Shankar Sharma का बड़ा बयान: अगले बुल मार्केट में **8-10%** रिटर्न? स्मॉल-कैप शेयरों में दिखेगी तेजी!

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AuthorAditya Rao|Published at:
Shankar Sharma का बड़ा बयान: अगले बुल मार्केट में **8-10%** रिटर्न? स्मॉल-कैप शेयरों में दिखेगी तेजी!

Veteran investor Shankar Sharma has predicted that India's next bull market, expected in about two years, will deliver lower annual returns of 8-10%. As the economy matures into the $4-5 trillion range, he suggests that past era-defining growth rates are becoming difficult to sustain. Investors are being alerted to a potential shift where small-cap stocks, rather than large-cap blue chips, could lead future market gains.

अगले बुल मार्केट में धीमी रफ़्तार?

Veteran investor शंकर शर्मा का मानना है कि भारतीय शेयर बाज़ार में अब बड़े और तेज़ उछाल वाले दौर का अंत हो रहा है। उन्होंने कहा कि अगले 2 साल में जो नया बुल मार्केट आ सकता है, उसमें सालाना रिटर्न 8-10% के आसपास ही रहने की उम्मीद है। यह पिछले बाज़ार चक्रों की तुलना में काफी कम है।

अर्थव्यवस्था का आकार और ग्रोथ पर असर

शर्मा के अनुसार, जैसे-जैसे भारत की अर्थव्यवस्था $4-5 ट्रिलियन के पार पहुंचेगी, GDP में बड़ी ग्रोथ के लिए ज़बरदस्त पूंजी की ज़रूरत होगी, जिससे रफ़्तार धीमी हो जाएगी। उन्होंने इसे HDFC Bank और Infosys जैसी बड़ी कंपनियों से तुलना की, जो शुरुआत में तेज़ी से बढ़ीं लेकिन बाद में उनका ग्रोथ रेट कम हो गया।

पिछला बाज़ार चक्रों का विश्लेषण

उन्होंने 2003-2007 के दौर को असली बुल मार्केट बताया, जब Nifty ने 50-55% का CAGR दिया था। वहीं, कोविड के बाद की रिकवरी में रिटर्न 31% के आसपास रहा। शर्मा का कहना है कि हर अगले बाज़ार चक्र में रिटर्न कम होता गया है, इसलिए आने वाले चक्र में भी उम्मीद कम ही रखनी चाहिए।

स्मॉल-कैप शेयरों में छुपी है लीडरशिप?

फिलहाल बाज़ार में लार्ज-कैप कंपनियों का दबदबा है, लेकिन शर्मा का मानना है कि अगले बुल मार्केट में स्मॉल-कैप शेयर बाज़ी मार सकते हैं। उनके अनुसार, इन छोटी कंपनियों में कमाई बढ़ाने की ज़्यादा गुंजाइश है।

खुद शंकर शर्मा ने स्मॉल-कैप टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा-सेंटर कंपनियों में ₹100-200 करोड़ का निवेश किया है। उनका मानना है कि ये सेक्टर अभी शुरुआती दौर में हैं, जबकि बड़ी कंपनियाँ काफी मैच्योर हो चुकी हैं। यह निवेशकों के लिए एक संकेत है कि मुख्य इंडेक्स से हटकर छोटी कंपनियों पर भी नज़र रखनी होगी, हालांकि इनमें रिस्क भी ज़्यादा होता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.