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US Stocks: ईरान में शांति की उम्मीद, मज़बूत डेटा से बाज़ार में आई तेज़ी, पर महंगाई का डर!

ECONOMY
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AuthorMehul Desai|Published at:
US Stocks: ईरान में शांति की उम्मीद, मज़बूत डेटा से बाज़ार में आई तेज़ी, पर महंगाई का डर!
Overview

ईरान के साथ तनाव कम होने और मज़बूत आर्थिक आंकड़ों से मिली राहत के बीच अमेरिकी शेयर बाज़ारों में लगातार दूसरे दिन तेज़ी देखने को मिली। हालाँकि, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह तेज़ी ज़्यादा समय तक नहीं टिकेगी, क्योंकि महंगाई और फेडरल रिज़र्व की ब्याज दर नीति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

युद्ध की उम्मीदों और डेटा ने दिलाई बाज़ार को राहत

बुधवार, 1 अप्रैल 2026 को वॉल स्ट्रीट के मुख्य सूचकांकों (Indices) में दो दिन से चली आ रही रिकवरी जारी रही। Dow Jones Industrial Average 224.23 अंक चढ़कर 46,565.74 पर बंद हुआ, जो 0.48% की बढ़त थी। S&P 500 भी 46.80 अंक चढ़कर 6,575.32 पर पहुंचा, यानी 0.72% की तेज़ी। वहीं, Nasdaq Composite ने 250.32 अंक की बढ़त के साथ 1.16% का शानदार उछाल दर्ज किया और 21,840.95 पर बंद हुआ।

इस तेज़ी की मुख्य वजह ईरान संघर्ष के जल्द समाधान की उम्मीदें थीं, जिसने कच्चे तेल की कीमतों को भी नीचे लाने में मदद की। Brent क्रूड फ्यूचर्स लगभग $101 प्रति बैरल पर थे, जबकि West Texas Intermediate (WTI) क्रूड $99 के करीब ट्रेड कर रहा था।

इसके अलावा, मज़बूत आर्थिक आंकड़ों ने भी इस सकारात्मक माहौल को और हवा दी। ADP के आंकड़ों के अनुसार, मार्च में निजी पेरोल (private payrolls) 40,000 के अनुमान से ज़्यादा, यानी 62,000 बढ़ गए। फरवरी के रिटेल सेल्स (retail sales) के आंकड़े भी उम्मीद से बेहतर रहे, और मार्च में मैन्युफैक्चरिंग एक्टिविटी (manufacturing activity) 2022 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई। यूरोपीय बाज़ार भी इसी ट्रेंड पर चलते दिखे, जहां Stoxx Europe 600 इंडेक्स 2.5% चढ़ा।

विश्लेषकों की शंकाएं और आर्थिक चुनौतियाँ

बाज़ार में व्यापक उछाल के बावजूद, कई विश्लेषक इस तेज़ी को लेकर सतर्क हैं। JPMorgan और Goldman Sachs का मानना है कि हालिया बढ़त तकनीकी (technical) शॉर्ट-कवरिंग के कारण है, न कि भू-राजनीतिक (geopolitical) तनावों को लेकर वैश्विक सोच में आए किसी बड़े बदलाव का नतीजा।

इस स्थिति को एक मिश्रित आर्थिक तस्वीर और जटिल बना रही है: इनपुट कीमतों (input prices) में चार साल की सबसे बड़ी बढ़ोतरी देखी गई है, जो विकास के आंकड़ों के बावजूद संभावित महंगाई का संकेत दे रही है। US Dollar Index, जिसे सुरक्षित निवेश (safe-haven) माना जाता है, लगभग 99.5 के स्तर पर आ गया, जिससे डॉलर की मज़बूती को लेकर तत्काल डर कम होता दिख रहा है। सोना भी थोड़ा रिकवर हुआ है, आंशिक रूप से फेडरल रिज़र्व (Federal Reserve) द्वारा ब्याज दरें घटाए जाने की अटकलों के कारण, हालांकि दिसंबर तक दर कटौती की संभावना अब 35% के आसपास बताई जा रही है।

