कच्चे तेल में लगातार आग
जहां एक तरफ शेयर बाजारों में राहत की खबर है, वहीं कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड तेजी की ओर बढ़ रही हैं। मार्च में Brent क्रूड फ्यूचर्स अपने इतिहास की सबसे बड़ी मंथली गेन की ओर अग्रसर है, जिसमें 55% से 59% तक की बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। 31 मार्च 2026 को Brent क्रूड $112-$115 प्रति बैरल और West Texas Intermediate (WTI) $100-$105 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। अगर सप्लाई की समस्या बनी रही तो कीमतें $150 या उससे भी ऊपर जा सकती हैं। इसकी मुख्य वजह सप्लाई रूट में आई बड़ी बाधाएं हैं, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का बंद होना, जो दुनिया भर के तेल और LNG का लगभग 20% हिस्सा संभालता है। यह आधुनिक इतिहास की सबसे बड़ी सप्लाई बाधाओं में से एक है।
सावधानी की जरूरत, इन्फ्लेशन का खतरा
बाजार में आई इस तेजी को लेकर एक्सपर्ट्स सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि यह रैली सिर्फ भू-राजनीतिक जोखिमों के कम होने का असर है, लेकिन एनर्जी मार्केट में सप्लाई की समस्या का असर अभी भी बरकरार है। स्थिति अभी भी नाजुक है और तनाव दोबारा बढ़ने या सप्लाई में लंबे समय तक बाधा रहने का काफी जोखिम है। इतिहास गवाह है कि लगातार ऊंची तेल कीमतें इकोनॉमिक ग्रोथ के लिए एक बड़े झटके की तरह काम करती हैं, ठीक वैसे ही जैसे कंज्यूमर पर टैक्स का बोझ। यह सीधे तौर पर मंदी की संभावना को बढ़ाती है। ऐसे में, ऊंची एनर्जी कॉस्ट और इन्फ्लेशन के बीच इकोनॉमी के धीमे पड़ने (Stagflation) का खतरा बढ़ गया है।
आगे क्या?
ग्लोबल मार्केट की दिशा अगले कुछ दिनों में मध्य-पूर्व के संकट की अवधि और गंभीरता पर निर्भर करेगी। भले ही तनाव कम होने की खबरों से शेयर बाजार को थोड़ी राहत मिली हो, लेकिन एनर्जी सप्लाई की समस्या और इसके कारण होने वाली महंगाई एक लंबी अवधि की चुनौती पेश करती है। जानकारों का मानना है कि अगर यह संकट लंबा चला तो आर्थिक असर और गहराएगा। स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) से तेल की निकासी और दूसरे देशों की उत्पादन बढ़ाने की क्षमता कीमतों को स्थिर रखने में अहम भूमिका निभाएगी।