STEM Talent Exodus: भारतीय ओलंपियाड विजेताओं का 59% अमेरिका में बस रहा!

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
STEM Talent Exodus: भारतीय ओलंपियाड विजेताओं का 59% अमेरिका में बस रहा!

एक चिंताजनक ट्रेंड सामने आया है! 2011 से 2021 के बीच भारत के टॉप STEM ओलंपियाड विजेताओं में से **59%** ने या तो पढ़ाई के लिए या करियर बनाने के लिए अमेरिका का रुख कर लिया है। वहीं, सिर्फ **18%** ही भारत में रुके हैं, जो देश के रिसर्च और टेक सेक्टर के लिए एक बड़ी चुनौती है।

Detailed Coverage

प्रतिभा पलायन का बड़ा सच

हालिया विश्लेषण के मुताबिक, 2011 से 2021 के बीच गणित, इन्फॉर्मेटिक्स और फिजिक्स जैसे क्षेत्रों के 148 अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड विजेताओं में से 59% अब अमेरिका में बस गए हैं। इनमें से कई वहां उच्च शिक्षा, रिसर्च या टेक कंपनियों में नौकरियां कर रहे हैं। इसके मुकाबले, इन प्रतिभाशाली युवाओं में से केवल 18% ही भारत में रह पाए हैं।

प्रतिभा पलायन के मुख्य कारण

यह पलायन खासकर अंतरराष्ट्रीय गणित और इन्फॉर्मेटिक्स ओलंपियाड के विजेताओं में ज्यादा देखने को मिला है। हालांकि, केमिस्ट्री के विजेताओं में भारत में रहने की प्रवृत्ति थोड़ी ज्यादा है, लेकिन कुल मिलाकर अमेरिका ही सबकी पहली पसंद बना हुआ है। ये युवा अक्सर बड़ी ग्लोबल टेक कंपनियों, क्वांटिटेटिव ट्रेडिंग फर्मों या टॉप यूनिवर्सिटीज में डॉक्टरेट रिसर्च के लिए चले जाते हैं। कुछ इन्फॉर्मेटिक्स और फिजिक्स के विजेताओं ने तो विदेश से ही नए स्टार्टअप्स शुरू किए हैं या AI और मशीन लर्निंग की शुरुआती स्टेज वाली कंपनियों से जुड़े हैं।

भारत के लिए चिंता का विषय

विशेषज्ञों का मानना है कि इस टैलेंट के बाहर जाने से भारत की लंबी अवधि की रिसर्च क्षमता पर असर पड़ रहा है। चेन्नई मैथमेटिकल इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर एमिरिटस, राजीव करंदिकर कहते हैं कि जो लोग भारत में रहकर अकादमिक या रिसर्च का काम करना चाहते हैं, उन्हें भी यहां जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और रिसर्च का माहौल नहीं मिल पाता। चेन्नई मैथमेटिकल इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर, माधवन मुकुंद का सुझाव है कि भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों को ऐसे छात्रों को आकर्षित करने के लिए और बेहतर और कॉम्पिटिटिव प्रोग्राम बनाने होंगे, ताकि वे पढ़ाई के शुरुआती दौर में ही विदेश जाने से बचें।

प्रदर्शन में कमी नहीं, पर चुनौती बरकरार

हालांकि, इन सबके बावजूद अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है। फिजिक्स में भारत ने 2000 से 2024 के बीच लगातार 40% से ज्यादा गोल्ड मेडल जीते हैं। गणित में भी भारत का प्रदर्शन सुधरा है, 2000 के दशक में जहां 5% गोल्ड मेडल मिलते थे, वहीं 2020 के दशक में यह बढ़कर 35% हो गया है। इन्फॉर्मेटिक्स में भी भारत का दबदबा लगभग 10% गोल्ड मेडल के साथ बना हुआ है। अब आने वाले समय में यह देखना होगा कि क्या सरकारी नीतियां या संस्थागत बदलाव इन टॉप ग्रेजुएट्स को भारत में ही अपना करियर और रिसर्च करने के लिए प्रेरित कर पाते हैं या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.