कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का बड़ा असर
बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट रही। ब्रेंट क्रूड $108 प्रति बैरल से नीचे चला गया, जबकि WTI $101 के करीब कारोबार कर रहा था। यह गिरावट अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान के बाद आई कि अमेरिका जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से आवाजाही को आसान बनाने में मदद करेगा, जिससे क्षेत्रीय संघर्षों से सप्लाई बाधित होने की चिंताएं कम हो गईं।
भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए, तेल की कीमतें गिरने का सीधा फायदा होता है। इससे महंगाई कम होती है और देश के चालू खाते (Current Account) पर दबाव भी घटता है। ये सब फैक्टर शेयरों के लिए एक अनुकूल माहौल बनाते हैं।
चुनाव नतीजों का मिला अल्पकालिक सहारा
इसके अलावा, राज्य चुनावों के नतीजों से बने पॉजिटिव सेंटीमेंट ने भी बाज़ार को सहारा दिया, जिससे निवेशकों के शॉर्ट-टर्म आउटलुक में सुधार आया। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव नतीजों का असर आमतौर पर कुछ समय के लिए ही रहता है।
Geojit Investments Limited के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट, डॉ. वी. के. विजयकुमार के अनुसार, "चुनाव नतीजों से अक्सर एक संक्षिप्त सेंटीमेंटल बूस्ट मिलता है। बाज़ार की असली दिशा तो कच्चे तेल जैसी फंडामेंटल चीजों पर निर्भर करती है, जिन पर पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक घटनाक्रम का असर पड़ता है।"
प्रमुख सेक्टर्स में व्यापक मजबूती
बाज़ार के लगभग सभी सेक्टर्स में मजबूती दिखी। Nifty Auto इंडेक्स में सबसे ज़्यादा लगभग 2% का उछाल आया। फाइनेंशियल सर्विसेज में 1.49%, FMCG में 1.55% और मेटल इंडेक्स में 1.38% की बढ़त देखी गई। फार्मा, PSU बैंक और रियल्टी इंडेक्स ने भी अच्छा प्रदर्शन किया, जबकि IT सेक्टर लगभग सपाट रहा।
निजी शेयरों की बात करें तो Hindustan Unilever 4.39%, Maruti Suzuki 4.12% और Larsen & Toubro 2.54% तक चढ़ गए। Adani Ports, Bajaj Finance और Asian Paints जैसे शेयर भी 2% से ज़्यादा बढ़े। हालांकि, Kotak Mahindra Bank 2.60% और TCS 0.52% की गिरावट के साथ पिछड़ते दिखे।
स्मॉल और मिड-कैप में भी तेजी, वोलेटिलिटी घटी
बाज़ार की सकारात्मक चाल मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेगमेंट तक भी पहुंची। Nifty Midcap 50 1.13%, Nifty Midcap 100 1.03% और Nifty Smallcap 100 0.86% चढ़े। बाजार की वोलेटिलिटी (Volatility) को मापने वाला India VIX 4.42% गिरकर 17.64 पर आ गया, जो निवेशकों के डर में कमी का संकेत है।
जानकारों की चिंताएं: FII की बिकवाली का खतरा
इस जोरदार तेजी के बावजूद, जानकारों का मानना है कि फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FII) की लगातार बिकवाली आगे की बढ़त को सीमित कर सकती है। डॉ. विजयकुमार का सुझाव है कि FIIs भारत में बिकवाली जारी रख सकते हैं, जिससे लार्ज-कैप स्टॉक्स पर दबाव बन सकता है, क्योंकि उनका फोकस अब व्यापक बाजार (Broader Market) की ओर शिफ्ट हो रहा है। उन्होंने कहा कि घरेलू कारकों से प्रेरित रैलियों का इस्तेमाल विदेशी निवेशक अपनी होल्डिंग्स को कम करने के लिए कर सकते हैं।
इस अपट्रेंड की स्थिरता वैश्विक कारकों पर निर्भर करेगी, जैसे कि कच्चे तेल की कीमतों का उतार-चढ़ाव, पश्चिम एशिया की स्थिति और FIIs का फ्लो, जो बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
