सेंसेक्स में जोरदार वापसी! IT शेयरों ने भरी उड़ान, पर विदेशी बिकवाली का डर!

ECONOMY
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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
सेंसेक्स में जोरदार वापसी! IT शेयरों ने भरी उड़ान, पर विदेशी बिकवाली का डर!
Overview

आज भारतीय शेयर बाज़ार में रिकवरी देखने को मिली। BSE सेंसेक्स लगातार चार दिनों की गिरावट को थामते हुए **74,649.84** पर बंद हुआ, जिसका मुख्य कारण IT सेक्टर में हुई ज़बरदस्त खरीदारी रही। हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली और ग्लोबल टेंशन बाज़ार के लिए चिंता का सबब बने हुए हैं।

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बाज़ार में दिखी जोरदार वापसी

02 जून, 2026 को भारतीय शेयर बाज़ार में उतार-चढ़ाव के बीच रिकवरी आई। प्रमुख इंडेक्सों ने दिन की शुरुआत में हुई गिरावट को पलटते हुए पॉज़िटिव क्लोजिंग दी। BSE सेंसेक्स 382.50 अंकों यानी 0.52% की बढ़त के साथ 74,649.84 पर बंद हुआ, वहीं Nifty 50 ने 100.95 अंक की छलांग लगाते हुए 23,483.55 पर क्लोजिंग की। सेंसेक्स में लगभग 1,000 अंकों का उतार-चढ़ाव देखा गया, लेकिन लार्ज-कैप टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में भारी खरीदारी के चलते यह रिकवरी संभव हो पाई। हालांकि, यह तेज़ी स्ट्रैटेजिक पोजीशनिंग के कारण आई, बाज़ार के सेंटिमेंट में कोई बड़ा बदलाव नहीं दिख रहा है।

IT सेक्टर की धूम, बाकियों में नरमी

इस तेज़ी में टेक्नोलॉजी स्टॉक्स का जलवा रहा, Nifty IT इंडेक्स 4% से ज़्यादा उछला। Infosys, TCS और HCL Technologies जैसी दिग्गज कंपनियों में शानदार तेजी देखने को मिली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर बेहतर सेंटिमेंट और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी (जिससे महंगाई की चिंता कम हुई) ने IT शेयरों को सपोर्ट दिया। दूसरी ओर, बाज़ार में अभी भी बिखराव दिख रहा है। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और ऑटो जैसे ग्रोथ सेक्टर्स में मजबूती दिखी, लेकिन फाइनेंशियल सर्विसेज और हेल्थकेयर इंडेक्स दबाव में रहे। ऐसा इसलिए क्योंकि आने वाली RBI की मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग से पहले निवेशक रेट-सेंसिटिव सेक्टर्स को लेकर सतर्क हैं।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली का बोझ

सेशन में हुई बढ़त के बावजूद, बाज़ार डोमेस्टिक संस्थागत खरीदारों और लगातार बिकवाली कर रहे विदेशी निवेशकों के बीच फंसा हुआ है। फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) लगातार भारतीय इक्विटी से पैसा निकाल रहे हैं, जिससे मार्केट लिक्विडिटी और सेंटिमेंट पर दबाव बना हुआ है। लेटेस्ट डेटा के मुताबिक़, ग्लोबल कैपिटल तेज़ी से दूसरे एशियाई मार्केट्स की ओर जा रहा है, जहां सेमीकंडक्टर और AI इंफ्रास्ट्रक्चर में ज़्यादा निवेश की उम्मीद है। बिकवाली का यह दबाव बताता है कि मौजूदा रैली के लिए एक बड़ी सीलिंग है, खासकर तब जब Nifty 50 अपने 50-दिन और 200-दिन के मूविंग एवरेज से नीचे ट्रेड कर रहा है।

जोखिम और गिरावट का डर

भारतीय बाज़ार वैल्यूएशन के मामले में टॉप-5 ग्लोबल इक्विटी हब में अपनी जगह खो रहा है, जिससे संस्थागत निवेशकों का संदेह बढ़ रहा है। ताइवान और साउथ कोरिया जैसे टेक-हैवी हब्स की तुलना में इंडेक्स का अंडरपरफॉर्मेंस गिरावट के तर्क को मज़बूत करता है। इसके अलावा, रिटेल निवेशकों के ऑप्टिमिज़्म के साथ घटती विदेशी हिस्सेदारी एक स्ट्रक्चरल लिक्विडिटी रिस्क पैदा करती है। अगर Nifty 23,050 के सपोर्ट लेवल को तोड़ता है, तो बाज़ार के जानकारों का मानना है कि स्टॉप-लॉस का एक झरना (cascade) देखने को मिल सकता है। इन टेक्निकल जोखिमों के साथ-साथ, अमेरिका-ईरान जियोपॉलिटिकल सिचुएशन की अनिश्चितताएं कच्चे तेल की कीमतों को अस्थिर कर सकती हैं, जो भारत के फिस्कल डेफिसिट और रुपए के वैल्यूएशन पर असर डाल सकती हैं।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.