सोमवार को भारतीय शेयर बाज़ारों में शानदार रिकवरी देखने को मिली। कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट और जियोपॉलिटिकल टेंशन कम होने से निवेशकों का भरोसा लौटा। Nifty 50, **24,000** के करीब पहुंचा, वहीं रुपया भी डॉलर के मुकाबले काफी मजबूत हुआ। मीडिया, आईटी और रियलटी सेक्टरों की अगुवाई में बाज़ार में व्यापक बढ़त देखी गई।
Detailed Coverage
बाज़ार में लौटी रौनक: जानिए क्या है वजह?
पांच दिनों की गिरावट के बाद सोमवार को भारतीय इक्विटी बाज़ार में ज़बरदस्त वापसी हुई। ग्लोबल कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी और भू-राजनीतिक तनाव कम होने से निवेशकों ने खुलकर खरीदारी की।
Nifty 50 का इंडेक्स 0.96% चढ़कर 23,995.95 पर बंद हुआ, जबकि BSE Sensex 1.02% की बढ़त के साथ 76,835.78 पर पहुँच गया। यह व्यापक तेज़ी ऐसी थी कि Nifty 500 इंडेक्स के करीब 386 शेयरों में हरे निशान पर क्लोजिंग हुई, जो निवेशकों के बढ़ते आत्मविश्वास को दर्शाता है।
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का असर
हाल की ऊंचाई से कच्चे तेल की कीमतों में करीब $10 की गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा सकारात्मक संकेत है। भारत कच्चे तेल का एक बड़ा आयातक देश है, इसलिए कीमतों में कमी से महंगाई को काबू करने, करेंट अकाउंट डेफिसिट (Current Account Deficit) पर दबाव कम करने और ब्याज दरों को स्थिर रखने में मदद मिलती है। इस आर्थिक मजबूती का असर करेंसी बाज़ार में भी दिखा, जहाँ भारतीय रुपया करीब 65 पैसे मज़बूत होकर दिन की टॉप परफॉर्मिंग एशियाई मुद्राओं में से एक बन गया।
बाज़ार की घबराहट में कमी और टेक्निकल ट्रेंड्स
इंडिया VIX (India VIX), जो बाज़ार की अस्थिरता को मापता है, करीब 10% गिरकर 12.66 पर आ गया। यह ईरान पर संभावित अमेरिकी हमलों के रुकने के बाद निवेशकों की घबराहट में आई बड़ी कमी का संकेत देता है। टेक्निकल चार्ट्स पर, Nifty 50 ने 50-दिन के एक्सपोनेन्शियल मूविंग एवरेज (50-day Exponential Moving Average) को फिर से हासिल कर लिया, जिसे ट्रेडर्स अक्सर शॉर्ट-टर्म मार्केट स्ट्रेंथ का बैरोमीटर मानते हैं। इसके अलावा, डेली रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (Daily Relative Strength Index) 49.55 पर सुधर गया, जो पिछले हफ्ते की तुलना में खरीदारों के पक्ष में मोमेंटम (Momentum) में बदलाव का इशारा करता है।
सेक्टर्स में ज़बरदस्त तेज़ी
सेक्टर की बात करें तो Nifty मीडिया इंडेक्स ने रिकवरी में सबसे आगे रहते हुए सबसे ज़्यादा तेज़ी दर्ज की, जिसके बाद आईटी (IT) और रियलटी (Realty) सेक्टरों में भी बढ़त देखी गई। ऑटो (Auto) और फार्मा (Pharma) सेक्टरों में भी अच्छी चाल रही। यह तेज़ी सिर्फ बड़ी कंपनियों तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि Nifty मिडकैप 100 (Nifty Midcap 100) और Nifty स्मॉलकैप 100 (Nifty Smallcap 100) इंडेक्स में भी 1% से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई, जिससे पता चलता है कि व्यापक बाज़ार में भागीदारी बढ़ी है।
आगे क्या?
हालांकि, फिलहाल बाज़ार का आउटलुक (Outlook) नेगेटिव से बदलकर साइडवेज (Sideways) और बुलिश (Bullish) का मिक्स नज़र आ रहा है, लेकिन भविष्य की चाल ग्लोबल डेवलपमेंट पर निर्भर करेगी। हॉरमज़ की जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की स्थिरता और भू-राजनीतिक जोखिमों में किसी भी बड़े बदलाव पर नज़र रहेगी। निवेशक अब लार्सन एंड टुब्रो (Larsen & Toubro) और हिंदुस्तान यूनिलीवर (Hindustan Unilever) जैसी बड़ी कंपनियों की आने वाली अर्निंग्स (Earnings) पर नज़र रखेंगे, ताकि घरेलू मांग और कंपनियों की लाभप्रदता का अंदाज़ा लगाया जा सके। अगर Nifty 50, 24,100-24,200 की रेंज से ऊपर बना रहता है, तो इसे 24,500 के करीब अगला रेजिस्टेंस (Resistance) मिल सकता है, जबकि 23,800 का स्तर इमीडिएट सपोर्ट (Support) का काम करेगा।
