आज यानी 6 जुलाई को भारतीय शेयर बाज़ार में ज़बरदस्त तेज़ी देखी गई। BSE Sensex **624** अंक चढ़कर **78,388** पर बंद हुआ, वहीं NSE Nifty 50 ने **24,450** का स्तर पार कर लिया। पश्चिम एशिया में भू-राजनैतिक तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता आने से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। जून में भारी बिकवाली के बाद विदेशी निवेशकों (FIIs) की वापसी ने बाज़ार को संभाला है।
बाज़ार में आई तेज़ी के पीछे के कारण
इस तेज़ी की मुख्य वजहें वैश्विक और घरेलू दोनों ही हैं। पश्चिम एशिया में भू-राजनैतिक तनाव कम होने के संकेत मिले हैं, जिससे निवेशकों का आत्मविश्वास बढ़ा है। इसके अलावा, ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें लगभग $71.9 प्रति बैरल पर स्थिर रहीं, जिससे महंगाई और भारत की आयात लागत को लेकर चिंताएं कम हुईं। बाज़ार के जानकारों का मानना है कि निवेशक पहली तिमाही के नतीजों (Q1 Earnings) के सीज़न की तैयारी में जुट गए हैं, जो आमतौर पर कंपनियों की ग्रोथ और मार्जिन परफॉर्मेंस के आधार पर स्टॉक के वैल्यूएशन को प्रभावित करते हैं।
सेक्टरवार प्रदर्शन और मुख्य शेयर
खरीदारी मुख्य रूप से ऑटो, रियलिटी और ऑयल एंड गैस सेक्टर में देखने को मिली। Nifty रियलिटी इंडेक्स 1.39% के साथ सबसे आगे रहा, इसके बाद Nifty ऑटो इंडेक्स 1.13% और Nifty ऑयल एंड गैस इंडेक्स 1.12% की बढ़त के साथ रहे। व्यक्तिगत शेयरों की बात करें तो HDFC बैंक 1.34% चढ़ा, जबकि Mahindra & Mahindra, Reliance Industries, Bharat Electronics और ICICI Bank जैसे शेयरों में 2% तक की बढ़त दर्ज की गई। दूसरी ओर, आईटी (IT) और पब्लिक सेक्टर बैंक (PSU Banks) सेक्टर में बिकवाली का दबाव दिखा, जो घरेलू खपत और औद्योगिक शेयरों की ओर पूंजी के प्रवाह का संकेत देता है।
संस्थागत निवेश का रुख और आगे की राह
बाज़ार की चाल में एक बड़ा बदलाव विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की खरीदारी के रूप में सामने आया है। जून के महीने में, जब FIIs ने ₹49,340 करोड़ की बिकवाली की थी, उसके बाद शुक्रवार को ₹1,355.33 करोड़ का इनफ्लो (निवेश) एक सकारात्मक संकेत है, जो आक्रामक बिकवाली पर विराम का संकेत दे सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर टेक्नोलॉजी शेयरों में वैश्विक अस्थिरता जारी रहती है, तो भारत को घरेलू बाज़ारों में फंडों के पुन: आवंटन से लाभ मिल सकता है।
टेक्निकल (Technical) तौर पर, Nifty 50 ने 24,400 के अहम रेजिस्टेंस लेवल को पार कर लिया है। वर्तमान ट्रेंड को बनाए रखने के लिए, इंडेक्स को 24,150 के सपोर्ट ज़ोन के ऊपर बने रहने की ज़रूरत होगी। 24,450 से ऊपर जाने पर 24,600 की ओर और तेज़ी आ सकती है, जबकि 24,150 से नीचे गिरने पर निवेशक मुनाफावसूली कर सकते हैं। निवेशकों की तत्काल नज़र इस बात पर रहेगी कि यह तेज़ी नतीजों के सीज़न के दौरान कितनी बनी रहती है और OPEC+ से कच्चे तेल की सप्लाई में बदलाव घरेलू कीमतों को कैसे प्रभावित करते हैं।
