पॉलिसी में बड़ा बदलाव
सेंट्रल बैंक का यह बड़ा कदम, जिसमें 100 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की गई है, पहले के छोटे-छोटे कदमों से बिल्कुल अलग है। ओवरनाइट पॉलिसी रेट को 8.75% तक ले जाने का मतलब है कि अब वहां के पॉलिसीमेकर घरेलू लिक्विडिटी (liquidity) की चिंताओं से ज़्यादा श्रीलंकाई रुपये (Rupee) की कमजोरी को एक बड़ा खतरा मान रहे हैं। मॉनेटरी पॉलिसी (monetary policy) में यह अचानक आया सिकुड़न वाला रुख (contractionary stance) अब लेंडर्स (lenders) को जोखिम (risk) और कैपिटल कॉस्ट (capital cost) का फिर से आकलन करने पर मजबूर करेगा, जो देश के संकट के बाद की स्थिरता के दौर से भी ज़्यादा है।
ऊर्जा की कीमतें और आर्थिक दबाव
श्रीलंका की आर्थिक रिकवरी (economic recovery) ग्लोबल कमोडिटी (commodity) की कीमतों, खासकर फ्यूल (fuel) पर बहुत ज़्यादा निर्भर है। तेल आयात (import) पर भारी निर्भरता वाली इस अर्थव्यवस्था में, फ्यूल खरीद की कीमतों में हालिया 40% की बढ़ोतरी जैसी घटनाएं स्थानीय उद्योगों को मुश्किल फैसलों पर मजबूर करती हैं - या तो ऑपरेशन्स (operations) कम करें या मार्जिन (margin) का नुकसान झेलें। इससे ऊर्जा की कमी और सार्वजनिक छुट्टियाँ बढ़ सकती हैं, जो आर्थिक विकास में बाधा डालती हैं और सेंट्रल बैंक के लिए करेंसी को संभालने के प्रयासों को और जटिल बनाती हैं।
IMF का सपोर्ट और रिजर्व की चिंता
इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) से आने वाली $700 मिलियन की अगली किश्त कैपिटल फ्लाइट (capital flight) को रोकने के लिए बहुत ज़रूरी है। हालांकि, $6.7 बिलियन के आसपास के रिजर्व (reserves) के साथ, गलती की गुंजाइश बहुत कम है। अगर महंगाई 5% से ऊपर बनी रहती है, तो सेंट्रल बैंक एक दुविधा में फंस जाएगा: आगे और सख्ती करने से मंदी (recession) आ सकती है, जबकि मौजूदा दरों को बनाए रखने से रुपये में बड़ी गिरावट का खतरा है। IMF बोर्ड की समीक्षा (review) जारी बाहरी सप्लाई शॉक (supply shocks) के मुकाबले मौजूदा फिस्कल डिसिप्लिन (fiscal discipline) की स्थिरता का आकलन करेगी।
आर्थिक कमजोरी और भविष्य के खतरे
श्रीलंकाई अर्थव्यवस्था का रिकवरी पाथ (recovery path) स्वाभाविक रूप से नाजुक है। एक्सपोर्ट-लेड ग्रोथ (export-led growth) पर ध्यान केंद्रित करने वाले देशों के विपरीत, श्रीलंका की अर्थव्यवस्था कंजम्प्शन (consumption) पर ज़्यादा निर्भर करती है, जिसे अब ऊंची ब्याज दरों से कम किया जा रहा है। बाहरी डेट रीस्ट्रक्चरिंग (debt restructuring) पर निर्भरता का मतलब है कि किसी भी मौजूदा फिस्कल स्ट्रेटेजी (fiscal strategy) से हटने पर सॉवरेन रिस्क (sovereign risk) तेज़ी से बढ़ सकता है। इन्फ्लेशन एक्सपेक्टेशंस (inflation expectations) को कंट्रोल में रखे बिना, ऊंचे उधार लेने की लागत और स्थिर रियल वेज (real wages) IMF सपोर्ट के साथ भी लंबे समय तक आर्थिक ठहराव का जोखिम पैदा करते हैं।
