Standard Chartered का बड़ा ऐलान: भारत के ग्रीन मिशन को देगा $300 अरब का सहारा!

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Standard Chartered का बड़ा ऐलान: भारत के ग्रीन मिशन को देगा $300 अरब का सहारा!
Overview

Standard Chartered बैंक भारत के महत्वाकांक्षी नेट-जीरो लक्ष्यों को पूरा करने में मदद के लिए एक बड़ा कदम उठा रहा है। बैंक ने 2030 तक **$300 बिलियन** जुटाने का वादा किया है, ताकि देश के एनर्जी ट्रांजिशन (Energy Transition) को बढ़ावा मिल सके। यह कदम ऐसे समय में आया है जब भारतीय कंपनियों में सस्टेनेबल फाइनेंस टूल्स (Sustainable Finance Tools) अपनाने में एक बड़ी खाई देखी जा रही है।

Standard Chartered भारत के एनर्जी ट्रांजिशन (Energy Transition) को गति देने के लिए कमर कस चुका है। बैंक ने 2030 तक $300 बिलियन जुटाने का बड़ा लक्ष्य रखा है, जिसमें से एक अहम हिस्सा भारत जैसे बाजारों के लिए होगा।

हालिया रिपोर्ट के अनुसार, जहां 83% भारतीय कॉर्पोरेट्स (Corporates) के पास नेट-जीरो (Net-Zero) की स्ट्रैटेजी है और 93% उत्सर्जन कम करने में निवेश कर रहे हैं, वहीं सस्टेनेबल फाइनेंस टूल्स (Sustainable Finance Tools) जैसे ग्रीन लोन (Green Loans) या सस्टेनेबिलिटी-लिंक्ड फाइनेंस (Sustainability-Linked Financing) को अपनाने वाले 40% से भी कम हैं। Standard Chartered इस गैप को पाटने की कोशिश कर रहा है।

बैंक अपने इस लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है। 2024 के अंत तक, Standard Chartered $121 बिलियन जुटा चुका था। सस्टेनेबल फाइनेंस से बैंक ने 2024 में $982 मिलियन का इनकम (Income) जेनरेट किया है और 2025 तक $1 बिलियन के सालाना इनकम टारगेट को पार करने की राह पर है। यह कदम भारत के तेजी से बढ़ते ग्रीन फाइनेंस मार्केट (Green Finance Market) के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। भारत में क्लीन एनर्जी सब्सिडिज (Clean Energy Subsidies) के कारण 2014 से रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy) क्षमता में पांच गुना वृद्धि हुई है, और 2025 तक गैर-जीवाश्म ईंधन (Non-fossil Fuel) से बिजली उत्पादन क्षमता 50% से अधिक हो गई है। Standard Chartered ने ग्रीन बिल्डिंग्स (Green Buildings) के लिए फाइनेंसिंग को बढ़ावा देने के लिए Confederation of Indian Industries - Indian Green Building Council (CII IGBC) के साथ पार्टनरशिप (Partnership) भी की है।

हालांकि, Standard Chartered के इस बड़े कदम के बावजूद, भारत के एनर्जी ट्रांजिशन में कैपिटल एक्सेस (Capital Access) और पॉलिसी प्रेडिक्टिबिलिटी (Policy Predictability) जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। यह दिखाता है कि मार्केट अभी भी शुरुआती दौर में है। वहीं, कॉम्पिटिटर (Competitors) जैसे HSBC ने अपने 2030 के टारगेट को 2050 तक बढ़ा दिया है, जो इस सेक्टर की जटिलताओं को दर्शाता है। Standard Chartered, जिसका मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalization) लगभग $40 बिलियन और पी/ई रेश्यो (P/E Ratio) करीब 13 है, इस बदलते परिदृश्य में एक अहम भूमिका निभा रहा है। बैंक तेल और गैस जैसे हाई-एमिटिंग सेक्टर्स (High-emitting sectors) के लिए भी सस्टेनेबल फाइनेंस सॉल्यूशंस (Sustainable Finance Solutions) प्रदान कर रहा है, साथ ही 2030 तक 29% एब्सोल्यूट एमिशन रिडक्शन (Absolute Emission Reduction) का लक्ष्य भी रखा है।

आने वाले साल यह तय करेंगे कि Standard Chartered की यह बड़ी वित्तीय पहल भारत की ग्रीन महत्वाकांक्षाओं को साकार करने में कितनी सफल होती है।

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