भारतीय शेयर बाज़ारों में आज तेज़ी लौटी। जियो-पॉलिटिकल तनावों के चलते आई गिरावट के बाद, वैल्यू बाइंग (Value Buying) लौटने से Sensex **0.31%** चढ़कर **76,741** पर बंद हुआ। जहाँ विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने **₹532** करोड़ के शेयर बेचे, वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) के दमदार सपोर्ट से बाज़ार को सहारा मिला। अब निवेशकों का ध्यान आगामी कॉर्पोरेट नतीजों पर है, जिसकी शुरुआत TCS के नतीजों से होगी।
बाज़ार में लौटी उम्मीद की किरण
गुरुवार को भारतीय इक्विटी बाज़ारों में रिकवरी के संकेत दिखे, जिसने पिछले सत्र की बिकवाली के नुकसान को कुछ हद तक कम किया। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 237 अंक या 0.31% की बढ़त के साथ 76,741.82 पर बंद हुआ। निफ्टी 50 ने भी इंट्रा-डे ट्रेड में 24,000 का लेवल पार किया और अंत में 23,962.80 पर 0.34% की तेज़ी के साथ क्लोज हुआ।
बाज़ार की चौड़ाई और संस्थागत गतिविधियां
यह रिकवरी बड़े पैमाने पर ब्रॉडर मार्केट (Broader Market) की भागीदारी से प्रेरित थी, जहाँ मिड-कैप (Mid-cap) और स्मॉल-कैप (Small-cap) स्टॉक्स में क्रमशः 1.35% और 1.77% की बढ़त देखी गई। BSE पर मार्केट ब्रेथ (Market Breadth) मज़बूत पॉजिटिव ज़ोन में रही, जहाँ 2,825 शेयरों में तेज़ी आई जबकि 1,424 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। सकारात्मक मूल्य रुझान के बावजूद, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FPIs) ने सावधानी बरती, क्योंकि प्रोविज़नल डेटा के अनुसार उन्होंने ₹532.86 करोड़ की नेट बिकवाली की। इस बिकवाली के दबाव को घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने सफलतापूर्वक बेअसर किया, जिन्होंने कुल ₹2,057.79 करोड़ के शेयर खरीदे।
भू-राजनीतिक तनावों का असर
पिछले दिन बाज़ार में आई गिरावट का मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को लेकर चिंताएं थीं, जिसने कच्चे तेल की कीमतों को ऊपर धकेल दिया था। ऊँची तेल की कीमतें आमतौर पर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक नकारात्मक कारक होती हैं, क्योंकि देश ऊर्जा आयात पर बहुत अधिक निर्भर है। इससे करंट अकाउंट डेफिसिट (Current Account Deficit) पर दबाव पड़ सकता है और महंगाई (Inflation) का जोखिम बढ़ सकता है। हालाँकि कच्चे तेल की अस्थिरता बनी हुई है, बाज़ार अब पश्चिम एशिया में सीज़फायर (Ceasefire) के संबंध में हालिया बयानों के बाद संभावित राजनयिक बदलावों के प्रभाव का आकलन कर रहा है।
सेक्टर-वार रुझान और आगे क्या देखें
रिकवरी का नेतृत्व करने वाले सेक्टर्स में रियलिटी (Realty), कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (Consumer Durables) और पब्लिक सेक्टर बैंक्स (Public Sector Banks) शामिल थे, जो इस सप्ताह की शुरुआत में ज़्यादा गिरावट झेलने वाले स्टॉक्स में नए सिरे से रुचि दर्शाते हैं। निवेशक अब अर्निंग सीज़न (Earnings Season) की शुरुआत की ओर बढ़ रहे हैं। बाज़ार बारीकी से जिस एक प्रमुख घटना पर नज़र रखे हुए है, वह है टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के तिमाही नतीजों की घोषणा, जो अक्सर आईटी सेक्टर में रेवेन्यू ग्रोथ (Revenue Growth) और मार्जिन स्टेबिलिटी (Margin Stability) को लेकर निवेशकों की उम्मीदों की दिशा तय करती है।
कॉर्पोरेट नतीजों के अलावा, निवेशक कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों और भारतीय रुपये की स्थिरता के बीच के तालमेल पर लगातार नज़र रखेंगे। FPIs के नेट सेलर्स बने रहने के साथ, इस रिकवरी की निरंतरता घरेलू खरीदारी की मज़बूती और आने वाले हफ्तों में प्रमुख ब्लू-चिप कंपनियों से सकारात्मक अर्निंग संकेतों की स्थिरता पर निर्भर करेगी।
