Sensex, Nifty लगातार तीसरे हफ्ते बढ़त पर, कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorAditya Rao|Published at:
Sensex, Nifty लगातार तीसरे हफ्ते बढ़त पर, कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी

भारतीय शेयर बाज़ार इस हफ्ते लगातार तीसरी बार बढ़त के साथ बंद हुए। कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी और RBI के नीतिगत कदमों ने बाज़ार को सहारा दिया। हालाँकि, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस एक्टिविटी ग्रोथ में आई कमी के आंकड़े अर्थव्यवस्था में कुछ सावधानी का संकेत दे रहे हैं।

क्या हुआ?

इस हफ्ते भारतीय शेयर बाज़ारों ने तेज़ी का सिलसिला जारी रखा, और सेंसेक्स (Sensex) व निफ्टी (Nifty) दोनों में लगातार तीसरे हफ़्ते बढ़ोतरी दर्ज की गई। गुरुवार को सेंसेक्स 0.14% की तेज़ी के साथ 77,101 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी भी 0.14% चढ़कर 24,056 पर बंद हुआ। भले ही यह इस साल की सबसे लंबी लगातार तेज़ी की मोमबत्ती है, लेकिन बढ़ोतरी मामूली रही और मार्केट ब्रेथ (Market Breadth) कमजोर बना रहा, जिसका मतलब है कि सत्र के दौरान बढ़त वाले शेयरों की तुलना में गिरावट वाले शेयर ज़्यादा थे।

कच्चे तेल और RBI का सहारा क्यों ज़रूरी?

इस हफ़्ते बाज़ार को मुख्य रूप से दो कारकों ने सहारा दिया। पहला, ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude Oil) की कीमतें गिरकर लगभग $73.5 प्रति बैरल के स्तर पर आ गईं। चूंकि भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल की कम कीमतें व्यापार संतुलन (Trade Balance) के लिए एक सकारात्मक संकेत है और महंगाई (Inflation) को काबू में रखने में मदद करती हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से आपूर्ति संबंधी चिंताओं में आई कमी इस गिरावट का एक प्रमुख कारण रही है।

दूसरा, रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने ब्याज दरों (Interest Rates) और लिक्विडिटी (Liquidity) पर स्पष्ट संकेतों के ज़रिए समर्थन प्रदान किया। RBI गवर्नर ने संकेत दिया कि तत्काल दर वृद्धि (Rate Hikes) की संभावना नहीं है। इसके अलावा, केंद्रीय बैंक के उधारदाताओं को विदेशी मुद्रा जमा (Foreign Currency Deposits) के एवज में लोन देने की अनुमति देने के फैसले ने रुपये को स्थिर करने में मदद की है और बाज़ार में अधिक पूंजी के प्रवाह को प्रोत्साहित किया है।

मंदी का संकेत

बढ़त के बावजूद, नवीनतम व्यावसायिक आंकड़े आर्थिक सुस्ती (Economic Slowdown) की ओर इशारा कर रहे हैं। HSBC इंडिया कंपोजिट परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) - जो व्यावसायिक स्वास्थ्य का एक प्रमुख संकेतक है - जून में घटकर 57.4 रह गया, जो मई में 59.3 था।

हालांकि 50 से ऊपर का PMI रीडिंग अभी भी ग्रोथ का संकेत देता है, लेकिन इसमें आई गिरावट दर्शाती है कि गतिविधि पहले की तुलना में धीमी गति से बढ़ रही है। विशेष रूप से, सर्विसेज PMI 17 महीने के निचले स्तर 57.3 पर आ गया, और मैन्युफैक्चरिंग PMI फिसलकर 54.5 पर आ गया। निवेशक अक्सर इन आंकड़ों पर बारीकी से नज़र रखते हैं, क्योंकि ये आधिकारिक आय (Earnings) जारी होने से पहले व्यवसायों के प्रदर्शन का वास्तविक समय का पता देते हैं।

निवेशक बाज़ार को कैसे समझ सकते हैं?

भले ही इंडेक्स में तेज़ी आ रही है, लेकिन ज़्यादातर शेयरों में गिरावट यह दर्शाती है कि कई निवेशक अभी भी सतर्क हैं। बाज़ार वर्तमान में कम ऊर्जा लागत के लाभ और धीमी व्यावसायिक गतिविधि की वास्तविकता के बीच संतुलन बना रहा है। यह मिश्रित तस्वीर अक्सर अस्थिरता (Volatility) पैदा करती है, खासकर उन सेक्टर्स में जो वैश्विक रुझानों के प्रति संवेदनशील हैं, जैसे कि मेटल्स (Metals) और आईटी (IT)। जब इंडेक्स में तेज़ी आती है जबकि ज़्यादातर शेयरों में गिरावट आती है, तो यह आमतौर पर एक व्यापक रैली के बजाय कुछ भारी-भरकम शेयरों द्वारा संचालित लाभ का संकेत देता है।

आगे क्या देखना है?

आने वाले हफ़्तों के लिए, सबसे महत्वपूर्ण कारक मानसून की प्रगति होगी। कृषि और ग्रामीण मांग (Rural Demand) भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं, और एक अच्छा मानसून अक्सर अन्य आर्थिक मंदी की चिंताओं को दूर कर सकता है। निवेशक RBI से महंगाई और आगामी कॉर्पोरेट आय (Corporate Earnings) पर किसी भी और टिप्पणी पर भी बारीकी से नज़र रखेंगे, जो कंपनियों के वर्तमान व्यावसायिक माहौल को संभालने के तरीके पर अधिक स्पष्टता प्रदान करेगा।

Disclaimer:This article is published for informational purposes only. While reasonable efforts are made to ensure accuracy, completeness, and timeliness, readers are encouraged to independently verify information before making any decisions based on the content. The views and information presented are subject to editorial review and may be updated without notice.