गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त वापसी देखने को मिली। सेंसेक्स (Sensex) ने 77,000 का आंकड़ा पार किया, तो वहीं निफ्टी (Nifty) भी 24,000 के ऊपर बंद हुआ। यह तेजी बुधवार को आई बड़ी गिरावट के बाद आई है, जिसमें निवेशकों ने भू-राजनीतिक चिंताओं को दरकिनार करते हुए विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की खरीदारी का फायदा उठाया।
तेल की कीमतों की चिंता पर भारी पड़ी FIIs की खरीदारी
गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार के सत्र में आई बड़ी गिरावट से उबरते हुए शानदार रिकवरी दर्ज की। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 77,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 भी 24,000 के पार बंद हुआ। यह उछाल मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण आई गिरावट के बाद देखने को मिला, जहां बाजार 2% से अधिक फिसले थे।
विश्लेषकों का मानना है कि निवेशक फिलहाल ईरान-अमेरिका संबंधों को लेकर चल रही खबरों को ज्यादा तवज्जो नहीं दे रहे हैं। कच्चे तेल की कीमतें फिलहाल लगभग $79 प्रति बैरल पर बनी हुई हैं, और बाजार ने इस स्तर को काफी हद तक पचा लिया है। जानकारों के मुताबिक, जब तक होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे प्रमुख शिपिंग मार्ग खुले हैं, तब तक तेल की कीमतों में $100 प्रति बैरल से ऊपर की बड़ी बढ़ोतरी का जोखिम भारत के लिए कम है। स्थिर तेल कीमतें भारत के आयात बिल को नियंत्रित रखने में मदद करती हैं, जिससे करेंसी की स्थिरता बनी रहती है।
FIIs का भरोसा और सेक्टोरल परफॉर्मेंस
इस रिकवरी में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार खरीदारी का अहम योगदान रहा। पिछले चार कारोबारी दिनों में FIIs ने भारतीय कैश मार्केट में लगभग ₹3,954 करोड़ की नेट खरीदारी की है। इस पूंजी के निरंतर प्रवाह से लार्ज-कैप शेयरों, विशेष रूप से बैंकिंग और ऑटोमोबाइल सेक्टर में मजबूती बनी हुई है।
सेक्टरों की बात करें तो, रिकवरी व्यापक थी। निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स में 1.91% की बढ़त दर्ज की गई, जबकि रियलिटी और प्राइवेट बैंकिंग शेयरों में भी खरीदारी बढ़ी। बाजार की घबराहट को मापने वाला इंडिया VIX (India VIX) 7% से अधिक गिर गया। VIX में गिरावट आमतौर पर निवेशकों के बढ़ते आत्मविश्वास का संकेत देती है।
IT सेक्टर में दिखी नरमी
जहां एक ओर व्यापक बाजार में तेजी देखने को मिली, वहीं निफ्टी आईटी (Nifty IT) इंडेक्स 1.46% की गिरावट के साथ रुझान के विपरीत चला। यह कमजोरी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) जैसी प्रमुख आईटी कंपनियों के आगामी तिमाही नतीजों से पहले मुनाफावसूली से जुड़ी लग रही है। इंफोसिस (Infosys) जैसे शेयरों में भी बिकवाली का दबाव देखा गया, जो दर्शाता है कि निवेशक सेक्टर-व्यापी ग्रोथ पर दांव लगाने के बजाय ठोस वित्तीय नतीजों का इंतजार कर रहे हैं।
निवेशकों के लिए, वैश्विक तेल की कीमतों में स्थिरता और विदेशी फंड के प्रवाह की निरंतरता पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। यदि कच्चा तेल मौजूदा स्तरों के करीब बना रहता है, तो बाजार घरेलू आर्थिक आंकड़ों और आगामी कॉर्पोरेट आय पर ध्यान केंद्रित कर सकता है। हालांकि, यदि भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को प्रभावित करता है, तो बाजार में अस्थिरता लौट सकती है, खासकर उन क्षेत्रों में जो ऊर्जा लागत के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं।
