वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों में बढ़ोतरी के कारण भारतीय शेयर बाजारों में आज बड़ी गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स **400** अंकों से ज़्यादा लुढ़क गया, जबकि निफ्टी **115** अंक नीचे आ गया। बैंकिंग और ऑटो जैसे साइक्लिकल सेक्टरों में बिकवाली हावी रही, वहीं फार्मा सेक्टर ने कुछ हद तक मजबूती दिखाई।
क्या हुआ?
29 जून 2026, सोमवार को भारतीय शेयर बाजारों ने हफ्ते की शुरुआत कमजोरी के साथ की। लम्बे वीकेंड के बाद खुले बाजार में BSE सेंसेक्स 400 अंकों से ज़्यादा नीचे आ गया, वहीं Nifty 50 इंडेक्स में भी करीब 115 अंकों की गिरावट देखी गई। इस बड़ी गिरावट का मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव रहा, जिसने निवेशकों के भरोसे को हिला दिया और बाजार में 'रिस्क-ऑफ' यानी सुरक्षित निवेश की ओर झुकाव देखने को मिला।
निवेशक क्यों चिंतित हैं?
भू-राजनीतिक घटनाएं, खासकर जब वे बड़ी वैश्विक शक्तियों और महत्वपूर्ण ऊर्जा भंडारों वाले क्षेत्रों से जुड़ी हों, तो अक्सर बाजार में अस्थिरता लाती हैं। तनाव बढ़ने पर निवेशक आम तौर पर साइक्लिकल और जोखिम-संवेदनशील संपत्तियों से अपना पैसा निकाल लेते हैं। इससे बिकवाली का दबाव बनता है, क्योंकि ट्रेडर्स को वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति या समग्र आर्थिक स्थिरता में संभावित व्यवधान की आशंका होती है। ऐसे माहौल में, बाजार प्रतिभागी अक्सर सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं, जिससे बैंकिंग, ऑटो और आईटी जैसे वैश्विक आर्थिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील इंडेक्स में व्यापक गिरावट आती है।
सेक्टरों में बदलाव और मजबूती
बाजार की मिली-जुली चाल के बीच, सभी सेक्टरों पर एक जैसा असर नहीं पड़ा। Nifty फार्मा और हेल्थकेयर इंडेक्स अपेक्षाकृत स्थिर रहे, जो निवेशकों के रक्षात्मक (defensive) रुख को दर्शाता है। इसी तरह, मेटल सेक्टर में भी मामूली बढ़त देखी गई। इसके विपरीत, आर्थिक भावनाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील सेक्टर जैसे Nifty ऑटो, PSU बैंक, आईटी, सीमेंट और केमिकल्स में भारी बिकवाली हुई, कई 1% से 2% तक नीचे गिर गए। यह दिखाता है कि निवेशक फिलहाल उन शेयरों में ज्यादा सहज हैं जिन पर अल्पकालिक मैक्रोइकॉनॉमिक अस्थिरता का असर कम पड़ता है।
मार्केट की चौड़ाई को समझना
सूचकांकों में यह कमजोरी ब्रॉडर मार्केट में भी दिखी। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर 2,034 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि 1,168 शेयरों में बढ़त के साथ कारोबार बंद हुआ। यह अंतर बताता है कि बिकवाली का दबाव व्यापक था और सिर्फ बड़े शेयरों तक ही सीमित नहीं था। Nifty 50 की कंपनियों में, Dr. Reddy’s Laboratories, Cipla, Max Healthcare, Trent और Hindalco ने बढ़त दर्ज की। वहीं, Kotak Mahindra Bank, Eicher Motors, Tata Consumer Products और Mahindra & Mahindra दिन के टॉप लूजर्स में शामिल थे।
आगे क्या देखें?
निवेशकों के लिए, तत्काल देखने योग्य बातें अमेरिका और ईरान के बीच भू-राजनीतिक स्थिति का विकास होंगी, जो वैश्विक भावना को तय करेंगी। इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में कोई भी महत्वपूर्ण उतार-चढ़ाव और भारतीय रुपये की स्थिरता महत्वपूर्ण कारक होंगे, क्योंकि ये अक्सर भू-राजनीतिक जोखिमों पर सबसे पहले प्रतिक्रिया करते हैं। हालांकि मौजूदा अस्थिरता बाहरी घटनाओं से प्रेरित है, बाजार प्रतिभागी यह भी देखेंगे कि बिकवाली का दबाव बना रहता है या आने वाले सत्रों में बाजार निचले स्तरों पर सहारा पाता है।
