South Korea KOSPI में 25% की भारी गिरावट, चिपमेकर शेयरों की बिकवाली का असर

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
South Korea KOSPI में 25% की भारी गिरावट, चिपमेकर शेयरों की बिकवाली का असर

साउथ कोरिया का KOSPI इंडेक्स अपने हालिया शिखर से लगभग 25% गिर गया है। फॉरेन इन्वेस्टर्स की बिकवाली और बड़े चिपमेकर्स पर दबाव के कारण यह बड़ी गिरावट आई है। निवेशक अब AI सेमीकंडक्टर सेक्टर की लंबी अवधि की संभावनाओं और मौजूदा बाजार की अस्थिरता का आकलन कर रहे हैं।

क्यों आई बाजार में इतनी बड़ी गिरावट?

इस साल की शुरुआत में दुनिया के टॉप परफॉर्मिंग बाजारों में से एक रहा साउथ कोरिया का शेयर बाजार अब भारी करेक्शन का सामना कर रहा है। KOSPI इंडेक्स अपने ऑल-टाइम हाई 9,114.55 पॉइंट से करीब 25% नीचे आ गया है। यह गिरावट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर प्रोडक्शन में ग्लोबल इंटरेस्ट के कारण पहले तेजी से चढ़ने वाले बाजार के लिए एक बड़ा झटका है।

लेवरेज और कंसंट्रेशन का असर

बाजार में इस अस्थिरता का एक बड़ा कारण इंडेक्स का अत्यधिक कंसंट्रेशन है। Samsung Electronics और SK Hynix मिलकर KOSPI के कुल मार्केट वैल्यू का आधे से ज्यादा हिस्सा रखते हैं। जब इन दोनों कंपनियों पर दबाव आता है, तो पूरे इंडेक्स में बड़ी हलचल देखने को मिलती है। इस स्थिति को और खराब किया है कई रिटेल इन्वेस्टर्स ने, जिन्होंने उधार लिए हुए पैसों या मार्जिन ट्रेडिंग का इस्तेमाल करके अपनी पोजीशन बनाई थी। जैसे-जैसे शेयर की कीमतें गिरीं, इन लेवरेज्ड बेट्स के कारण और भी बिकवाली हुई, जिससे बाजार में गिरावट तेज हो गई।

फॉरेन इन्वेस्टर्स की बिकवाली

फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स ने भी इस दबाव में योगदान दिया है। इस साल अब तक उन्होंने साउथ कोरियन इक्विटी से लगभग $110 बिलियन निकाले हैं। यह ट्रेंड अक्सर तब देखा जाता है जब ग्लोबल फंड्स अपने पोर्टफोलियो को रीबैलेंस करते हैं और किसी खास बाजार में तेजी के बाद, जब वह उनके कुल होल्डिंग्स का एक बड़ा हिस्सा बन जाता है, तो वे उसमें अपना एक्सपोजर कम करना चुनते हैं।

रेगुलेटरी एक्शन और वैल्यूएशन

साउथ कोरियन फाइनेंशियल रेगुलेटर्स अब बाजार पर अपनी निगरानी बढ़ा रहे हैं। फाइनेंशियल सुपरवाइजरी सर्विस (Financial Supervisory Service) ने कहा है कि वह लेवरेज्ड इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट्स की जांच करेगा और मार्केटिंग प्रैक्टिसेज की समीक्षा करेगा ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं उन्होंने अत्यधिक जोखिम लेने में तो योगदान नहीं दिया। इसके अलावा, बैंक ऑफ कोरिया (Bank of Korea) भी यह जांच कर रहा है कि कहीं सिंगल-स्टॉक एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) ने इस करेक्शन के दौरान बाजार की अस्थिरता को बढ़ाने में भूमिका तो नहीं निभाई।

इस बिकवाली के बावजूद, देश की कुछ प्रमुख सेमीकंडक्टर फर्मों की फाइनेंशियल स्थिति मिली-जुली बनी हुई है। कुछ एनालिस्ट्स का कहना है कि फॉरवर्ड प्राइस-टू-अर्निंग्स रेशियो (forward price-to-earnings ratios) कम हुए हैं, क्योंकि इन कंपनियों के लिए कमाई का अनुमान उनके शेयर की कीमतों से तेजी से बढ़ा है। यह कुछ मार्केट पार्टिसिपेंट्स के लिए यह संकेत देता है कि हालिया गिरावट को शुरुआती रैली से अलग तरीके से देखा जा सकता है, हालांकि कुल मिलाकर माहौल अनिश्चित बना हुआ है।

निवेशक शायद मार्जिन ट्रेडिंग और सेमीकंडक्टर दिग्गजों की स्थिरता को लेकर रेगुलेटर्स के अगले कदमों पर नजर रखेंगे। KOSPI का भविष्य का प्रदर्शन काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रमुख चिपमेकर्स की कमाई में वृद्धि सेंटीमेंट को स्थिर कर पाती है या नहीं और आने वाले महीनों में फॉरेन सेलिंग कम होना शुरू होती है या नहीं।

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