भू-राजनीतिक नज़र और फेड की नीति

ट्रेडर्स (traders) राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के संबोधन का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं, जिसमें ईरान युद्ध पर अपडेट मिलने की उम्मीद है। डी-एस्केलेशन (de-escalation) के संकेत तो दिख रहे हैं, लेकिन मलक्का जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे प्रमुख ऊर्जा मार्गों पर इसके रणनीतिक प्रभाव कमोडिटी बाज़ारों और निवेशक सेंटिमेंट को प्रभावित कर रहे हैं। US Dollar Index में अस्थिरता देखी गई है, जोखिम लेने की क्षमता (risk appetite) बढ़ने से यह 100.00 के निशान से नीचे गिर गया, हालांकि मार्च में युद्ध की आशंकाओं के बीच इसने 2.3% की बढ़त दर्ज की थी।

दूसरी ओर, फेडरल रिज़र्व की मॉनेटरी पॉलिसी (monetary policy) का दृष्टिकोण भी एक बड़ा फोकस है। ऊर्जा कीमतों में झटकों के कारण महंगाई के आंकड़े बढ़ सकते हैं, ऐसे में इस साल दरें घटाए जाने की संभावनाएं कम होती दिख रही हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि दरें बढ़ाए जाने की संभावना भी है, हालांकि यह कम ही मानी जा रही है। Goldman Sachs ने 2026 के लिए 2-2.5% जीडीपी ग्रोथ (GDP growth) का अनुमान लगाया है और मार्च व जून में फेड दर कटौती की उम्मीद की थी, लेकिन हालिया आंकड़े देरी की ओर इशारा कर रहे हैं।

संरचनात्मक कमजोरियां और मंदी के संकेत

इस तेज़ी में कई संरचनात्मक कमजोरियां नज़र आ रही हैं। यह बढ़त मुख्य रूप से तकनीकी कारणों और शॉर्ट पोजीशन की क्लोजिंग (unwinding of short positions) से प्रेरित लग रही है, जिसमें फंडामेंटल (fundamental) स्तर पर मज़बूत भरोसा कम है। इनपुट कीमतों में चार साल की रिकॉर्ड बढ़ोतरी संभावित स्टैगफ्लेशन (stagflation) का संकेत दे रही है, जो रेवेन्यू ग्रोथ के बावजूद कॉर्पोरेट मार्जिन (corporate margins) को नुकसान पहुंचा सकती है।

भू-राजनीतिक जोखिम, भले ही कम होते दिख रहे हों, फिर भी बने हुए हैं। ईरान का मलक्का जलडमरूमध्य पर नियंत्रण, जो एक प्रमुख ऊर्जा मार्ग है, लगातार सप्लाई जोखिम (supply risk) पैदा करता है। जबकि बाज़ार ऐतिहासिक रूप से संघर्षों के प्रति लचीला रहा है और अक्सर कुछ महीनों में रिकवर हो जाता है, वर्तमान परिदृश्य अलग है, जहां पहले से ही एक एनर्जी शॉक (energy shock) चल रहा है और फेड की नीतिगत उम्मीदें कटौती से होल्ड या बढ़ोत्तरी की ओर खिसक रही हैं, वह भी लगातार महंगाई के चलते।

मज़बूत आर्थिक आधार वाले समयों के विपरीत, यह तेज़ी अनिश्चित महंगाई आउटलुक और AI-संचालित बाज़ार बदलावों पर बनी है। US क्रूड इन्वेंट्री (US crude inventories) में भारी बढ़ोतरी, जो लगातार छठीं बार बढ़ी है, भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद ऊर्जा कीमतों पर दबाव डाल रही है।

आगे क्या? मुख्य रिपोर्टें और आउटलुक

बाज़ार ईरान संघर्ष के समाधान पर सुराग के लिए राष्ट्रपति ट्रम्प के संबोधन पर बारीकी से नज़र रखेगा। कल शाम को आने वाली मार्च की महत्वपूर्ण नौकरियों की रिपोर्ट (jobs report) आर्थिक गति (economic momentum) पर और अधिक स्पष्टता प्रदान करेगी और संभवतः फेड की नीतिगत राह का मार्गदर्शन करेगी। गुड फ्राइडे (Good Friday) की छुट्टी के बावजूद, यह रिपोर्ट नज़दीकी अवधि में बाज़ार की दिशा को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करेगी।

UBS का मानना है कि यदि युद्ध समाप्त हो जाता है, तो बाज़ार साल के अंत तक ज़्यादातर ऊपर ही रहेगा।

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