दक्षिण कोरिया के KOSPI इंडेक्स में शुक्रवार को 8% से ज़्यादा की भारी गिरावट दर्ज की गई, जिसके चलते सर्किट ब्रेकर को एक्टिवेट करना पड़ा। ग्लोबल टेक्नोलॉजी शेयरों में आई तेज बिकवाली और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती लागत को लेकर चिंताएं इस गिरावट की मुख्य वजह बनीं। विदेशी निवेशकों ने भारी मात्रा में बिकवाली की, जिससे स्थानीय मुद्रा (करेंसी) भी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुई।
क्या हुआ मार्केट में?
शुक्रवार को दक्षिण कोरियाई शेयर बाज़ारों में भारी गिरावट देखी गई। बेंचमार्क KOSPI इंडेक्स 8.18% लुढ़ककर 8,199.81 पॉइंट पर बंद हुआ। इस बिकवाली की रफ्तार और तीव्रता इतनी ज़्यादा थी कि बाज़ार में अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए हफ्ते में दो बार सर्किट ब्रेकर लगाने पड़े। यह इस साल पांचवीं बार है जब KOSPI पर सर्किट ब्रेकर लगाया गया है, और इसके पूरे इतिहास में यह ग्यारहवीं बार है। यह गिरावट पिछले तीन महीनों में इंडेक्स का सबसे खराब साप्ताहिक प्रदर्शन साबित हुई है।
टेक सेक्टर का भारी असर
दक्षिण कोरियाई बाज़ार टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर सेक्टर पर बहुत ज़्यादा निर्भर है। ऐसे में, बड़ी कंपनियों की बिकवाली का असर पूरे इंडेक्स पर कहीं ज़्यादा पड़ा। Samsung Electronics और SK Hynix, जो KOSPI के कुल वेटेज का आधे से ज़्यादा हिस्सा रखते हैं, दोनों के शेयरों में 9% से ज़्यादा की गिरावट आई। जब ये दिग्गज कंपनियाँ गिरती हैं, तो इसका असर पूरे बाज़ार पर पड़ता है, भले ही दूसरे सेक्टर्स कैसा भी प्रदर्शन कर रहे हों।
ग्लोबल टेक से आई गिरावट
कोरियाई शेयरों पर दबाव काफी हद तक वॉल स्ट्रीट से शुरू हुई ट्रेंड से मेल खाता था। गुरुवार को अमेरिकी टेक्नोलॉजी शेयरों में गिरावट आने के बाद निवेशकों का सेंटिमेंट बिगड़ा, जिसका असर नैस्डैक पर भी दिखा। फिलहाल, ग्लोबल निवेशकों की मुख्य चिंता बड़ी टेक कंपनियों द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर किए जा रहे भारी खर्च को लेकर है। बाज़ार के प्रतिभागियों को यह चिंता सता रही है कि AI में किए गए इन भारी निवेशों से क्या उम्मीद के मुताबिक रिटर्न मिलेगा। इस चिंता ने फिलहाल Micron और Qualcomm जैसी कंपनियों से AI चिप डिमांड के सकारात्मक संकेतों को पीछे छोड़ दिया है।
विदेशी पैसा निकला, करेंसी पर दबाव
मार्केट में आई गिरावट के साथ-साथ बड़ी मात्रा में पूंजी का बाहर जाना भी देखा गया। विदेशी निवेशकों ने इस सत्र के दौरान 3 ट्रिलियन वॉन के शेयर बेच दिए। इस पूंजी के बाहर निकलने से स्थानीय करेंसी, यानी साउथ कोरियन वॉन पर भी दबाव बढ़ा। वॉन डॉलर के मुकाबले 0.26% गिरकर 1,547.2 पर कारोबार कर रहा था। जब विदेशी पैसा किसी बाज़ार से निकलता है, तो अक्सर इससे शेयर की कीमतों पर दबाव आता है और करेंसी भी कमजोर होती है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
जो निवेशक ग्लोबल मार्केट पर नज़र रख रहे हैं, उनके लिए आगे अमेरिकी टेक्नोलॉजी इंडेक्स की स्थिरता और प्रमुख सेमीकंडक्टर निर्माताओं की तरफ से AI खर्चों को लेकर आने वाले कमेंट्री महत्वपूर्ण होंगे। निवेशक यह देख सकते हैं कि क्या यह बिकवाली सिर्फ मुनाफावसूली के कारण अल्पकालिक घबराहट है, या यह टेक खर्चों की स्थिरता को लेकर गहरी चिंता का संकेत है। अगले हफ्ते विदेशी संस्थागत निवेश के फ्लो पर नज़र रखना भी यह समझने के लिए महत्वपूर्ण होगा कि क्या बिकवाली व्यापक है या अस्थायी।
