Sensex, Nifty धड़ाम! US-Iran टेंशन और टैरिफ के डर से मार्केट में ₹4.25 लाख करोड़ की भारी गिरावट

ECONOMY
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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Sensex, Nifty धड़ाम! US-Iran टेंशन और टैरिफ के डर से मार्केट में ₹4.25 लाख करोड़ की भारी गिरावट

बुधवार को भारतीय शेयर बाज़ार में भारी गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों का भरोसा डगमगाने से सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी (Nifty) दोनों **1%** से ज़्यादा नीचे आ गए। इस बिकवाली में निवेशकों की लगभग **₹4.25 लाख करोड़** की संपत्ति स्वाहा हो गई।

Detailed Coverage

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक ऊर्जा सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। लाल सागर (Red Sea) में सुरक्षा कारणों से शिपिंग लाइनों के रास्ता बदलने की खबरों से ब्रेंट क्रूड (Brent crude) का भाव $92 प्रति बैरल के पार चला गया, जबकि US WTI क्रूड $85 के ऊपर निकल गया। भारत, जो कच्चे तेल का एक बड़ा आयातक है, के लिए यह दोहरी मार है। एक तरफ आयात बिल बढ़ेगा, तो दूसरी तरफ घरेलू महंगाई पर दबाव बढ़ेगा। तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि से कंपनियों को लॉजिस्टिक्स और उत्पादन लागत बढ़ने की समस्या से जूझना पड़ता है, जिससे कई सेक्टरों के मुनाफे (Profit) पर असर पड़ सकता है।

फार्मा सेक्टर पर गहराया संकट

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा आयातित जेनेरिक दवाओं पर चरणबद्ध टैरिफ (tariff) लगाने के प्रस्ताव के बाद फार्मा सेक्टर में ज़बरदस्त बिकवाली देखने को मिली। इस प्रस्ताव के तहत अगले दो सालों में टैरिफ को 200% तक बढ़ाया जा सकता है। यह भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि वे अमेरिकी बाज़ार से होने वाली एक्सपोर्ट आय पर काफी निर्भर हैं। Lupin, Piramal Pharma, Glenmark और Cipla जैसी बड़ी कंपनियों के शेयर 4% तक गिर गए, जिससे Nifty Pharma इंडेक्स में लगभग 2% की गिरावट आई। निवेशक अब इन संरक्षणवादी कदमों के लागू होने पर भविष्य के एक्सपोर्ट वॉल्यूम और मुनाफे पर पड़ने वाले असर का आकलन कर रहे हैं।

करेंसी और बॉन्ड मार्केट की प्रतिक्रिया

शेयर बाज़ार की गिरावट के बीच, भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 11 पैसे कमजोर होकर 96.36 पर खुला। महंगे तेल और मज़बूत डॉलर का यह मेल घरेलू करेंसी के लिए एक चुनौतीपूर्ण माहौल बनाता है। इसी बीच, वैश्विक ब्याज दरों का असर भी एसेट एलोकेशन पर दिख रहा है। 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड (US Treasury yield) 4.63% तक पहुँच गई, और 30-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 5.137% पर पहुंच गई। सुरक्षित सरकारी बॉन्ड पर यील्ड बढ़ने से अक्सर निवेशक ज़्यादा रिटर्न और स्थिरता की तलाश में शेयरों जैसी जोखिम भरी संपत्तियों से पैसा निकालकर फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट्स में लगाते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.