मंगलवार को भारतीय शेयर बाज़ार में भारी गिरावट देखने को मिली। वैश्विक स्तर पर टेक्नोलॉजी और AI शेयरों में आई बड़ी गिरावट के संकेतों के बीच, सेंसेक्स **900** अंक गिरकर **76,201** पर बंद हुआ। इस बिकवाली के चलते BSE पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप **₹5.5 लाख करोड़** घट गया।
बाज़ार में गिरावट की वजह
मंगलवार को शेयर बाज़ार में आई इस तीखी गिरावट का मुख्य कारण वैश्विक बाज़ारों से मिले नकारात्मक संकेत थे। खासकर टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े शेयरों में भारी गिरावट ने निवेशकों को डरा दिया। दक्षिण कोरिया के कोस्पी इंडेक्स में आई बड़ी गिरावट ने बाज़ार में बिकवाली का दबाव और बढ़ा दिया। इस वैश्विक दबाव के चलते भारतीय निवेशकों ने भी मुनाफावसूली की, जिसके कारण सेंसेक्स और निफ्टी जैसे प्रमुख सूचकांकों में चौतरफा बिकवाली देखी गई।
IT और मेटल शेयरों पर ज़्यादा असर
दिन के कारोबार में टेक्नोलॉजी और मेटल सेक्टर सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए। BSE IT इंडेक्स 2.2% तक गिर गया, क्योंकि निवेशकों को AI से जुड़ी दिक्कतों और ग्लोबल टेक डिमांड में कमी का डर सता रहा है। वहीं, BSE मेटल इंडेक्स में 3% से ज़्यादा की भारी गिरावट दर्ज की गई। इन सेक्टर्स में प्रॉफ़िट-बुकिंग (Profit-booking) यानी मुनाफावसूली का भी दबाव देखा गया, जिससे बिकवाली और बढ़ गई।
मार्केट कैप और निवेशकों का सेंटीमेंट
शेयरों की कीमतों में आई गिरावट के कारण BSE पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइज़ेशन (Market Capitalization) यानी बाज़ार पूंजीकरण करीब ₹5.5 लाख करोड़ घटकर ₹475.1 लाख करोड़ रह गया। हालांकि, बाज़ार का सेंटीमेंट (Sentiment) नकारात्मक था, लेकिन संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) की खरीदारी ने कुछ सहारा ज़रूर दिया। डेटा के अनुसार, फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) ₹18 करोड़ की नेट खरीदारी के साथ खरीदार बने रहे। इसी तरह, डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) ने ₹680 करोड़ की नेट खरीदारी की। संस्थागत निवेशकों की यह लगातार खरीदारी बताती है कि बाज़ार में उतार-चढ़ाव के बावजूद कुछ बड़े निवेशक स्टॉक जमा कर रहे हैं।
आगे क्या देखना होगा
आगे बाज़ार की चाल वैश्विक टेक्नोलॉजी बाज़ार में स्थिरता आने पर निर्भर करेगी। घरेलू स्तर पर, निवेशक उन कारकों पर ध्यान दे रहे हैं जो बाज़ार को स्थिर कर सकते हैं या दिशा दे सकते हैं। मॉनसून की प्रगति पर नज़र बनी रहेगी, क्योंकि इसका सीधा असर कृषि और आर्थिक विकास पर पड़ता है। इसके अलावा, अमेरिका और भारत के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं (Trade Discussions) पर भी नज़र रखी जाएगी। कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता अर्थव्यवस्था को कुछ सहारा दे रही है, लेकिन जब तक वैश्विक संकेत ज़्यादा सकारात्मक नहीं हो जाते, तब तक निवेशक सतर्क रह सकते हैं।
