भारतीय शेयर बाज़ारों में लगातार दूसरे हफ़्ते गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स (Sensex) में **2,090** अंकों से ज़्यादा की भारी गिरावट आई। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical tensions) ने बिकवाली को हवा दी, हालांकि, FMCG जैसे डिफेंसिव सेक्टर ने कुछ सहारा दिया। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली जारी रही, लेकिन घरेलू निवेशकों (DIIs) की खरीदारी ने बाज़ार को कुछ हद तक संभाले रखा।
Detailed Coverage
बाज़ार पर मंडराया भू-राजनीतिक संकट का साया
भारतीय शेयर बाज़ारों ने इस हफ़्ते काफ़ी चुनौतियों का सामना किया, जहाँ बेंचमार्क इंडेक्स लगातार दूसरे हफ़्ते लाल निशान में बंद हुए। BSE सेंसेक्स 2,091.68 अंक यानी 2.67% लुढ़ककर 76,059.77 पर बंद हुआ। वहीं, Nifty 50 भी 2.32% की गिरावट के साथ 23,767.45 पर बंद हुआ। बाज़ार की गिरती चाल की मुख्य वजह मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical tensions) को माना जा रहा है, जिसने ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent crude oil) की कीमतों को $100 प्रति बैरल के पार पहुंचा दिया है। इससे भारत की इकोनॉमी में महंगाई (inflationary pressure) बढ़ने और इंपोर्ट कॉस्ट (import costs) में इज़ाफ़ा होने की चिंताएं बढ़ गई हैं।
सेक्टरों का अलग-अलग प्रदर्शन
जहां एक तरफ़ बाज़ार में गिरावट का माहौल था, वहीं अलग-अलग सेक्टरों ने मिले-जुले संकेत दिए। प्राइवेट बैंकिंग और रियल एस्टेट शेयरों पर सबसे ज़्यादा दबाव देखा गया। Nifty प्राइवेट बैंक इंडेक्स 4.32% और Nifty रियलिटी इंडेक्स 4.02% तक गिर गए। बड़े वित्तीय संस्थानों में प्रॉफिट-बुकिंग (profit-booking) का असर इन इंडेक्स पर साफ़ दिखा। वहीं, डिफेंसिव सेक्टरों ने बाज़ार को कुछ राहत दी। Nifty FMCG इंडेक्स 0.62% चढ़ गया, जो बताता है कि अस्थिरता के दौर में निवेशकों ने कंज्यूमर गुड्स स्टॉक्स में स्थिरता तलाशी। Nifty ऑटो और मीडिया इंडेक्स भी हरे निशान में बंद होने में कामयाब रहे।
मिडकैप और स्मॉलकैप की मज़बूती
बड़े शेयरों में गिरावट के बावजूद, मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट ने लार्ज-कैप बेंचमार्क की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया। Nifty मिडकैप 100 इंडेक्स में 1.2% की गिरावट आई, जबकि Nifty स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 2% तक लुढ़का। इन सेगमेंट में भी अलग-अलग शेयरों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। Mahindra and Mahindra Financial Services और Astral जैसी कंपनियों ने बढ़त दर्ज की, वहीं Motilal Oswal Financial Services और Bandhan Bank जैसे नामों में बिकवाली का भारी दबाव देखा गया।
संस्थागत निवेशकों की भूमिका
संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) की भागीदारी ने बाज़ार की अलग-अलग भावनाओं को दर्शाया। विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) पूरे हफ़्ते नेट सेलर (net sellers) बने रहे और उन्होंने ₹7,182.08 करोड़ की बिकवाली की। इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) बाज़ार के लिए सपोर्ट का मुख्य ज़रिया साबित हुए और उन्होंने ₹8,637.58 करोड़ का निवेश किया। इस घरेलू खरीदारी ने बाज़ार की कुल मार्केट कैपिटलाइज़ेशन (market capitalization) में आई कमी को कुछ हद तक सीमित कर दिया, हालांकि BSE पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप फिर भी करीब ₹5 लाख करोड़ घट गया।
आगे की राह
विश्लेषकों का मानना है कि जब तक भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होता और तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक बाज़ार में सतर्कता बनी रह सकती है। निवेशक आगामी तिमाही नतीजों (quarterly earnings reports) पर नज़र रखेंगे और यह देखेंगे कि क्या घरेलू खरीदारी, विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली की भरपाई कर पाती है, खासकर अगर वैश्विक ऊर्जा की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं। Nifty 50 पर 23,600 के सपोर्ट लेवल पर नज़र रखी जाएगी।
