सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGBs): निवेशकों की हुई बल्ले-बल्ले! RBI ने क्यों बंद की ये 'महंगी' स्कीम?

ECONOMY
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGBs): निवेशकों की हुई बल्ले-बल्ले! RBI ने क्यों बंद की ये 'महंगी' स्कीम?
Overview

कई निवेशकों के सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGBs) अब मैच्योर हो रहे हैं और मालामाल कर रहे हैं। सोने की कीमतों में आई तूफानी तेजी के चलते निवेशकों को **200%** से भी ज़्यादा का रिटर्न मिल रहा है। लेकिन, रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने अब इस स्कीम में नए निवेश पर रोक लगा दी है। वजह? यह स्कीम सरकार के लिए उधार लेने का एक बहुत महंगा ज़रिया बन गई थी, जिससे भारी वित्तीय बोझ पड़ रहा था।

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निवेशकों की चांदी, 200% से ज़्यादा का रिटर्न!

जैसे-जैसे सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGBs) मैच्योर हो रहे हैं, निवेशकों की बल्ले-बल्ले हो रही है। इस हफ़्ते कुछ बॉन्ड, जैसे SGB 2020-21 Series-VII और SGB 2018-19 Series-II, अर्ली एग्जिट (early exit) के लिए उपलब्ध हैं और ज़बरदस्त मुनाफ़ा दे रहे हैं।

एक खास उदाहरण लें: SGB 2020-21 Series-VII, जो लगभग 20 अप्रैल, 2026 को मैच्योर होगा, निवेशकों को प्रति यूनिट ₹15,554 का भुगतान करेगा। सोचिए, इसका इश्यू प्राइस (issue price) सिर्फ़ ₹5,051 था! यानी, निवेशकों को 200% से भी ज़्यादा का शानदार रिटर्न मिल रहा है, और यह तो सालाना 2.5% ब्याज दर को जोड़ा ही नहीं गया है। यह दिखाता है कि आर्थिक अनिश्चितता और महंगाई के दौर में सोना कैसे एक सुरक्षित निवेश साबित होता है। 23 अप्रैल, 2026 तक, भारत में 24-कैरेट सोने का भाव लगभग ₹153,550 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया है, जो पिछले सालों से एक बड़ा उछाल है।

RBI ने क्यों कहा 'अलविदा' इस स्कीम को?

रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम को बंद करने का फैसला किया है। 2022 से नए इश्यू बंद थे और 2024 में पूरी तरह से यह स्कीम खत्म हो गई। इसका सबसे बड़ा कारण है इस स्कीम के ज़रिए उधार लेने की बढ़ती लागत। जैसे-जैसे सोने की कीमतें बढ़ीं, सरकार को मैच्योरिटी पर निवेशकों को ज़्यादा पैसे चुकाने पड़े, जिससे यह सरकार के लिए एक महंगा ज़रिया बन गया। इकोनॉमिक अफेयर्स के सेक्रेटरी अजय सेठ ने भी कहा कि यह स्कीम सरकार के लिए "काफी महंगा उधार" बन गई थी। यह कदम भारत की वित्तीय ज़िम्मेदारी (fiscal responsibility) को बेहतर बनाने के लक्ष्य के साथ जोड़ा जा रहा है। FY27 तक सरकारी कर्ज़ बढ़कर ₹214.82 लाख करोड़ होने का अनुमान है। ऐसे में, नए बॉन्ड पर भारी रिडेम्पशन कॉस्ट (redemption cost) चुकाने के बजाय, सरकार पुराने बॉन्ड को मैच्योर होने देगी।

SGBs का मकसद और सोने की भूमिका

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को 2015 में फिजिकल गोल्ड (physical gold) के एक विकल्प के तौर पर लॉन्च किया गया था। इसका मक़सद सोने का आयात कम करना और निवेशकों को सोने में निवेश का एक सुरक्षित ज़रिया देना था। SGBs पर 2.5% सालाना फिक्स्ड ब्याज मिलता था, साथ ही सोने की कीमतों में होने वाला इजाफ़ा भी। यह गोल्ड ईटीएफ (Gold ETFs) से अलग था, जो कोई गारंटीड ब्याज नहीं देते। SGBs के कई फ़ायदे थे, जैसे मेकिंग चार्ज (making charges) नहीं लगना, सुरक्षा और मैच्योरिटी पर टैक्स बेनिफिट्स (tax benefits)। फिर भी, परंपरा और भावना के कारण बहुत से लोग आज भी फिजिकल गोल्ड पसंद करते हैं। इतिहास गवाह है कि सोना महंगाई और संकट के समय में एक अच्छा हेज (hedge) रहा है, खासकर COVID-19 महामारी और भू-राजनीतिक घटनाओं के दौरान सोने की कीमतों में उछाल देखा गया।

सरकार के लिए 'जाल' कैसे बनी ये स्कीम?

सरकार के लिए, SGB स्कीम एक तरह का वित्तीय जाल साबित हुई। बॉन्ड को मौजूदा बाज़ार भाव पर रिडीम (redeem) करने की गारंटी का मतलब था कि जब सोने की कीमतें तेज़ी से बढ़ीं, तो सरकार को भारी रकम चुकानी पड़ी। यह, ऊपर से भारत के बढ़ते डेट-टू-जीडीपी रेशियो (debt-to-GDP ratio) के साथ, सरकार पर एक बड़ा वित्तीय बोझ बन गया। जबकि स्कीम का मकसद फिजिकल गोल्ड आयात को कम करना था, इसने वैसा कोई खास असर नहीं दिखाया। SGBs के ज़रिए सरकार के डेफिसिट (deficit) को फंड करने की ऊंची लागत, स्कीम के फायदों के मुकाबले ज़्यादा भारी पड़ने लगी। नए इश्यू बंद करने का फैसला एक व्यावहारिक कदम है, यह दर्शाता है कि स्कीम के उपयोग से कहीं ज़्यादा वित्तीय बोझ पड़ रहा है।

निवेशक अब क्या करें?

SGB स्कीम बंद होने के बाद, जो निवेशक सोने में निवेश करना चाहते हैं, वे अब गोल्ड ईटीएफ (Gold ETFs), डिजिटल गोल्ड (digital gold) या अन्य मैनेज्ड गोल्ड फंड्स (managed gold funds) जैसे विकल्पों पर विचार कर सकते हैं। सरकार का फ़ोकस अब मौजूदा कर्ज़ों को संभालने और अपने वित्तीय घाटे को पूरा करने के लिए सस्ते उधार के तरीके खोजने पर रहेगा। इसका मतलब है कि ऐसे निवेशों से दूरी बनाना, जहाँ सरकारी उधार की लागत सीधे तौर पर वोलेटाइल कमोडिटी की कीमतों से जुड़ी हो।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.