भारतीय शेयर बाजार 20 जुलाई को गिरावट के साथ बंद हुए। इसकी मुख्य वजह वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों का $90 प्रति बैरल के पार जाना रहा। विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रही, वहीं डोमेस्टिक संस्थागत निवेशकों ने बाज़ार को सहारा दिया।
Detailed Coverage
बाज़ार में आई गिरावट की मुख्य वजह?
20 जुलाई, 2026, सोमवार को भारतीय शेयर बाज़ारों में भारी उठापटक देखने को मिली। इसका मुख्य कारण पश्चिमी एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज़ी है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत $90 प्रति बैरल के पार चली गई, जिसने महंगाई और भारत के आयात बिल पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। इन सब का असर भारतीय रुपया की स्थिरता पर भी पड़ सकता है।
इसके चलते, BSE Sensex 443 अंक गिरकर 77,708 पर बंद हुआ, जबकि NSE Nifty50 ने 96 अंकों की गिरावट के साथ 24,239 पर क्लोजिंग दी।
संस्थागत निवेशकों का खेल?
पूरे दिन बाज़ार का सेंटिमेंट कमजोर बना रहा। एक्सचेंज के आंकड़े बताते हैं कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने लगातार छठी बार बिकवाली की है और ₹1,121.04 करोड़ के शेयर बेचे। वहीं, डोमेस्टिक संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाज़ार को सहारा दिया। उन्होंने लगातार नौवें दिन खरीदारी की और ₹1,312.03 करोड़ का निवेश किया। डोमेस्टिक फंड्स के इस लगातार सपोर्ट ने ही निफ्टी और सेंसेक्स को सेशन के निचले स्तरों से ऊपर आने में मदद की।
अर्थव्यवस्था और कंपनियों की क्या है स्थिति?
भू-राजनीतिक चिंताओं के अलावा, निवेशक संसद की कार्यवाही की शुरुआत और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर भी बारीकी से नज़र रखे हुए हैं। बैंकिंग सेक्टर में, ICICI Bank ने अपने नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) को बनाए रखने और बढ़ाने की क्षमता से ध्यान खींचा है। इसके अलावा, सरकार ने टैक्स पॉलिसी को लेकर स्पष्टता दी है कि इक्विटी पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स हटाने की कोई योजना नहीं है। यह जानकारी तब आई है जब AY2025-26 के लिए इस टैक्स से सरकार का कलेक्शन ₹1 लाख करोड़ के पार पहुँच चुका है।
निवेशकों को किन बातों पर रखनी है नज़र?
आगे चलकर, बाज़ार के प्रतिभागी पहली तिमाही (Q1) की कमाई के सीज़न पर नज़र रखेंगे ताकि बढ़ी हुई इनपुट कॉस्ट और वैश्विक अनिश्चितता का कंपनियों के मुनाफे पर पड़ने वाले असर का अंदाज़ा लगा सकें। मंगलवार को नतीजे पेश करने वाली कंपनियों में Sobha, Canara HSBC Life, और SML Mahindra शामिल हैं। निवेशक Emcure Pharma से जुड़े रेगुलेटरी अपडेट पर भी नज़र रखेंगे। टेक्नीकल नज़रिया देखें तो, Nifty50 का 24,000 का स्तर एक अहम साइकोलॉजिकल सपोर्ट बना हुआ है, जिस पर एनालिस्ट्स की नज़र रहेगी कि कच्चे तेल की कीमतों और बाहरी भू-राजनीतिक घटनाओं के बीच इंडेक्स स्थिरता बनाए रख पाते हैं या नहीं।
