भारत की इकोनॉमी में गजब की मजबूती, दुनिया को देगी टक्कर
S&P Global Ratings के मुताबिक, भारत की इकोनॉमी अपनी मजबूत डोमेस्टिक फंडामेंटल्स और समझदारी भरी फिस्कल मैनेजमेंट के दम पर शानदार मजबूती दिखा रही है। एजेंसी ने भारत की क्रेडिट रेटिंग पर 'स्टेबल' आउटलुक बरकरार रखा है। S&P ने कहा है कि भारत "फिस्कल कंसोलिडेशन (राजकोषीय समेकन) के लिए राजनीतिक प्रतिबद्ध" है।
ग्रोथ का बड़ा अनुमान: ग्लोबल लीडर बनने की राह पर भारत
S&P का अनुमान है कि अगर तेल की कीमतें औसतन $85 प्रति बैरल रहती हैं, तो भारत का GDP फाइनेंशियल ईयर 2026-27 में 7.1% की दर से बढ़ेगा। और अगर तेल की कीमतें $130 प्रति बैरल तक भी पहुंच जाती हैं, तब भी ग्रोथ 6.3% के मजबूत स्तर पर बनी रहेगी। यह दर ग्लोबल ग्रोथ (IMF के अनुसार 3.0-3.1%) और अमेरिका ( 2.0-2.3%), चीन ( 4.2-4.8%) जैसी बड़ी इकॉनमी से काफी बेहतर है। Goldman Sachs भी 2026 में भारत की GDP ग्रोथ 6.9% रहने का अनुमान लगा रहा है। भारत की मजबूत डोमेस्टिक डिमांड और सपोर्टिव पॉलिसीज इस ग्रोथ की मुख्य वजह हैं।
ऐतिहासिक मजबूती और S&P की रेटिंग
इससे पहले 1970s और 2008 जैसे तेल की कीमतों में भारी उछाल के दौर में भारत की इकोनॉमी को बड़ा झटका लगा था, जिससे महंगाई, करेंसी में गिरावट और करंट अकाउंट डेफिसिट (चालू खाते का घाटा) बढ़ा था। उदाहरण के लिए, 2008 के शॉक में रुपया 25% गिरा था और चालू खाते का घाटा GDP का 11% हो गया था। लेकिन आज, सर्विसेज सेक्टर का बढ़ना और एनर्जी एफिशिएंसी जैसे स्ट्रक्चरल बदलावों के कारण भारत पहले से कहीं ज्यादा मजबूत स्थिति में है।
इसी बढ़ी हुई मजबूती, मजबूत ग्रोथ और लगातार फिस्कल टाइटनिंग के चलते S&P Global Ratings ने अगस्त 2025 में भारत की सॉवरेन रेटिंग को 'BBB' तक अपग्रेड किया था। एजेंसी को भारत के फिस्कल मैनेजमेंट पर इतना भरोसा है कि वह मानती है कि मौजूदा तेल की कीमतों का शॉक रेटिंग को प्रभावित नहीं करेगा। S&P ने सरकार के लॉन्ग-टर्म फिस्कल डिसिप्लिन के प्रति कमिटमेंट और खर्चों को एडजस्ट करने की क्षमता पर गौर किया है, जिसमें डेफिसिट लक्ष्यों को पूरा करने के लिए सब्सिडी में कटौती भी शामिल हो सकती है।
भारत की इकोनॉमी के सामने मुख्य जोखिम
S&P के पॉजिटिव आउटलुक के बावजूद, कुछ बड़े जोखिम भारत के इकोनॉमिक परफॉरमेंस को चुनौती दे सकते हैं। अगर तेल की कीमतें लगातार $130 प्रति बैरल पर बनी रहीं, तो भारत की ग्रोथ 0.8% तक धीमी हो सकती है। इसके अलावा, कॉर्पोरेट अर्निंग्स पर भी असर पड़ सकता है, जिसमें EBITDA में 15-25% की गिरावट और लेवरेज में 0.5x-1x की बढ़ोतरी का अनुमान है। बैंकिंग सेक्टर की एसेट क्वालिटी भी बिगड़ सकती है, जिससे नॉन-परफॉरमिंग एसेट्स (NPAs) 3.5% तक पहुंच सकते हैं। तेल की कीमतों में हर $10 प्रति बैरल की बढ़ोतरी पर करंट अकाउंट डेफिसिट GDP का लगभग 0.4% बढ़ सकता है। मिडिल ईस्ट से होने वाली रेमिटेंस (पैसे भेजना) में कमी भी इसे और बढ़ा सकती है। सप्लाई में दिक्कतें फ्यूल की राशनिंग और फर्टिलाइजर जैसे जरूरी सामानों की कमी का कारण बन सकती हैं। सरकार फिस्कल कंसोलिडेशन के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन इन कोशिशों में अस्थायी बाधाएं आ सकती हैं। 2026-27 के लिए डेट-टू-GDP रेश्यो 55.6% रहने का अनुमान है, जो अभी भी काफी बड़ा डेट लेवल है। गौर करने वाली बात यह है कि सिर्फ इंटरेस्ट पेमेंट्स ही FY27 में GDP ग्रोथ को पार करने का अनुमान है, जो डेट सर्विसिंग के लगातार दबाव को दिखाता है।
आगे का रास्ता
भारत की इकोनॉमिक मोमेंटम जारी रहने की उम्मीद है, जिससे यह ग्लोबल ग्रोथ का एक बड़ा इंजन बनेगा। हालांकि, इस मजबूत परफॉरमेंस को बनाए रखने के लिए वोलेटाइल एनर्जी प्राइस और जियो-पॉलिटिकल अनिश्चितताओं से निपटना होगा। फिस्कल डिसिप्लिन, इंफ्रास्ट्रक्चर में लगातार निवेश और डेट मैनेजमेंट के लिए स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स लॉन्ग-टर्म स्टेबिलिटी और भारत की ग्रोथ पोटेंशियल को हासिल करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण होंगे।