आज भारतीय शेयर बाजारों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का Sensex **586** अंक बढ़कर **77,641** के स्तर पर पहुंच गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का Nifty **166** अंक चढ़कर **24,200** के पार निकल गया।
क्यों आई इतनी तेजी?
अमेरिकी महंगाई दर (US Inflation) में नरमी के संकेतों के बाद वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल बना, जिसका असर भारतीय शेयर बाजारों पर भी दिखा। बुधवार को कारोबार की शुरुआत से ही Sensex में जोरदार उछाल देखा गया। यह 586 अंकों की बढ़त के साथ दिन के उच्चतम स्तर 77,641 पर जा पहुंचा। वहीं, Nifty50 इंडेक्स में भी 166 अंकों की तेजी आई और यह 24,200 के महत्वपूर्ण स्तर को पार कर गया।
किन सेक्टर्स ने भरी उड़ान?
इस तेजी में फाइनेंशियल (Financial) और बैंकिंग (Banking) स्टॉक्स सबसे आगे रहे। Nifty PSU Bank इंडेक्स में 1.28% की बढ़त दर्ज की गई, जबकि Nifty Financial Services और Private Bank इंडेक्स भी 1% से अधिक मजबूत हुए। रियल एस्टेट और ऑटो सेक्टर में भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी। Nifty Auto इंडेक्स 0.75% चढ़ा। बाजार की अस्थिरता को मापने वाला India VIX 3% से ज्यादा गिरकर 13.27 पर आ गया, जिससे ट्रेडर्स का डर कुछ कम हुआ।
हालांकि, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) सेक्टर पर दबाव रहा और Nifty IT इंडेक्स 0.32% नीचे आया। मेटल और FMCG जैसे सेक्टर्स भी या तो स्थिर रहे या मामूली गिरावट दिखाई। इससे साफ है कि यह तेजी मुख्य रूप से घरेलू वित्तीय और कंजम्पशन (Consumption) वाले शेयरों में केंद्रित रही।
ग्लोबल संकेत और जोखिम
अमेरिकी महंगाई दर में आई कमी से उम्मीद बढ़ी है कि फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) ब्याज दरों को लेकर नरम रुख अपना सकता है। इसने वैश्विक और घरेलू सेंटिमेंट (Sentiment) को बढ़ावा दिया है। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें अब भी चिंता का विषय बनी हुई हैं। ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude Oil) $85 से $86 प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। भारत जैसे देश के लिए, जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा तेल आयात करता है, लगातार ऊंची कीमतों से व्यापार घाटे (Trade Balance) और महंगाई प्रबंधन पर असर पड़ सकता है।
इन बाहरी कारकों के अलावा, घरेलू निवेशक खुदरा महंगाई (Retail Inflation) और मॉनसून की प्रगति जैसे स्थानीय मुद्दों पर भी नजर रखे हुए हैं। ब्रोकरेज फर्मों का कहना है कि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) से उत्पन्न अनिश्चितता बाजार की स्थिरता के लिए जोखिम बनी हुई है। आने वाले दिनों में बैंकिंग और वित्तीय शेयरों का प्रदर्शन यह बताएगा कि क्या यह तेजी कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच जारी रह सकती है।
