Sensex-Nifty में मामूली उछाल, IT स्टॉक्स ने संभाली बाज़ार की कमान

ECONOMY
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Sensex-Nifty में मामूली उछाल, IT स्टॉक्स ने संभाली बाज़ार की कमान

सोमवार को भारतीय शेयर बाज़ारों ने निचले स्तरों से वापसी करते हुए मामूली बढ़त दर्ज की। कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज़ी और भू-राजनीतिक तनाव के बीच IT स्टॉक्स में हुई खरीदारी ने बाज़ार को सहारा दिया।

बाज़ार में उथल-पुथल के बाद मामूली तेज़ी

सोमवार को भारतीय शेयर बाज़ारों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। BSE Sensex अंत में 47 अंक चढ़कर 77,616.40 पर बंद हुआ, जबकि Nifty50 24,211 पर अपनी क्लोजिंग देने में कामयाब रहा। यह लगातार तीसरा दिन था जब इन प्रमुख सूचकांकों ने बढ़त दर्ज की।

बाज़ार की शुरुआत काफी गिरावट के साथ हुई थी, जहां सुबह के कारोबार में Sensex 700 अंकों से भी ज़्यादा लुढ़क गया था। इस गिरावट की मुख्य वजह वैश्विक बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों का तेज़ी से बढ़ना था। ब्रेंट क्रूड ऑयल $77.96 प्रति बैरल के पार चला गया था। भारत जैसे देश के लिए, जहाँ तेल का एक बड़ा हिस्सा इम्पोर्ट किया जाता है, कच्चे तेल का महंगा होना महंगाई को बढ़ाने, कंपनियों के मुनाफे को कम करने और भारतीय रुपये पर दबाव डालने वाला होता है। खासकर मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और कंज्यूमर गुड्स जैसे सेक्टर्स पर इसका सीधा असर पड़ता है।

IT सेक्टर का दम

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते बाज़ार में चिंता का माहौल था, लेकिन सूचना प्रौद्योगिकी (IT) यानी IT सेक्टर के शेयरों में आई ज़बरदस्त तेज़ी ने बाज़ार को गिरने से बचाया। आने वाले नतीजों (Corporate Earnings) के सीज़न को लेकर सकारात्मक उम्मीदों के चलते IT कंपनियों के शेयरों में अच्छी खरीदारी हुई। भारतीय IT कंपनियाँ अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा अमेरिकी डॉलर में विदेशी ग्राहकों से करती हैं, इसलिए मुश्किल वक़्त में इन्हें एक सुरक्षित निवेश (Defensive Play) के तौर पर देखा जाता है।

वैश्विक जोखिमों पर नज़र

पश्चिम एशिया में बढ़ी सैन्य गतिविधयों ने वैश्विक इक्विटी बाज़ार को सतर्क कर दिया है। इसका असर साउथ कोरिया के Kospi जैसे अंतर्राष्ट्रीय सूचकांकों पर भी दिखा, जो तेल की कीमतों में उछाल के बाद तेज़ी से गिरे। भारतीय निवेशकों के लिए, यह देखना अहम होगा कि तेल की कीमतें स्थिर होती हैं या महंगाई इसी तरह बढ़ती रहती है, जिसका असर भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के ब्याज दरों पर भी पड़ सकता है। साथ ही, यह भी देखना होगा कि कंपनियाँ बढ़ती लागतों को कैसे मैनेज करती हैं, जो उनके भविष्य के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती हैं।

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