Sensex की लंबी छलांग: तेल की कीमतों में 5% की गिरावट, बाजार में लौटी रौनक!

ECONOMY
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AuthorMehul Desai|Published at:
Sensex की लंबी छलांग: तेल की कीमतों में 5% की गिरावट, बाजार में लौटी रौनक!

भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को शानदार वापसी देखने को मिली। सेंसेक्स **566** अंक चढ़ गया, वहीं निफ्टी 50 में **153** अंकों की तेजी दर्ज की गई। इस उछाल की मुख्य वजह हार्मोन जलडमरूमध्य के पास भू-राजनीतिक तनाव में कमी के बाद कच्चे तेल की कीमतों में आई **5%** की भारी गिरावट है। इसके अलावा, निवेशक भावना में सुधार के साथ भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले **35** पैसे मजबूत हुआ।

Detailed Coverage

बाजार में लौटी रौनक, 5-दिनों की गिरावट का सिलसिला टूटा

भारतीय शेयर बाजारों ने हफ्ते की शुरुआत जोरदार तेजी के साथ की है। सोमवार को बीएसई सेंसेक्स 566 अंक बढ़कर 76,608.66 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 50 में 153.60 अंकों की बढ़त देखी गई और यह 23,923.30 पर बंद हुआ। बाजार की इस रिकवरी में तेल की कीमतों में आई नरमी और कंपनियों के तिमाही नतीजों को लेकर सुधरे सेंटीमेंट का अहम योगदान रहा।

तेल की कीमतों में गिरावट से महंगाई की चिंता कम

बाजार में इस तेजी का सबसे बड़ा कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट रही। ब्रेंट क्रूड करीब 5% लुढ़ककर $91.89 प्रति बैरल पर आ गया, वहीं यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) में 5.23% की गिरावट के साथ यह $84.64 प्रति बैरल पर पहुंच गया। यह गिरावट अमेरिका और ईरान के बीच सप्ताहांत पर हुई किसी भी सीधी कार्रवाई पर लगी रोक के बाद आई, जिससे हॉर्मुज जलडमरूमध्य से शिपिंग गतिविधियां फिर से शुरू हो सकीं। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है, ऐसे में कच्चे तेल की कम कीमतें इंपोर्ट बिल को नियंत्रित करने और चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit) पर दबाव कम करने में मददगार मानी जाती हैं।

तिमाही नतीजों ने भी बढ़ाया भरोसा

प्रमुख सूचीबद्ध कंपनियों के हालिया तिमाही वित्तीय नतीजों ने भी निवेशकों के आत्मविश्वास को और बढ़ाया है। टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, एनटीपीसी (NTPC), आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (IDFC First Bank) और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक (AU Small Finance Bank) जैसी कंपनियों के शेयर नतीजे जारी होने के बाद बढ़त में दिखे। भारतीय बाजार में, तिमाही नतीजों को निवेशक काफी बारीकी से देखते हैं, क्योंकि ये बताते हैं कि कंपनियां अस्थिर आर्थिक माहौल में परिचालन लागत और मांग के दबाव से कैसे निपट रही हैं।

रुपये में मजबूती और आर्थिक स्थिरता

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में भी मजबूती दिखी। रुपया 35 पैसे मजबूत होकर 96.18 पर पहुंच गया। मजबूत रुपया अक्सर स्थानीय अर्थव्यवस्था में निवेशक के बढ़ते भरोसे का संकेत माना जाता है, खासकर जब यह ऊर्जा आयात लागत में कमी के साथ हो।

हालांकि, बिकवाली के दबाव वाले हफ्ते के बाद यह उछाल राहत भरा है, लेकिन निवेशक इस बात पर नजर रखेंगे कि भू-राजनीतिक तनाव की यह शांति कब तक बनी रहती है। बाजार की अगली चाल इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या कच्चे तेल की कीमतें स्थिर रहती हैं या नए भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के कारण इनमें और उतार-चढ़ाव आता है। इसके अलावा, बाजार प्रतिभागी मौजूदा तिमाही नतीजों के सीजन पर भी नजर बनाए रखेंगे, क्योंकि बैंकिंग, पावर और कंज्यूमर गुड्स जैसे क्षेत्रों के बड़े शेयरों का प्रदर्शन आने वाले हफ्तों में व्यापक सूचकांकों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.