सोमवार, 22 जून 2026 को भारतीय शेयर बाजारों में शानदार रिकवरी देखने को मिली। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई, जिससे सेंसेक्स **404** अंक चढ़ गया। कल की बड़ी गिरावट के बाद IT और ऑयल एंड गैस शेयरों में निवेशकों को राहत मिली है।
क्या हुआ?
भारतीय शेयर बाजारों ने हफ्ते की शुरुआत सकारात्मक नोट पर की। BSE सेंसेक्स 404 अंक बढ़कर 77,207 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि NSE निफ्टी 50 ने 24,100 का आंकड़ा पार कर लिया। पिछले हफ्ते के आखिर में आई बड़ी बिकवाली, खासकर IT सेक्टर में, के बाद यह रिकवरी आई है। इस तेजी की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता को लेकर उम्मीदें हैं, जिससे पश्चिम एशिया क्षेत्र में स्थिरता की आस जगी है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में और बाधाओं की आशंका कम हुई है।
तेल और भू-राजनीतिक संबंध
कच्चे तेल की कीमतें, जो भारत की आयात पर भारी निर्भरता के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चिंता का विषय हैं, उनमें नरमी के संकेत मिले हैं। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स $79-$80 प्रति बैरल के दायरे में फिसल गए, जिससे भारतीय बाजार को काफी राहत मिली है। ऐतिहासिक रूप से, तेल की ऊंची कीमतें भारत के आयात बिल पर दबाव डालती हैं, चालू खाता घाटे को बढ़ाती हैं और रुपये को कमजोर करती हैं। अमेरिका और ईरान के बीच उच्च-स्तरीय वार्ता में हुई प्रगति, जिसमें लंबे समय से चले आ रहे तनाव को दूर करने के लिए एक सहमत रोडमैप भी शामिल है, ने वैश्विक तेल की कीमतों में 'युद्ध प्रीमियम' को कम करने में मदद की है। ऊर्जा लागत में यह कमी भारत में मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिरता के लिए एक सहायक कारक के रूप में देखी जा रही है।
IT सेक्टर की वापसी
IT सेक्टर, जिसने 19 जून 2026 को भारी बिकवाली देखी थी, ने आज रिकवरी का नेतृत्व किया। पिछली गिरावट वैश्विक IT दिग्गज Accenture द्वारा अपने राजस्व गाइडेंस को कम करने और विवेकाधीन प्रौद्योगिकी खर्च पर उसकी सतर्क टिप्पणी के कारण आई थी, जिससे आउटसोर्सिंग मांग में लंबे समय तक मंदी का डर पैदा हो गया था। आज Tech Mahindra, Infosys और HCLTech जैसे शेयरों में तेजी तकनीकी उछाल या शॉर्ट-कवरिंग मूव के रूप में देखी जा रही है, क्योंकि निवेशक वैश्विक टेक सेक्टर के आउटलुक के शुरुआती प्रभाव को समझ रहे हैं।
जोखिम और ध्यान देने योग्य बातें
हालांकि सेंटिमेंट में सुधार हुआ है, बाजार विश्लेषक सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) जून के महीने में भारतीय इक्विटी मार्केट में लगातार बिकवाली कर रहे हैं, और इस रैली की स्थिरता कई कारकों पर निर्भर करेगी। निवेशकों को इन पर नज़र रखनी चाहिए:
- भू-राजनीतिक स्थिरता: अमेरिका-ईरान वार्ता में किसी भी तरह की रुकावट कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक बाजार के सेंटिमेंट में मौजूदा राहत को तुरंत उलट सकती है।
- IT खर्च की प्रवृत्तियां: हालांकि Accenture के गाइडेंस के शुरुआती झटके से निपटा जा चुका है, लेकिन अगले तिमाही के लिए भारतीय IT ऑर्डर बुक और राजस्व वृद्धि पर इसका वास्तविक प्रभाव एक प्रमुख अनिश्चितता बना हुआ है।
- FPI प्रवाह: हाल के हफ्तों में विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार बिकवाली एक हेडविंड का काम कर रही है, जिसे बाजार को वर्तमान स्तरों को बनाए रखने के लिए पार करना होगा।
- मैक्रो डेटा: मुद्रास्फीति और व्यापार घाटे के आंकड़े कच्चे तेल की कीमतों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होने के कारण, ऊर्जा लागत में कोई भी नई बढ़ोतरी वर्तमान बाजार लचीलेपन का परीक्षण कर सकती है।
