साउथ कोरिया के शेयर बाजार में सोमवार को भारी गिरावट देखने को मिली। AI से जुड़े टेक शेयरों में अचानक आई मंदी और बाज़ार में बढ़ी चिंता के चलते KOSPI इंडेक्स लगभग **5%** नीचे आ गया। चिपमेकर Samsung Electronics और SK Hynix में हुई भारी बिकवाली के कारण ट्रेडिंग कर्फ्यू (trading curbs) लगाना पड़ा। यह गिरावट जून की ऊंचाई से **28%** की कमी को दर्शाती है।
AI दिग्गजों की बिकवाली ने मचाई खलबली
सोमवार को दक्षिण कोरियाई इक्विटीज़ में बड़ी बिकवाली हुई, जिसके चलते बेंचमार्क KOSPI इंडेक्स में करीब 5% की गिरावट आई और ऑटोमेटेड ट्रेडिंग कर्ब्स (sidecars) एक्टिवेट करने पड़े। ये अस्थायी रोक KOSPI और Kosdaq दोनों इंडेक्स पर अस्थिरता को कंट्रोल करने के लिए लगाई गई। यह गिरावट पिछले चार हफ्तों की लगातार गिरवाट का हिस्सा है, जिसके चलते इंडेक्स 22 जून को अपने रिकॉर्ड हाई से 28% तक गिर चुका है।
टेक कंपनियों का बुरा हाल
बाज़ार में आई इस गिरावट की मुख्य वजह देश की सबसे बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों में हुई भारी बिकवाली है। Samsung Electronics और SK Hynix, जिनका KOSPI के कुल मार्केट वैल्यू में आधे से ज़्यादा का योगदान है, दोनों के शेयर करीब 6% तक गिर गए। ये दोनों कंपनियां ग्लोबल AI मेमोरी चिप सप्लाई चेन का अहम हिस्सा हैं और इनके प्रदर्शन को अक्सर AI सेक्टर के लिए एक बैरोमीटर माना जाता है। ऑटोमोटिव सेक्टर में, Hyundai Motor के शेयर एक चल रही यूनियन स्ट्राइक के बीच 7% गिरे, जबकि Kia Corp 7.5% नीचे आया।
गिरावट के पीछे के कारण
AI से जुड़े ट्रेड्स में हाई लीवरेज (leverage) के कारण निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। कई रिटेल निवेशकों ने सिंगल-स्टॉक लीवरेज्ड फंड्स में पैसा लगाया था, जो बाज़ार के नीचे जाने पर नुकसान को और बढ़ा देते हैं। इस स्ट्रक्चर ने इंडेक्स को वोलेटिलिटी के प्रति ज़्यादा संवेदनशील बना दिया है। घरेलू टेक चिंताओं के अलावा, अंतर्राष्ट्रीय कारक भी दबाव बढ़ा रहे हैं। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ता संघर्ष तेल की कीमतों को ऊपर ले गया है, जिससे ग्लोबल निवेशकों में इन्फ्लेशन (inflation) की चिंता फिर से बढ़ गई है। इसके अलावा, बॉन्ड मार्केट ने इस रिस्क-ऑफ सेंटीमेंट को दर्शाया, जहां 10-साल के कोरियन ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में 4.7 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी के साथ यह 4.341% पर पहुंच गया।
निवेशकों का नज़रिया
हालांकि मौजूदा मार्केट करेक्शन गंभीर है, लेकिन यह इस साल की शुरुआत में हुई तेज ग्रोथ के बाद आया है। Citi जैसे कुछ एनालिस्ट्स ने बढ़ी हुई वोलेटिलिटी का हवाला देते हुए बाज़ार के नज़दीकी नज़रिए को न्यूट्रल कर दिया है। हालांकि, उन्होंने इंडेक्स के लिए लॉन्ग-टर्म प्राइस टारगेट बनाए रखे हैं, जिससे पता चलता है कि हालिया बिकवाली कंपनियों के बिजनेस मॉडल में फंडामेंटल खराबी के बजाय लीवरेज्ड पोजीशन के अनवाइंडिंग (unwinding) के कारण ज़्यादा हुई है। घरेलू बिकवाली के बावजूद, आधिकारिक आंकड़ों से पता चला कि विदेशी निवेशकों ने 415.1 बिलियन वॉन के शेयर खरीदकर नेट बायर (net buyers) बने रहे।
निवेशकों के लिए, अगला महत्वपूर्ण चरण प्रमुख ग्लोबल टेक कंपनियों की आने वाली अर्निंग्स रिपोर्ट्स (earnings reports) हैं। ये नतीजे इस बात की स्पष्टता देंगे कि AI-संबंधित कंपोनेंट्स की मांग कितनी मजबूत बनी हुई है, जो निवेशकों के विश्वास को परखने और मौजूदा ट्रेंड को स्थिर करने के लिए ज़रूरी होगा।
