बुधवार को भारतीय शेयर बाजारों में अच्छी शुरुआत हुई। अमेरिका से आए महंगाई के नरम आंकड़ों ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी के डर को कम कर दिया है, जिससे बाजार को सहारा मिला है। रूसी ऊर्जा पर प्रस्तावित अमेरिकी टैरिफ में संशोधन ने भी वैश्विक बाजारों को शांत करने में मदद की है। निवेशक इस बात पर नजर रख रहे हैं कि ये वैश्विक संकेत भारतीय इक्विटी बाजारों में विदेशी पूंजी के प्रवाह और स्थिरता को कैसे प्रभावित करते हैं।
अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों का असर
भारतीय शेयर बाजारों ने बुधवार को सकारात्मक शुरुआत की, जिसमें Sensex और Nifty दोनों सूचकांकों में बढ़त दर्ज की गई। बाजार की यह तेजी मुख्य रूप से जून के लिए आए अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों से प्रेरित थी, जो उम्मीद से काफी कम रहे। भारतीय निवेशकों के लिए, कम महंगाई का मतलब है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी की संभावना कम हो जाती है। डॉलर के स्थिर होने से भारत जैसे उभरते बाजारों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के लिए निवेश का आकर्षण बढ़ सकता है।
अमेरिकी टैरिफ प्रस्तावों पर संशोधित रुख
महंगाई के आंकड़ों के अलावा, बाजार रूसी ऊर्जा आयात पर अमेरिकी प्रतिबंध विधेयक में हुए संशोधन पर भी प्रतिक्रिया दे रहा था। शुरुआत में, रूसी ऊर्जा पर 500% का प्रस्तावित टैरिफ वैश्विक ऊर्जा की कीमतों को बाधित कर सकता था और भारत सहित प्रमुख आयातकों के लिए लागत बढ़ा सकता था। हालांकि, संशोधित प्रस्ताव में टैरिफ की सीमा को 100% तक सीमित कर दिया गया है, जिससे भविष्य की आयात लागतों को लेकर अनिश्चितता कम हुई है और कुछ राहत मिली है।
वैश्विक बाजार का मिजाज और तकनीकी दृष्टिकोण
घरेलू बाजार की यह सकारात्मक चाल एशियाई बाजारों में भी देखी जा रही है, जहां अनुकूल वैश्विक संकेतों के बाद बढ़त दर्ज की गई। अमेरिकी स्टॉक फ्यूचर्स भी इस आशावाद को दर्शा रहे हैं, जो वॉल स्ट्रीट पर संभावित तेजी का संकेत दे रहे हैं। हालांकि, बाजार विश्लेषक तकनीकी संकेतकों पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। Geojit Investments की रिसर्च के अनुसार, Nifty इंडेक्स को 24,140 के स्तर पर सपोर्ट मिल रहा है। हालिया तेजी के बावजूद, तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि मोमेंटम इंडिकेटर्स में कोई मजबूत दिशा नहीं दिख रही है, और निकट भविष्य में Nifty के 23,940 से 24,270 के दायरे में रहने की उम्मीद है। निवेशक विदेशी संस्थागत निवेश के पैटर्न और वैश्विक आर्थिक अपडेट पर नजर रखना जारी रखेंगे, क्योंकि ये निकट अवधि के बाजार की अस्थिरता को निर्धारित करने वाले प्राथमिक कारक बने रहेंगे।
