भारतीय शेयर बाज़ार ने हफ्ते का अंत मजबूती के साथ किया है। BSE Sensex और NSE Nifty दोनों में लगातार चौथी हफ्ते की बढ़त दर्ज की गई है। Sensex **0.86%** और Nifty **0.89%** की तेजी के साथ बंद हुए। ग्लोबल सेंटीमेंट में सुधार और ब्याज दरों के रुझान को लेकर सकारात्मक उम्मीदों ने बाज़ार को सहारा दिया, जिससे निवेशकों की दौलत में **₹5.08 लाख करोड़** का इजाफा हुआ।
क्या हुआ?
भारतीय शेयर बाज़ारों ने इस हफ्ते लगातार चौथी बार बढ़त दर्ज की है। Sensex हफ्ते के अंत में 0.86% चढ़कर 77,763.91 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 0.89% की तेजी के साथ 24,270.85 पर रहा। हफ्ते के दौरान ग्लोबल जियोपॉलिटिकल टेंशन, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंताएं कम हुईं, जिससे कच्चे तेल की कीमतों को स्थिर करने में मदद मिली। इस सकारात्मक माहौल का असर बाज़ार पर दिखा और निवेशकों की कुल दौलत में ₹5.08 लाख करोड़ का उछाल आया। BSE में लिस्टेड सभी कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन बढ़कर करीब ₹480.25 लाख करोड़ हो गया है।
ब्रॉड मार्केट और इंस्टीट्यूशनल फ्लो
इस हफ्ते बेंचमार्क इंडेक्स की तुलना में ब्रॉड मार्केट इंडेक्स में ज़्यादा मजबूती देखी गई। BSE MidCap इंडेक्स 0.80% और BSE SmallCap इंडेक्स 1.51% की बढ़त के साथ चमके। इससे पता चलता है कि सिर्फ बड़ी कंपनियों में ही नहीं, बल्कि छोटे और मझोले शेयरों में भी खरीदारी बढ़ी है। फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) ने हफ्ते के दौरान ₹4,179.12 करोड़ की खरीदारी की, वहीं डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) ने भी ₹12,633.54 करोड़ का बड़ा निवेश किया, जो बाज़ार के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
सेक्टोरल लीडर्स और लैगार्ड्स
बाज़ार की इस तेजी में रियलटी, फार्मा, हेल्थकेयर, FMCG और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे सेक्टर्स सबसे आगे रहे। कुछ सेक्टर्स ने तो 7.81% तक की छलांग लगाई। वहीं, बैंकिंग सेक्टर इस हफ्ते थोड़ा पिछड़ता हुआ दिखा और एकमात्र प्रमुख सेक्टर्स में से रहा जिसने गिरावट दर्ज की। Sensex के शेयरों में Adani Ports, Bajaj Finserv और Bajaj Finance ने अच्छी तेजी दिखाई, जबकि L&T, Kotak Mahindra Bank और Axis Bank पर बिकवाली का दबाव रहा।
मैक्रो इकोनॉमिक और टेक्निकल सिचुएशन
हफ्ते की शुरुआत में, मॉनसून के शुरुआती पैटर्न को लेकर चिंताएं और ग्लोबल शांति समझौतों को लेकर अनिश्चितता के कारण बाज़ार में कुछ मुनाफावसूली (Profit Booking) देखने को मिली थी। हालांकि, US फेडरल रिजर्व की ओर से आए नरम कमेंट्री के बाद सेंटीमेंट में सुधार हुआ। इससे निवेशकों को ग्लोबल इंटरेस्ट रेट में अधिक नरमी की उम्मीद जगी है। टेक्निकल तौर पर, Nifty 23,800-24,200 के कंसॉलिडेशन रेंज से बाहर निकलने में कामयाब रहा है। अब बाज़ार की नज़र 24,450-24,600 के ज़ोन पर है, जो एक महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस लेवल है। यहां 200-दिनों का एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) पिछले ऐतिहासिक उच्च स्तरों के साथ मिलता है।
निवेशकों को क्या ध्यान देना चाहिए?
जैसे-जैसे बाज़ार इस टेक्निकल रेजिस्टेंस लेवल के करीब पहुंच रहा है, निवेशकों को इंडेक्स की गति और 24,600 के स्तर के पास संभावित वोलैटिलिटी (Volatility) पर नज़र रखनी चाहिए। आने वाली कॉर्पोरेट अर्निंग्स सीज़न की उम्मीदें और ग्लोबल इंटरेस्ट रेट नीतियों पर कोई भी नया अपडेट महत्वपूर्ण रहेगा। इसके अलावा, बैंकिंग सेक्टर में हालिया कमजोरी को देखते हुए, प्रमुख फाइनेंशियल स्टॉक्स का प्रदर्शन आने वाले हफ्तों में बाज़ार की मौजूदा तेजी को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
