स दोनों को समान कॉस्ट-ऑफ-लिविंग (Cost-of-Living) का लाभ देना होगा। इस फैसले से पहले से ही भारी घाटे से जूझ रही KSRTC पर और अधिक खर्च का बोझ पड़ेगा।

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सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने केरल सरकार के उस आदेश को पलट दिया, जिसमें KSRTC के कर्मचारियों को डियरनेस अलाउंस (DA) में 14% का इजाफा और पेंशनर्स को डियरनेस रिलीफ (DR) में सिर्फ 11% का इजाफा दिया गया था। कोर्ट ने साफ कहा कि महंगाई सभी पर बराबर असर डालती है, ऐसे में कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच DA और DR के भुगतान में अंतर करना संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन है। इस फैसले के बाद KSRTC को पेंशनर्स के DR को भी बढ़ाकर कर्मचारियों के DA के बराबर करना होगा, जिससे कंपनी के खर्चों में तत्काल और भारी बढ़ोतरी होगी।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब KSRTC पहले से ही भारी आर्थिक तंगी से गुजर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी पिछले कई सालों से लगातार घाटे में चल रही है। साल 2023-24 के फाइनेंशियल ईयर में ही KSRTC को ₹1,314.04 करोड़ का भारी शुद्ध नुकसान (Net Loss) हुआ है। कंपनी पर कुल कर्ज का बोझ ₹17,000 करोड़ से भी ज्यादा हो चुका है। कंपनी के कुल रेवेन्यू का 60% से अधिक हिस्सा सिर्फ कर्मचारियों के वेतन और भत्तों पर खर्च हो जाता है। ईंधन की बढ़ती कीमतें भी एक बड़ी समस्या हैं। KSRTC पूरी तरह से राज्य सरकार की वित्तीय मदद पर निर्भर है, जिसे हर महीने करीब ₹120 करोड़ सिर्फ सैलरी और पेंशन देने के लिए मिलते हैं। पिछले नौ सालों में राज्य सरकार ₹13,000 करोड़ से अधिक की मदद दे चुकी है। कंपनी की इस हालत के पीछे ऑपरेशनल इनएफिशिएंसी (Operational Inefficiency), बस बेड़े का खराब इस्तेमाल और खराब मैनेजमेंट को जिम्मेदार ठहराया जाता रहा है।

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला न केवल KSRTC के लिए, बल्कि देश भर की अन्य सरकारी कंपनियों के लिए भी एक मिसाल कायम करता है। यह दर्शाता है कि वित्तीय कठिनाइयों का हवाला देकर कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलने वाले महंगाई-आधारित लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता। वहीं, खुद वित्तीय दबाव झेल रहे केरल राज्य के लिए भी यह एक अतिरिक्त चिंता का सबब है, क्योंकि KSRTC को दी जाने वाली सरकारी सहायता पर और अधिक बोझ पड़ेगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.