भारतीय शेयर बाज़ार में गुरुवार को गिरावट देखने को मिली। कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के चलते $95 प्रति बैरल के पार पहुंच गईं, जिससे महंगाई (Inflation) बढ़ने का डर सता रहा है। सेंसेक्स (Sensex) **340** अंकों से ज़्यादा गिरा, जबकि निफ्टी (Nifty) **23,900** के करीब आ गया। विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली और Dr Reddy's, HPCL जैसी कंपनियों के कमजोर नतीजों ने भी बाज़ार पर दबाव बनाया।
Detailed Coverage
कच्चे तेल के बढ़ते दाम का असर
गुरुवार को भारतीय शेयर बाज़ारों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट की मुख्य वजह ग्लोबल मैक्रोइकॉनॉमिक (Macroeconomic) फैक्टर्स और घरेलू कंपनियों के कमजोर प्रदर्शन रहे। सेंसेक्स (Sensex) 340 अंकों से ज़्यादा लुढ़क कर 76,413.38 पर बंद हुआ, वहीं निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 23,950 के स्तर से नीचे आकर 23,915.05 पर बंद हुआ। बाज़ार में अनिश्चितता का माहौल रहा क्योंकि निवेशकों ने बढ़ती ऊर्जा लागत (Energy Costs) का अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर का आकलन किया।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
बाज़ार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों का $95 प्रति बैरल के पार जाना रहा। यह उछाल हाल ही में ईरान पर अमेरिकी हमलों और लाल सागर (Red Sea) में तेल टैंकरों पर हुई रिपोर्टेड घटनाओं के बाद आया है। भारत अपनी ज़रूरत का ज़्यादातर कच्चा तेल आयात (Import) करता है, इसलिए यह उसके लिए एक बड़ी चिंता का विषय है। कच्चे तेल के महंगे होने से आयात बिल बढ़ता है, जिससे देश के ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) पर दबाव पड़ता है और सेंट्रल बैंक के लिए महंगाई को काबू करना मुश्किल हो जाता है। निवेशकों को डर है कि लगातार बढ़ती तेल की कीमतें मैन्युफैक्चरिंग (Manufacturing) और ट्रांसपोर्ट (Transport) सेक्टर की कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margin) को कम कर सकती हैं, क्योंकि वे बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों पर आसानी से नहीं डाल पाएंगे।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली और नतीजों का दबाव
बाज़ार की इस गिरावट में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली का भी बड़ा हाथ रहा। बुधवार को FIIs ने ₹819.20 करोड़ की इक्विटी (Equity) बेची। यह बिकवाली ग्लोबल अनिश्चितता के माहौल में निवेशकों के रिस्क एवर्जन (Risk Aversion) की ओर झुकाव को दिखाती है।
मैक्रो फैक्टर्स के अलावा, घरेलू कंपनियों के तिमाही नतीजों (Quarterly Earnings) ने भी बाज़ार को कोई राहत नहीं दी। Dr Reddy's Laboratories के शेयर में गिरावट देखने को मिली, क्योंकि कंपनी के तिमाही नतीजों में 4% की गिरावट दर्ज की गई थी। इसी तरह, Hindustan Petroleum Corporation Limited (HPCL) के जून तिमाही के नतीजे उम्मीद से कमजोर रहने के बाद स्टॉक 5% तक गिर गया। फार्मा (Pharma) और ऑयल मार्केटिंग (Oil Marketing) जैसे प्रमुख सेक्टर्स में आई इस गिरावट ने अहम सेक्टरल इंडेक्स (Sectoral Indices) को भी नीचे खींचा।
आगे क्या?
अब बाज़ार की चाल इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या मिडिल ईस्ट में आगे की घटनाओं के चलते क्रूड ऑयल की कीमतें स्थिर होती हैं या उनमें और बढ़ोतरी होती है। निवेशकों की नज़र आने वाली कंपनियों के मैनेजमेंट की कमेंट्री (Management Commentary) पर रहेगी कि वे संभावित इनपुट कॉस्ट इन्फ्लेशन (Input Cost Inflation) से कैसे निपटेंगे। इसके अलावा, FIIs की बिकवाली जारी रहती है या नहीं, यह भी एक अहम फैक्टर होगा जो यह तय करेगा कि निफ्टी के मौजूदा सपोर्ट लेवल्स (Support Levels) बने रहेंगे या बाज़ार में और गिरावट आएगी।
