बुधवार को शेयर बाजार में रौनक लौटी! BSE Sensex **553** अंक चढ़कर **77,603** पर बंद हुआ, वहीं NSE Nifty ने **24,200** का आंकड़ा पार किया। निवेशकों का भरोसा बढ़ने की वजह से आई इस तेजी में रुपये की रिकवरी और विदेशी निवेशकों के **$2.59 अरब** के निवेश का बड़ा हाथ रहा। अमेरिका से ब्याज दरों में नरमी के संकेत भी बाजार के लिए पॉजिटिव रहे।
विदेशी निवेश और रुपये का कमाल
बाजार में आई इस रिकवरी की सबसे बड़ी वजहों में से एक है विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का बढ़ता भरोसा। जुलाई के पहले दस दिनों में ही $2.59 अरब का इक्विटी में निवेश करके FIIs ने भारतीय बाजार के प्रति अपना झुकाव दिखाया है। यह बदलाव काफी अहम है क्योंकि यह दिखाता है कि ग्लोबल निवेशक भारतीय ग्रोथ स्टोरी पर भरोसा कर रहे हैं।
इसके साथ ही, भारतीय रुपया भी डॉलर के मुकाबले 5 पैसे मजबूत होकर 96.11 के स्तर पर पहुंच गया। मजबूत रुपया उन भारतीय कंपनियों के लिए फायदेमंद होता है जो आयात पर निर्भर हैं, जैसे कि तेल और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर।
ग्लोबल संकेतों का असर
एशियाई बाजारों में भी तेजी का रुख देखने को मिला। अमेरिका से महंगाई कम होने के आंकड़े आने के बाद टेक्नोलॉजी शेयरों में अच्छी खरीदारी हुई। जब अमेरिका में महंगाई घटती है, तो यह उम्मीद की जाती है कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बड़ी बढ़ोतरी से बचेगा, जो उभरते बाजारों के लिए अच्छा संकेत है।
वहीं, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भू-राजनीतिक चिंताएं भी फिलहाल शांत हुई हैं। अमेरिका द्वारा खाड़ी क्षेत्र में व्यापार समझौतों को प्राथमिकता देने के फैसले ने सप्लाई चेन की लागत को लेकर निवेशकों की चिंताओं को कम किया है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतें $80 प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं, लेकिन बाजार फिलहाल इसे एक मैनेजेबल रिस्क मान रहा है।
आगे क्या देखना होगा?
फिलहाल बाजार में सकारात्मक माहौल है, लेकिन निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों और रुपये के बीच के संबंध पर बनी रहेगी। तेल की ऊंची कीमतें भारत के इंपोर्ट बिल और रुपये की स्थिरता पर दबाव डाल सकती हैं। इसके अलावा, विदेशी निवेश की यह रफ्तार आगे जारी रहती है या नहीं, यह भी देखना अहम होगा। कॉर्पोरेट नतीजों और घरेलू मैक्रोइकॉनॉमिक आंकड़ों के दम पर बाजार मौजूदा वैल्यूएशन को कितना सही ठहरा पाता है, यह अगले चरण की चाल तय करेगा।
