FY27 तक राज्यों का खर्च केंद्र से ज़्यादा, ₹64 लाख करोड़ पार!

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorMehul Desai|Published at:
FY27 तक राज्यों का खर्च केंद्र से ज़्यादा, ₹64 लाख करोड़ पार!

भारत में पब्लिक फाइनेंस का परिदृश्य बदल रहा है! अनुमान है कि FY27 तक 23 राज्यों का कुल खर्च केंद्र सरकार के अनुमानित खर्च से ज़्यादा हो जाएगा। राज्यों का संयुक्त खर्च करीब **₹64 लाख करोड़** तक पहुँच सकता है, जबकि केंद्र का अनुमान **₹53.5 लाख करोड़** है। यह दिखाता है कि इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास कार्यों में राज्यों की भूमिका बढ़ रही है।

Detailed Coverage

राज्यों का बढ़ता दबदबा

यह बदलाव इस बात का संकेत है कि देश के विकास की बागडोर धीरे-धीरे राज्यों के हाथों में आ रही है। पहले जहां केंद्र सरकार बड़े इंफ्रा प्रोजेक्ट्स का नेतृत्व करती थी, वहीं अब राज्य सरकारें खुद आगे बढ़कर निवेश कर रही हैं।

किन राज्यों में दिखेगा सबसे ज़्यादा खर्च?

इस बड़ी रकम का एक बड़ा हिस्सा कुछ खास राज्यों में ही खर्च होगा। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक और राजस्थान जैसे राज्य मिलकर कुल अनुमानित खर्च का लगभग 45% उठाएंगे। निवेशकों के लिए ये राज्य आने वाले समय में आर्थिक सेहत और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के संकेतक साबित हो सकते हैं। इन राज्यों में बढ़ती गतिविधियां सीधे तौर पर कंस्ट्रक्शन, सीमेंट और लोकल मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर्स को फायदा पहुंचा सकती हैं।

फिस्कल हेल्थ और घाटे का मैनेजमेंट

खर्च बढ़ने के बावजूद, वित्तीय अनुशासन पर भी नज़र रखी जा रही है। FY27 तक केंद्र और राज्यों की कुल देनदारी ₹29.18 लाख करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है। उधार लेने के प्रोग्राम फिस्कल रिस्पॉन्सिबिलिटी एंड बजट मैनेजमेंट (FRBM) एक्ट के तहत तय गाइडलाइन्स के अनुसार ही रहेंगे।

22 राज्यों का कुल फिस्कल डेफिसिट (राजकोषीय घाटा) अभी ग्रॉस स्टेट डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GSDP) का 3.1% अनुमानित है, जो केंद्र के अनुमानित 4.3% GDP से कम है। हालांकि, अलग-अलग राज्यों की स्थिति भिन्न है। कुछ राज्य 2% जैसे कम घाटे पर चल रहे हैं, तो वहीं जम्मू और कश्मीर जैसे कुछ राज्यों का घाटा 4.6% तक है। इन लक्ष्यों पर लगातार अमल करना राज्य-जारी बॉन्ड्स (State-issued bonds) में निवेशकों का भरोसा बनाए रखने के लिए बहुत ज़रूरी है।

रेवेन्यू के स्रोत और खर्च की प्राथमिकताएं

राज्यों का रेवेन्यू अभी भी गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST), पेट्रोलियम VAT और शराब व तंबाकू जैसे उत्पादों पर एक्साइज ड्यूटी जैसे स्रोतों पर निर्भर है। GST फिलहाल राज्य के टैक्स रेवेन्यू का करीब 32.1% है, हालांकि यह अलग-अलग राज्यों में काफी भिन्न है। उदाहरण के लिए, जम्मू और कश्मीर में यह टैक्स रेवेन्यू का 63% तक है। वहीं, हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन कलेक्शन प्रॉपर्टी मार्केट की सेहत का अंदाज़ा देते हैं।

यह समझना भी ज़रूरी है कि खर्च की कुल राशि के साथ-साथ उसका बंटवारा भी अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। इंफ्रास्ट्रक्चर पर किया गया कैपिटल स्पेंडिंग सीधे तौर पर प्राइवेट इंडस्ट्री को फायदा पहुंचाता है, जबकि कमिटेड स्पेंडिंग (वेतन, पेंशन और ब्याज) यह तय करती है कि राज्य के पास नए विकास कार्यों के लिए कितनी फ्लेक्सिबिलिटी बची है। राज्य के बजट में कैपिटल और कमिटेड एक्सपेंडिचर के अनुपात पर नज़र रखना यह जानने के लिए महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह खर्च ट्रेंड लंबे समय तक आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा या सिर्फ मौजूदा खर्चों को पूरा करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.