सोमवार को भारतीय शेयर बाज़ारों में शानदार रिकवरी देखने को मिली। लगातार 5 दिनों की गिरावट के बाद, सेंसेक्स **1.02%** की बढ़त के साथ **76,835** के स्तर पर बंद हुआ। इस तेजी की मुख्य वजह पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में आई **8.2%** की भारी गिरावट रही। अब निवेशकों की नज़रें आने वाले केंद्रीय बैंक की नीतियों पर टिकी हैं।
Detailed Coverage
बाज़ार में लौटी रौनक, क्यों?
सोमवार को भारतीय शेयर बाज़ारों ने निवेशकों की घबराहट को दूर करते हुए जोरदार वापसी की। पिछले पांच सत्रों की गिरावट पर विराम लगाते हुए, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 776.01 अंक या 1.02% चढ़कर 76,835.78 पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 भी 228.50 अंक या 0.96% की मजबूती के साथ 23,995.95 पर समाप्त हुआ।
इस रिकवरी की सबसे बड़ी वजह वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट रही। ब्रेंट क्रूड ऑयल 8.2% लुढ़क कर $89 प्रति बैरल पर आ गया, क्योंकि पश्चिम एशिया में युद्ध के आसार कम हो गए हैं। भारत जैसे देश के लिए, जो अपनी ज़रूरत का ज़्यादातर तेल आयात करता है, तेल की गिरती कीमतें अर्थव्यवस्था और कंपनियों के मुनाफे के लिए बेहद अच्छी खबर है। इससे आयात बिल कम होगा और कंपनियों की लागत भी घटेगी।
ग्लोबल मार्केट्स और टेक का जलवा
भारतीय बाज़ारों की यह तेजी ग्लोबल ट्रेंड के अनुरूप थी। अमेरिका में भी बाज़ार हरे निशान में खुले, नैस्डैक 100 1.7% ऊपर चढ़ा। टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है। इसका उदाहरण शंघाई स्टॉक एक्सचेंज पर दिखा, जहाँ मेमोरी चिप निर्माता CXMT Corp. के शेयर 535% तक उछल गए।
एशियाई बाज़ारों में भी जोश दिखा। जापान का निक्केई 225, दक्षिण कोरिया का KOSPI और चीन का SSE कंपोजिट सभी हरे निशान में बंद हुए। यूरोप के बाज़ारों ने भी इसी राह पर चलते हुए वैश्विक स्तर पर जोखिम लेने की क्षमता में वापसी का संकेत दिया।
अब नज़रों में सेंट्रल बैंक की पॉलिसी
दिन की इस मजबूती के बावजूद, बाज़ार की चाल पर मॉनेटरी पॉलिसी का असर जारी रहेगा। निवेशक बुधवार को होने वाली फेडरल रिज़र्व (अमेरिकी सेंट्रल बैंक) की मीटिंग का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं। मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना लगभग एक-तिहाई है, जो वैश्विक लिक्विडिटी और भारत जैसे उभरते बाज़ारों के फ्लो को प्रभावित कर सकती है। बाज़ार की इस रिकवरी की असल मजबूती इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या कम ऊर्जा लागतें कंपनियों के मुनाफे को सपोर्ट करती रहेंगी और क्या सेंट्रल बैंक आने वाले महीनों में ब्याज दरों को लेकर स्थिरता का संकेत देते हैं।
