West Asia में टेंशन, क्रूड ऑयल $5 चढ़ा: Sensex, Nifty 2% से ज़्यादा गिरे!

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorSaanvi Reddy|Published at:
West Asia में टेंशन, क्रूड ऑयल $5 चढ़ा: Sensex, Nifty 2% से ज़्यादा गिरे!

बुधवार को भारतीय शेयर बाज़ारों में पिछले 4 महीनों की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स (Sensex) **1,600** अंकों से ज़्यादा लुढ़क गया। वेस्ट एशिया में बढ़ते भू-राजनैतिक तनाव के चलते कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में **$5** प्रति बैरल से ज़्यादा का उछाल आया, जिसने निवेशकों में घबराहट फैला दी।

कच्चे तेल में तेज़ी और बाज़ार की घबराहट

पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव की खबरों ने भारतीय शेयर बाज़ारों को हिला कर रख दिया। कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में 5 डॉलर प्रति बैरल से ज़्यादा का उछाल आया। भारत अपनी ज़रूरत का ज़्यादातर तेल इम्पोर्ट करता है, इसलिए तेल की बढ़ी कीमतें चिंता का सबब हैं। इनसे इम्पोर्ट का खर्च बढ़ेगा, रुपये पर दबाव आएगा और महंगाई बढ़ेगी। निवेशकों को डर है कि अगर यह संघर्ष लंबा खिंचा तो वैश्विक सप्लाई चेन बाधित हो सकती है, जिससे बाज़ार में बिकवाली बढ़ गई।

बाज़ार में घबराहट और दौलत का नुकसान

बाज़ार की घबराहट (Volatility) को दर्शाने वाला इंडिया VIX 26.01% उछलकर 14.68 पर पहुंच गया। यह पिछले 16 महीनों में सबसे बड़ी एक दिनी बढ़ोतरी है, जो वैश्विक आर्थिक स्थिरता को लेकर बाज़ार सहभागियों की चिंता दिखाती है। इस गिरावट से एक ही दिन में निवेशकों की लगभग ₹8.97 लाख करोड़ की दौलत डूब गई। BSE का कुल मार्केट कैप घटकर ₹471.24 लाख करोड़ रह गया। BSE पर 3,205 शेयरों में गिरावट आई, जबकि सिर्फ़ 1,077 शेयरों में तेज़ी देखी गई।

सेक्टर्स पर असर और मैक्रो इकोनॉमिक समीकरण

NSE और BSE के सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए। बैंकिंग, FMCG, फाइनेंशियल सर्विसेज और ऑटो सेक्टर्स सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए। विश्लेषकों का कहना है कि कंपनियों की पहली तिमाही (Q1) के नतीजे उम्मीद से कमज़ोर रहने की आशंकाओं (pre-earnings anxiety) ने भी इस गिरावट को बढ़ा दिया है। इसके अलावा, ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी, जो अक्सर महंगाई और भू-राजनीतिक अस्थिरता से जुड़ा होता है, ने निवेशकों को इक्विटी जैसे जोखिम भरे एसेट्स से दूर जाने पर मजबूर किया है। मिड-कैप और स्मॉल-कैप इंडेक्स ने लार्ज-कैप की तुलना में थोड़ी ज़्यादा मज़बूती दिखाई, लेकिन वे भी क्रमशः 2.02% और 1.80% गिरे।

निवेशकों को वेस्ट एशिया की स्थिति पर कड़ी नज़र रखनी चाहिए, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में होने वाला उतार-चढ़ाव बाज़ार की दिशा तय करेगा। साथ ही, आने वाले Q1 नतीजों के सीज़न पर भी नज़र रहेगी कि घरेलू कंपनियां बढ़ती ऊर्जा लागत और अनिश्चितता के बीच मुनाफे को कैसे बनाए रखती हैं।

Disclaimer:This article is published for informational purposes only. While reasonable efforts are made to ensure accuracy, completeness, and timeliness, readers are encouraged to independently verify information before making any decisions based on the content. The views and information presented are subject to editorial review and may be updated without notice.