भारतीय शेयर बाज़ारों में आज ज़बरदस्त रौनक देखने को मिली। BSE सेंसेक्स **800** अंकों से ज़्यादा उछलकर बंद हुआ। इस तेज़ी की सबसे बड़ी वजह Tata Consultancy Services (TCS) के रहे दमदार तिमाही नतीजे रहे, जिन्होंने IT सेक्टर में एक नई जान फूंकी है।
TCS के नतीजों का कमाल
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), जो भारत की सबसे बड़ी IT कंपनी है, ने जून तिमाही के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी ने पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले अपने नेट प्रॉफिट में 5% की बढ़ोतरी दर्ज की है। वहीं, कंपनी का रेवेन्यू 14% बढ़कर ₹72,275 करोड़ पर पहुंच गया। निवेशकों के लिए सबसे खास बात यह रही कि कंपनी का ऑर्डर बुक $9.5 बिलियन का रहा, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े कई बड़े सौदे शामिल हैं। TCS का कहना है कि AI-संचालित प्रोजेक्ट्स से उसका सालाना रेवेन्यू $2.6 बिलियन तक पहुंच गया है, जो बताता है कि ग्राहक डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पर खर्च करने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
कच्चे तेल की कीमतों से मिली राहत
TCS के शानदार प्रदर्शन के अलावा, ग्लोबल बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता ने भी भारतीय बाज़ार को सहारा दिया। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बावजूद, ब्रेंट क्रूड ऑयल $76.52 प्रति बैरल के आसपास रहा, जो भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों के लिए चिंताजनक $80-$100 की रेंज से काफी नीचे है। कम तेल कीमतों से महंगाई को काबू में रखने और कंपनियों के मुनाफे पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में मदद मिलती है। इसके अलावा, बाज़ार की अस्थिरता को मापने वाला India VIX 5% से ज़्यादा गिर गया, जिससे संकेत मिलता है कि निवेशक फिलहाल बाज़ार में पैसा लगाने में सहज महसूस कर रहे हैं।
सेक्टर का प्रदर्शन और आगे क्या?
Nifty IT इंडेक्स में 3% से ज़्यादा की बढ़त देखने को मिली, और इसके अलावा फाइनेंशियल सर्विसेज और पब्लिक सेक्टर बैंकों जैसे सेक्टर्स ने भी बाज़ार को ऊपर ले जाने में अहम भूमिका निभाई। TCS के मैनेजमेंट ने यह भी बताया कि कंपनी में हायरिंग बढ़ी है, जो पिछले एक साल के मुकाबले सबसे ज़्यादा है। इससे यह अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि कंपनी मैन्युफैक्चरिंग और लाइफ साइंसेज जैसे सेक्टर्स से आने वाली भविष्य की मांग के लिए तैयार है। अब निवेशक दूसरी बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजों का इंतज़ार करेंगे कि क्या IT सेक्टर की यह ग्रोथ दूसरे उद्योगों में भी देखने को मिलती है। बाज़ार की चाल आगे कच्चे तेल की कीमतों में किसी बड़े उतार-चढ़ाव या पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक जोखिमों से जुड़ी नई घटनाओं पर निर्भर करेगी।
