भारतीय शेयर बाज़ारों में 14 जुलाई को बड़ी गिरावट दर्ज की गई। Nifty 50 लगभग 0.66% लुढ़ककर **24,052** पर बंद हुआ, जबकि Sensex **0.72%** की गिरावट के साथ **77,054** पर आ गया। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनावों ने निवेशकों के सेंटिमेंट को प्रभावित किया, जिसका असर कई प्रमुख सेक्टर्स पर दिखा। भारतीय रुपये में भी डॉलर के मुकाबले गिरावट आई।
बाज़ार में आई बिकवाली की लहर
14 जुलाई को भारतीय इक्विटी बाज़ार में भारी गिरावट देखी गई। BSE Sensex 561.46 अंक गिरकर 77,054.94 पर बंद हुआ, वहीं NSE Nifty 50 भी 158.95 अंक की गिरावट के साथ 24,052.05 पर आ गया। इस व्यापक गिरावट की मुख्य वजह ग्लोबल कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ी रही, जो सीधे तौर पर भारत के व्यापार घाटे और महंगाई को प्रभावित करती है। इसके अलावा, मिडिल ईस्ट में बढ़ती भू-राजनीतिक अस्थिरता ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।
ब्रॉडर मार्केट का हाल
बाज़ार में नकारात्मक माहौल का असर मिडकैप और स्मॉलकैप सेक्टर्स पर भी दिखा। Nifty Midcap 100 इंडेक्स 0.4% और Nifty Smallcap 100 इंडेक्स 1% तक नीचे आ गए। बिकवाली ज़्यादातर सेक्टर्स में फैली, खासकर Nifty Realty इंडेक्स 2% गिर गया। PSU बैंक, ऑटो, बैंक और IT सेक्टर्स भी 1% से ज़्यादा की गिरावट के साथ पिछड़ते दिखे। हालांकि, Nifty Pharma इंडेक्स 1.03% और Nifty Metal इंडेक्स 0.60% की बढ़त के साथ कुछ राहत देते नज़र आए।
कंपनियों के नतीजे और शेयर प्रदर्शन
बाज़ार में कई कंपनियों के नतीजे और ख़बरों का भी असर रहा। HCL Technologies के शेयर 4.6% गिरे, भले ही कंपनी ने पहली तिमाही के नतीजे पेश किए थे। दूसरी ओर, Biocon के शेयर एक बड़े ब्लॉक डील के बाद 6% चढ़ गए। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में PDS को ग्लोबल सुपरमार्केट चेन के साथ नए SaaS कॉन्ट्रैक्ट की घोषणा के बाद 6% का फायदा हुआ, जबकि Nuvoco Vistas का तिमाही नेट प्रॉफिट 20% साल-दर-साल बढ़ने से शेयर 8% उछल गए। Welspun Corp को नए ऑर्डर्स मिलने की ख़बर से शेयर 4% बढ़ गए, ये ऑर्डर्स कुल ₹1,400 करोड़ के थे। फाइनेंसियल सेक्टर में, IDBI Bank के शेयर सरकारी विनिवेश को हरी झंडी मिलने की रिपोर्ट के बाद 2.5% ऊपर गए।
मैक्रो इकोनॉमिक फैक्टर्स
दिन के कारोबारी माहौल को दर्शाते हुए, भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 58 पैसे कमजोर होकर 96.20 पर बंद हुआ। आगे चलकर, कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता और भू-राजनीतिक तनावों पर आने वाले अपडेट्स पर निवेशकों की नज़र रहेगी, क्योंकि ये दोनों ही फैक्टर्स भारतीय इक्विटी बाज़ार में फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टमेंट और सेक्टरल मार्जिन पर बड़ा असर डाल सकते हैं।
