शांति की उम्मीदों से बढ़ा निवेशकों का भरोसा
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति की उम्मीदों ने बाजार में गजब का जोश भर दिया है। उम्मीद की जा रही है कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत फिर से शुरू हो सकती है, वहीं इजरायल और लेबनान के बीच भी संवाद के संकेत मिले हैं। इन ख़बरों से क्षेत्रीय संघर्ष के बड़े रूप लेने के डर को कम किया है और निवेशकों का सेंटीमेंट (sentiment) बेहतर हुआ है।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से मिली राहत
बाजार में तेजी की एक बड़ी वजह कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई भारी गिरावट रही। Brent Crude की कीमत $100 प्रति बैरल के नीचे आ गई है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह बड़ी राहत की बात है, क्योंकि इससे महंगाई (Inflation) कम होगी और देश के व्यापार घाटे (Trade Balance) में भी सुधार आएगा। बैंकिंग, ऑटोमोबाइल और कंज्यूमर गुड्स (Consumer Goods) जैसे एनर्जी पर निर्भर सेक्टरों को इसका सीधा फायदा मिलेगा।
व्यापक खरीदारी से हरे हुए शेयर
यह तेजी सिर्फ कुछ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि बड़े से लेकर छोटे सभी सेक्टर्स में देखने को मिली। IndusInd Bank, Larsen & Toubro, Tata Consultancy Services, Adani Ports और Infosys जैसे प्रमुख शेयर 2% से 4% तक चढ़े। इसके अलावा Asian Paints, UltraTech Cement, Bajaj Finance, HDFC Bank, Titan और Reliance Industries ने भी अच्छी बढ़त दर्ज की। सेक्टरों की बात करें तो Nifty IT में 2.54%, Nifty Media में 2.43% और Nifty Metal में 1.85% की तेजी आई। Financial Services, Auto, PSU Bank और Oil & Gas इंडेक्स में भी 1% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई।
विश्लेषकों की सावधानी की सलाह
हालांकि, बाजार की इस सकारात्मक चाल के बीच भी विशेषज्ञों ने सावधानी बरतने की सलाह दी है। Geojit Investments Limited के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. VK विजयकुमार का कहना है कि बाजार शायद तेजी से समाधान की उम्मीद कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPIs) फिर से बिकवाली शुरू करते हैं, खासकर दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे एशियाई बाजारों के रुझानों को देखते हुए, तो बड़े शेयरों (Large-cap stocks) पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं, मिड-कैप (Mid-cap) और स्मॉल-कैप (Small-cap) शेयरों में ऐसे आउटफ्लो (outflow) का असर कम रहने की संभावना है।