कोर्ट ने NHAI की ₹29,000 करोड़ की याचिका ठुकराई
सुप्रीम कोर्ट ने NHAI की उस दलील को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें कंपनी करीब ₹29,000 करोड़ के संभावित वित्तीय बोझ का हवाला देते हुए 2019 के एक फैसले को सिर्फ भविष्य में होने वाले जमीन अधिग्रहणों पर लागू करवाना चाहती थी। 2019 के उस फैसले ने हाईवे के लिए जमीन अधिग्रहण में solatium और interest से जमीन मालिकों को बाहर रखना असंवैधानिक करार दिया था।
जमीन मालिकों के हक़ में कोर्ट का फैसला
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्य कांत और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने NHAI की दलीलों को नहीं माना। कोर्ट का मानना है कि संवैधानिक तौर पर मिलने वाले 'जस्ट कॉम्पन्सेशन' (न्यायसंगत मुआवज़े) के अधिकार को केवल वित्तीय चिंताओं के चलते कमजोर नहीं किया जा सकता।
किसे मिलेगा मुआवज़े का लाभ?
कोर्ट ने साफ किया है कि जिन जमीन मालिकों के मामले 28 मार्च, 2015 (2013 के भू-अधिग्रहण कानून की प्रभावी तारीख) तक लंबित थे, उन्हें 2019 के फैसले के आधार पर solatium और interest का लाभ मिलेगा। जिन लोगों को पहले ही बढ़ी हुई मुआवज़ा राशि मिल चुकी थी, लेकिन solatium और interest का भुगतान बाकी था, वे भी इन लाभों के लिए दावा कर सकते हैं।
बंद हो चुके मामलों पर कोई असर नहीं
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन मामलों में मुआवज़े की राशि पहले ही तय हो चुकी है और जिनमें कोई भी कानूनी कार्यवाही लंबित नहीं है, उन पर इस फैसले का कोई असर नहीं होगा। यानी, वे पुराने मामले दोबारा नहीं खोले जाएंगे।