8 जुलाई को भारतीय बाजारों में रिकवरी देखने को मिली। निवेशकों ने शुरुआती गिरावट का फायदा उठाते हुए वैल्यू बाइंग की। वहीं, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की खरीदारी जारी रहने से बाजार को सहारा मिला, भले ही कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से भू-राजनीतिक अनिश्चितता बनी रही।
बाजार में लौटी मजबूती, निवेशकों ने की वैल्यू बाइंग
8 जुलाई 2026 को भारतीय शेयर बाजार, यानी सेंसेक्स और निफ्टी, की शुरुआत गिरावट के साथ हुई, लेकिन कारोबार के दौरान इनमें रिकवरी देखने को मिली। बाजार का सेंटिमेंट बेहतर हुआ क्योंकि निवेशकों ने शुरुआती गिरावट का फायदा उठाया और स्टॉक्स खरीदे। इस ट्रेंड को 'वैल्यू बाइंग' कहा जाता है। निफ्टी 50 के लिए 24,200 के सपोर्ट लेवल के पास और इंडिया VIX (वोलेटिलिटी इंडेक्स) के 12.15 के स्तर के करीब आने से बाजार में स्थिरता दिखी।
भू-राजनीति और कच्चे तेल का असर
वैश्विक घटनाओं का असर बाजार पर साफ दिख रहा है, खासकर ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में बढ़ोतरी का। कीमतें लगभग $76 प्रति बैरल तक पहुंच गईं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की वजह से भारत की मैक्रोइकॉनॉमिक स्टेबिलिटी पर खतरा मंडरा रहा है, जिससे आयात बिल बढ़ सकता है और महंगाई पर दबाव आ सकता है। ऐसे में, निवेशकों ने डिफेंसिव सेक्टर्स और एनर्जी से जुड़ी कंपनियों पर ध्यान केंद्रित किया। ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) और ऑयल इंडिया जैसी कंपनियों के शेयरों में उछाल देखा गया, जबकि फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर्स ने भी निवेशकों का ध्यान खींचा।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का भरोसा
हाल के दिनों में बाजार की स्थिरता का एक मुख्य कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार खरीदारी रही है। मंगलवार के आंकड़ों के अनुसार, FIIs ने भारतीय इक्विटी में ₹393 करोड़ का निवेश किया। यह लगातार चौथे दिन की खरीदारी है, जिसके जरिए विदेशी निवेशकों ने कुल लगभग ₹1,991 करोड़ का निवेश किया है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि ग्लोबल निवेशक भारत को दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे अन्य एशियाई बाजारों की तुलना में अधिक स्थिर निवेश स्थल के रूप में देख रहे हैं।
आगे क्या? (Future Monitorables)
बाजार की यह रिकवरी कितनी टिकाऊ रहेगी, यह कई बाहरी फैक्टर्स पर निर्भर करेगा। सबसे बड़ी चिंता अमेरिका-ईरान के बीच की शत्रुता है, क्योंकि किसी भी बड़ी वृद्धि से विदेशी पूंजी का प्रवाह बाधित हो सकता है और घरेलू सूचकांकों पर फिर से दबाव पड़ सकता है। इसके अलावा, निवेशक इस बात पर भी नजर रखेंगे कि निफ्टी 50 24,200 के सपोर्ट लेवल को बनाए रख पाता है या नहीं। लगातार विदेशी निवेश और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का कंपनियों के मार्जिन पर पड़ने वाला असर आने वाले समय में मुख्य फोकस रहेगा।
